नई दिल्ली। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बुधवार को कहा कि प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (पीएमएमवाई) सूक्ष्म उद्यमियों को सशक्त बनाकर 2047 तक ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को प्राप्त करने में सक्रिय भागीदार बनेगी। सीतारमण ने बताया कि 8 अप्रैल, 2015 को शुरू हुई इस योजना ने 11 वर्षों में 40 लाख करोड़ रुपये से अधिक का ऋण वितरित किया है, जिससे करोड़ों लोग आत्मनिर्भर बने हैं।
प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (पीएमएमवाई) की 11वीं वर्षगांठ के अवसर पर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने ‘एक्स’ पोस्ट पर जारी एक बयान में कहा कि पिछले एक दशक में देश ने एक मौन बदलाव देखा है, जहां करोड़ों आम नागरिक नए आत्मविश्वास के साथ उद्यमिता के क्षेत्र में आगे आए हैं। सीतारमण ने कहा कि इसके केंद्र में 8 अप्रैल, 2015 को प्रधानमंत्री द्वारा शुरू की गई पहल पीएमएमवाई है, जिसका उद्देश्य ही ‘जिन्हें ऋण नहीं मिला, उन्हें वित्त उपलब्ध कराना’ था।
वित्त मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री मुद्रा योजना ऐसे लोगों को वित्त उपलब्ध कराने पर केंद्रित है, जिन्हें ऋण नहीं मिला है। सीतारमण ने कहा कि ,’शिशु’ श्रेणी में 78 फीसदी ऋणों के साथ पीएम मुद्रा योजना पहली बार उद्यमी बनने वालों को महत्वपूर्ण वित्तीय सहायता प्रदान कर रही है। यह योजना उद्यमियों को सशक्त बनाना जारी रखेगी। उन्होंने कहा कि इन उद्यमियों की 2047 तक राष्ट्र को ‘विकसित भारत’ बनाने की यात्रा में सक्रिय भागीदारी होगी।
वित्त मंत्री ने आगे कहा, ‘‘11 साल बाद यह योजना देश में एमएसएमई और अनगिनत व्यक्तिगत उद्यमियों के लिए ऋण परिदृश्य को नया आकार देने में सहायक रही है। ये वे उद्यमी थे, जो अब तक औपचारिक बैंकिंग प्रणाली से बाहर थे। इस पहल के साथ ऋण की बाधाओं को दूर करके उद्यमिता का वास्तव में लोकतंत्रीकरण हुआ है।’’
सीतारमण ने लाखों लोगों को सशक्त बनाने और समावेशी विकास के दृष्टिकोण को पूरा करने में पीएमएमवाई की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि कुल मिलाकर 57.79 करोड़ से अधिक ऋण स्वीकृत किए गए हैं, जिसके तहत 40.07 लाख करोड़ रुपये वितरित किए गए हैं। उन्होंने कहा, ‘‘दो-तिहाई ऋण महिला उद्यमियों को स्वीकृत किए गए हैं। कुल कर्ज का लगभग पांचवां हिस्सा पहली बार उद्यमी बनने वाले व्यक्तियों को दिया गया। संख्या के हिसाब से देखें तो नए उद्यमियों को 12 लाख करोड़ रुपये की राशि के 12.15 करोड़ ऋण दिए गए हैं।’’
वित्त मंत्री ने इस योजना को आम आदमी तक पहुंचाने और इसे बड़ी सफलता बनाने के लिए बैंकों, विभिन्न वित्तीय संस्थानों और हितधारकों की भी सराहना की।
साभार – हिस
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