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भाजपा सरकार कठघरे में
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– वेदांता को मिली माइनिंग मंजूरी पुलिसिया कार्रवाई के बाद मंडराये काले बादल
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राष्ट्रपति से हस्तक्षेप की मांग, केंद्र-राज्य दोनों पर दबाव
भुवनेश्वर। सिजिमाली में प्रदर्शनकारी आदिवासियों पर हुई पुलिसिया कार्रवाई विवाद अब सीधे सियासी टकराव में बदल गया है। विपक्षी बीजू जनता दल (बीजद) ने इस मुद्दे पर आक्रामक रुख अपनाते हुए भाजपा सरकार को सीधे कठघरे में खड़ा कर दिया है। दिलचस्प यह है कि जिस राज्य में मुख्यमंत्री, केंद्र में जनजातीय मंत्री और देश की राष्ट्रपति, तीनों आदिवासी समुदाय से आते हैं, वहीं आदिवासी मुद्दे पर राजनीति अपने चरम पर पहुंच गई है।
बीजद ने आरोप लगाया है कि वेदांता को माइनिंग की मंजूरी मिलने के बाद से ही सिजिमाली क्षेत्र में तनाव बढ़ा है। अब जब आदिवासी समुदाय इसका विरोध कर रहा है, तो प्रशासनिक कार्रवाई ने हालात को और भड़का दिया है।
पार्टी ने सीधे तौर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से हस्तक्षेप की मांग की है। बीजद नेताओं का कहना है कि जब देश की सर्वोच्च संवैधानिक पद पर आसीन व्यक्ति खुद आदिवासी समाज से हैं, तो सिजिमाली के आदिवासियों को न्याय मिलना चाहिए।
रायगड़ा जिला बीजद अध्यक्ष जगन्नाथ सारका ने आरोप लगाया कि खनन कंपनी द्वारा सड़क निर्माण के विरोध में शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों पर प्रशासन ने बल प्रयोग किया। उन्होंने इसे “आदिवासियों पर अत्याचार” करार देते हुए कहा कि विकास के नाम पर उनके अधिकारों को कुचला नहीं जा सकता।
रात में बिजली काटकर कार्रवाई
कोरापुट जिला अध्यक्ष झिन्ना हिक्का ने और गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि रात में बिजली काटकर कार्रवाई की गई, जो किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने पेसा कानून और वनाधिकार कानून के उल्लंघन का भी मुद्दा उठाया।
मामला “आदिवासी बनाम सत्ता” की लड़ाई
बीजद ने इस पूरे मामले को “आदिवासी बनाम सत्ता” की लड़ाई के रूप में पेश करते हुए भाजपा सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए हैं। पार्टी का कहना है कि आदिवासी हितों की बात करने वाली सरकार जमीनी स्तर पर विफल साबित हो रही है।
सस्मित पात्र का केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री को पत्र
इसी बीच बीजद के राज्यसभा सांसद डॉ सस्मित पात्र ने केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री जुएल ओराम को पत्र लिखकर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने कथित पुलिस कार्रवाई, आदिवासियों के घायल होने और ग्राम सभा की सहमति की अनदेखी जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया।
तीन अहम बिंदुओं पर जोर दिया
डॉ पात्र ने तीन अहम बिंदुओं पर जोर दिया, आदिवासियों को पुलिस ज्यादती से सुरक्षा, खनन में ग्राम सभा की अनिवार्य सहमति, और पेसा व वनाधिकार कानूनों का सख्त पालन। साथ ही उन्होंने मुख्यमंत्री से संवाद स्थापित कर प्रभावित क्षेत्रों में भरोसा बहाल करने की अपील की।
सिजिमाली मामला राजनीतिक रणनीति का बड़ा मुद्दा बना
सिजिमाली अब केवल एक स्थानीय विवाद नहीं रहा, बल्कि यह आदिवासी अधिकार, खनन नीति और राजनीतिक रणनीति का बड़ा मुद्दा बन चुका है। आने वाले दिनों में यह टकराव और तेज होने के संकेत मिल रहे हैं।
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