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मोहन माझी, नवीन पटनायक और कानून मंत्री के संदेशों में गूंजा जेन-जी का जिक्र
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आठ साल बाद छात्र राजनीति की वापसी ने बढ़ाई सियासी हलचल
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राज्य में होने वाले निकाय चुनावों पर टिकी नजरें
भुवनेश्वर। ओडिशा में आठ साल के लंबे अंतराल के बाद संपन्न हुए छात्रसंघ चुनावों ने राज्य की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। कॉलेजों और विश्वविद्यालयों के परिसरों में छात्र प्रतिनिधित्व की वापसी के साथ ही ‘जेन-जी’ यानी नई पीढ़ी के युवाओं की राजनीतिक भूमिका चर्चा के केंद्र में आ गई है। खास बात यह है कि मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी, बीजद अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक तथा राज्य के कानून मंत्री पृथ्वीराज हरिचंदन ने छात्र चुनावों पर अपने संदेशों में जेन-जी का उल्लेख किया। इससे स्पष्ट है कि छात्र राजनीति के इस घटनाक्रम को अब केवल शिक्षण संस्थानों तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे राज्य की व्यापक राजनीतिक गतिविधियों से जोड़कर भी देखा जा रहा है।
एबीवीपी की जीत पर भाजपा का उत्साह
छात्रसंघ चुनावों में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के प्रदर्शन को मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी और कानून मंत्री पृथ्वीराज हरिचंदन ने युवाओं के समर्थन से जोड़कर प्रस्तुत किया। मुख्यमंत्री माझी ने एबीवीपी को बधाई देते हुए कहा कि यह सफलता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में युवाओं के विश्वास को दर्शाती है। उन्होंने उम्मीद जताई कि नवनिर्वाचित छात्र प्रतिनिधि विद्यार्थी कल्याण, शैक्षणिक विकास और राष्ट्र निर्माण में योगदान देंगे।
कानून मंत्री पृथ्वीराज हरिचंदन ने कहा कि आज की युवा पीढ़ी, जिसे जेन-जी कहा जाता है, ने बड़े पैमाने पर एबीवीपी पर भरोसा जताया है। उनके अनुसार, राज्य के 70 प्रतिशत से अधिक कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में एबीवीपी समर्थित उम्मीदवारों को सफलता मिली। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया में युवाओं की बढ़ती भागीदारी और संगठन के प्रति उनके विश्वास का संकेत बताया।
नवीन छात्रसंघ चुनावों को जेन-जी की ताकत बताया
दूसरी ओर, बीजद अध्यक्ष नवीन पटनायक ने विजयी उम्मीदवारों और विद्यार्थियों को बधाई देते हुए छात्रशक्ति की एकजुटता, समर्पण और लोकतांत्रिक भावना की सराहना की। उन्होंने छात्रसंघ चुनावों को ओडिशा के युवाओं और जेन-जी की ताकत का प्रतीक बताया। हालांकि, उन्होंने भाजपा सरकार पर चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करने के लिए अनुचित तरीके अपनाने का आरोप भी लगाया। बीजद नेताओं और उसके छात्र संगठन बीजू छात्र जनता दल (बीसीजेडी) के कार्यकर्ताओं ने भी मतदान से पहले छात्र नेताओं पर कथित दबाव बनाए जाने के आरोप लगाए हैं। ये आरोप विपक्ष की ओर से लगाए गए हैं।
नवीन पटनायक ने छात्र प्रतिनिधियों से राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर कॉलेज परिसरों में शांतिपूर्ण वातावरण बनाए रखने और शैक्षणिक गुणवत्ता की रक्षा के लिए मिलकर काम करने की अपील की थी।
अमित शाह ने भी एबीवीपी कार्यकर्ताओं को दी बधाई
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शनिवार को ओडिशा छात्रसंघ चुनावों में एबीवीपी के प्रदर्शन की सराहना की। उन्होंने कहा कि पंजाब विश्वविद्यालय और दिल्ली विश्वविद्यालय के बाद ओडिशा में भी संगठन की सफलता देश के युवाओं की राजनीतिक पसंद के बारे में एक संदेश देती है। शाह ने युवाओं के बीच राष्ट्र प्रथम की विचारधारा, अनुशासन और विकास के प्रति विश्वास का उल्लेख किया।
राज्य के 346 कॉलेजों और 13 विश्वविद्यालयों में छात्र राजनीति की वापसी को छात्र संगठनों के प्रभाव और युवाओं की भागीदारी के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। भुवनेश्वर, संबलपुर, ब्रह्मपुर और अनुगोल सहित विभिन्न क्षेत्रों के शिक्षण संस्थानों में चुनावी नतीजों ने राजनीतिक दलों का ध्यान युवा मतदाताओं की ओर खींचा है।
क्या बनेगा राजनीतिक प्रभाव का नया आधार?
