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इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च के शोध में हुआ खुलासा
भुवनेश्वर. ओडिशा की आर्थिक नगरी कटक देश में ब्रेन स्ट्रोक के मामले की राजधानी बन गयी है. यहां रिकार्ड तोड़ ब्रेन स्ट्रोक के मामले दर्ज किये गये हैं, जबकि ब्रेन स्ट्रोक से मौत के मामले में यह जिला देश में तीसरे स्थान पर है.
इस बात का खुलासा इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) के एक नवीनतम अध्ययन से हुआ है. इस शोध में पता चला है कि कटक भारत के अन्य शहरों में ब्रेन स्ट्रोक के मामलों में सबसे शीर्ष पर है. अध्ययन के अनुसार, कटक जिले में एक वर्ष में प्रति एक लाख जनसंख्या पर 187 ब्रेन स्ट्रोक के मामले दर्ज होते हैं. ठीक इसी तरह देश में हर एक लाख पुरुष आबादी में से 217 पुरुष एक साल में इस बीमारी से पीड़ित होते हैं. जहां तक महिलाओं की बात है, तो यह संख्या 156 है.
स्ट्रोक घटना और मृत्यु दर: जनसंख्या आधारित स्ट्रोक रजिस्ट्रियों की एक रिपोर्ट नामक यह अध्यन बीते बुधवार को जारी किया गया था. आईसीएमआर की बेंगलुरु इकाई में राष्ट्रीय रोग सूचना विज्ञान और अनुसंधान केंद्र (एनसीडीआईआर) द्वारा इसका आयोजन किया गया था.
यह शोध भारत में वयस्कों में स्ट्रोक के मामलों के आंकड़ों में राष्ट्रव्यापी अंतर को दूर करने के लिए आयोजित किया गया था. इसमें उत्तर से वाराणसी, पश्चिम से कोटा, पूर्व से कटक, दक्षिण से तिरुनेलवेली जैसे देश के पांच अलग-अलग क्षेत्रों में जनसंख्या आधारित स्ट्रोक मामले रखे गये थे. ओडिशा के कटक जिले में एससीबी मेडिकल कॉलेज और अस्पताल, असम के कछार जिले में सिलचर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल, तमिलनाडु में तिरुनेलवेली मेडिकल कॉलेज, राजस्थान के कोटा में सरकारी मेडिकल कॉलेज और चिकित्सा विज्ञान संस्थान के साथ-साथ उत्तर प्रदेश के वाराणसी जिले से बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) अध्ययन के हिस्सा थे.
कटक के लिए एकमात्र राहत यह है कि जहां मामलों की संख्या अधिक है, वहीं मृत्यु दर कम है. वाराणसी हर एक लाख आबादी में से 46 ब्रेन स्ट्रोक मौतों के साथ आंकड़े में सबसे ऊपर है. कछार 39.9 मौतों के साथ दूसरे स्थान पर है, जबकि कटक प्रति एक लाख जनसंख्या पर 31 मौतों के साथ तीसरे स्थान पर है.
शोध की इस रिपोर्ट ने स्थिति को लेकर खतरे की घंटी बजा दी है. विशेषज्ञों का कहना है कि अगर आंकड़े सही हैं, तो निश्चित तौर पर कटक में स्थिति अच्छी नहीं है. कटक में स्ट्रोक के मरीज लगातार बढ़ रहे हैं, जो चिंताजनक हैं.
इसी तरह एम्स भुवनेश्वर के पूर्व निदेशक डॉ अशोक महापात्र ने कहा कि ‘हमें इस बीमारी की जड़ तक जाकर इसकी रोकथाम के लिए रणनीति बनानी चाहिए. मोटापा, उच्च रक्तचाप, मधुमेह और तंबाकू ब्रेन स्ट्रोक के कुछ प्रमुख कारण हैं. ऐसे लोग हैं जो मधुमेह के निदान के बाद भी इलाज का पालन नहीं करते हैं. यह विशेष रूप से चिंताजनक है, क्योंकि ब्रेन स्ट्रोक दिल का दौरा पड़ने के बाद दुनिया में दूसरा सबसे बड़ा मौत का कारण है.
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