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हरियाणा के प्रतिनिधियों ने जनजातीय जीवन को करीब से जाना
भुवनेश्वर। वनवासी कल्याण आश्रम, ओडिशा के प्रत्यक्ष मार्गदर्शन एवं विभिन्न परियोजनाओं के माध्यम से आयोजित तीन दिवसीय वनयात्रा आयोजित की गई। हरियाणा के आठ शहरों से आए 32 वनयात्रियों ने ओडिशा के जनजातीय क्षेत्रों का भ्रमण कर वहां के जीवन, संस्कृति, परंपराओं और कल्याणकारी गतिविधियों को करीब से जाना।
वनयात्रा में छह महिलाओं सहित 32 लोगों ने भाग लिया। इनमें गुरुग्राम विश्वविद्यालय के कार्यरत रजिस्ट्रार, एक सेवानिवृत्त कुलपति सहित छह शिक्षाविद, दो चिकित्सक, एक अधिवक्ता, 11 प्रतिष्ठित व्यवसायी, नौ सेवानिवृत्त कर्मचारी और चार सामाजिक कार्यकर्ता शामिल थे। प्रतिभागियों ने यात्रा के दौरान जनजातीय समाज के जीवन और उनकी सामाजिक-सांस्कृतिक परंपराओं का अध्ययन किया।
11 गांवों में जनजातीय जीवन का अध्ययन
यात्रियों ने गजपति, गंजाम और कंधमाल जिलों के 11 जनजातीय गांवों का दौरा किया। इन गांवों में वनवासी कल्याण आश्रम की विभिन्न परियोजनाओं के माध्यम से जनजातीय समाज के धर्म, संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण के साथ शिक्षा, स्वावलंबन, कृषि विकास और स्वास्थ्य के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों की जानकारी ली गई।
हरियाणा के कुरुक्षेत्र से ओडिशा की श्रीजगन्नाथ भूमि तक पहुंचे यात्रियों का जनजातीय समुदायों ने पारंपरिक आत्मीयता के साथ स्वागत और आतिथ्य किया। इस दौरान प्रतिभागियों ने मयूर नृत्य, वीर नृत्य, साउरा नृत्य और संकीर्तन सहित विभिन्न लोककलाओं एवं सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का आनंद लिया।
जनजातीय संस्कृति से हुए प्रभावित
यात्रियों ने जनजातीय समाज की सामाजिक और आर्थिक चुनौतियों के बीच उनकी समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं और जीवन मूल्यों को करीब से देखा। आयोजकों के अनुसार, जनजातीय समुदायों की संस्कृति, परंपरा और सामुदायिक जीवन से प्रतिभागी प्रभावित हुए तथा उन्होंने इसे प्रत्यक्ष अनुभव का महत्वपूर्ण अवसर बताया।
वनयात्रा का नेतृत्व उत्तर क्षेत्र के नगरीय कार्य प्रमुख श्री जयभगवान और प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र नरेश ने किया। ओडिशा से मानस पंडा सहित दो अन्य वनयात्री भी यात्रा में शामिल हुए। सह क्षेत्र संगठन मंत्री विश्वामित्र, सह ग्राम विकास प्रमुख कोरा, छात्र दीपक और महिला कार्यकर्ता श्रीमती वीणा सहित अन्य कार्यकर्ताओं ने यात्रा की व्यवस्थाओं में सहयोग किया। संगठन मंत्री कृष्ण चंद्र भाटी ने यात्रा की रूपरेखा तैयार की।
जनजातीय समाज के सहयोग का संकल्प
यात्रा के दौरान प्रतिभागियों ने जनजातीय समाज के साथ आत्मीय संबंध और सामाजिक एकता का अनुभव किया। आयोजकों के अनुसार, सभी यात्रियों ने “तुम-मैं एक रक्त” की भावना को आत्मसात करते हुए जनजातीय समाज के साथ सहयोग जारी रखने की प्रतिबद्धता व्यक्त की।
श्री जयभगवान ने नगरों से आए प्रतिनिधियों से जनजातीय समाज के बीच शिक्षा, धर्म-संस्कृति और सामाजिक विकास से जुड़े कार्यों में सहयोग करने का आह्वान किया। प्रतिभागियों ने छात्रावास और मंदिर निर्माण के लिए आर्थिक सहयोग उपलब्ध कराने पर भी सहमति जताई।
वनयात्रा के समापन के बाद सभी प्रतिभागियों ने पुरी पहुंचकर महाप्रभु श्रीजगन्नाथ के दर्शन किए और इसके बाद हरियाणा लौट गए।
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