छात्रसंघ चुनावों के नतीजों ने आगामी शहरी निकाय चुनावों के लिए भी राजनीतिक दलों के सामने नए सवाल खड़े किए हैं। छात्र राजनीति में सक्रिय युवाओं का प्रभाव कॉलेज परिसरों से बाहर किस हद तक दिखाई देगा, यह आने वाले समय में महत्वपूर्ण होगा। हालांकि, छात्रसंघ चुनावों में किसी संगठन की सफलता को सीधे निकाय या विधानसभा चुनावों के परिणामों का संकेत मानना उचित नहीं होगा। छात्र और आम चुनावों के मुद्दे, मतदाता समूह तथा स्थानीय परिस्थितियां अलग-अलग होती हैं।
फिर भी, छात्रसंघ चुनाव राजनीतिक दलों को युवा पीढ़ी की आकांक्षाओं, संगठनात्मक पहुंच और स्थानीय स्तर पर नेतृत्व तैयार करने के अवसरों को समझने का आधार देते हैं। भाजपा के लिए एबीवीपी की सफलता को राजनीतिक समर्थन के रूप में प्रस्तुत करने का अवसर है, जबकि बीजद के लिए छात्र राजनीति में अपनी भूमिका मजबूत करने और चुनाव प्रक्रिया से जुड़े सवालों को उठाने की चुनौती है।
आठ साल बाद हुई छात्रसंघ चुनावों की वापसी ने ओडिशा में युवा नेतृत्व और परिसर आधारित राजनीति को फिर चर्चा में ला दिया है। अब निगाहें इस बात पर रहेंगी कि जेन-जी को लेकर शुरू हुई यह राजनीतिक बहस केवल बयानों तक सीमित रहती है या युवा भागीदारी, नेतृत्व और स्थानीय राजनीतिक गतिविधियों में भी इसका असर दिखाई देता है।
छात्रसंघ चुनावों में एबीवीपी का दबदबा
ओडिशा में आठ साल बाद हुए छात्रसंघ चुनावों में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने विश्वविद्यालयों और डिग्री कॉलेजों में उल्लेखनीय प्रदर्शन किया है। राज्य के 13 विश्वविद्यालयों में एबीवीपी समर्थित उम्मीदवारों ने अध्यक्ष पद की 8 और सचिव पद की 11 सीटों पर जीत दर्ज की। वहीं, 342 डिग्री कॉलेजों में संगठन ने अध्यक्ष पद की 208 और सचिव पद की 252 सीटों पर सफलता हासिल की। इन परिणामों के साथ एबीवीपी ने छात्र राजनीति में अपनी संगठनात्मक उपस्थिति और प्रभाव को रेखांकित किया है। बीसीजेडी ने 71 और एनएसयूआई ने दो संस्थानों में जीत हासिल की। चुनाव परिणामों ने राज्य में छात्र संगठनों के बीच राजनीतिक प्रतिस्पर्धा को भी नई चर्चा के केंद्र में ला दिया है।
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