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दलित और आदिवासी संगठनों ने किया था आह्वान
भुवनेश्वर। दलित और आदिवासी संगठनों द्वारा अपनी मांगों के समर्थन में बुलाए गए सुबह से शाम तक के ‘भारत बंद’ से ओडिशा में जनजीवन प्रभावित दिखा। बुधवार सुबह से ही ट्रेनों, ट्रकों और अन्य वाहनों की आवाजाही बाधित हुई, जिससे सामान्य जीवन प्रभावित हुआ। राजधानी भुवनेश्वर में अधिकांश दुकानें बंद रही। मार्केट बिल्डिंग में भी दोपहर के समय सन्नाटा पसरा रहा। बच्चों को स्कूल ले जाने वाले वैन चालकों ने सड़क पर गाड़ी को नहीं उतारा। इससे स्कूल खुले होने के कारण अधिकांश बच्चे विद्यालय नहीं जा सके।
कई स्थानों पर प्रदर्शनकारियों ने ट्रेन ट्रैक, बस स्टैंड और प्रमुख स्टॉप पर पिकेटिंग कर वाहनों की आवाजाही को रोक दिया। यात्रियों और कार्यालय जाने वालों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा, क्योंकि सड़कों पर बसें नहीं चल रही थीं। भुवनेश्वर, संबलपुर, राउरकेला, रायगड़ा और कई अन्य स्थानों पर रेलवे स्टेशनों और बस स्टॉप पर पिकेटिंग के कारण सार्वजनिक परिवहन सेवाएं प्रभावित रहीं।
प्रदर्शनकारियों ने संबलपुर-पुरी और संबलपुर-रायगड़ा ट्रेनों को खेतराजपुर स्टेशन पर 30 मिनट तक रोके रखा। बाद में ट्रेनों ने अपने गंतव्य के लिए प्रस्थान किया। बलांगीर, सोनपुर, जाजपुर और अनुगूल में दुकानों, शॉपिंग मॉल्स और अन्य व्यापार संघों ने भी दलित और आदिवासी संगठनों को अपना समर्थन दिया।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले का विरोध करते हुए नेशनल कन्फेडरेशन ऑफ दलित एंड आदिवासी ऑर्गनाइजेशन ने मांगों की एक सूची जारी की है और सरकार से इस फैसले को खारिज करने का आग्रह किया है। उन्होंने तर्क दिया है कि यह अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के संवैधानिक अधिकारों को खतरे में डालता है। संगठन संसद में नए कानून की मांग भी कर रहा है, जिसमें अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षण की सुरक्षा के तहत संविधान की नवीं अनुसूची में शामिल किया जाए। इस आंदोलन को भीम आर्मी, नेशनल कन्फेडरेशन ऑफ दलित ऑर्गनाइजेशन और ओडिशा आदिवासी कल्याण महासंघ का समर्थन मिल रहा है। हालांकि, आपातकालीन सेवाएं जैसे कि एम्बुलेंस संचालन जारी रही।
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