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शिशु मृत्यु दर (आईएमआर) और 5 वर्ष से कम आयु के बच्चों की मृत्यु दर में भी उल्लेखनीय गिरावट
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आईएमआर और एमएमआर में कमी पर ओडिशा को भी मिला सराहनीय प्रगति का श्रेय
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मलेरिया के मामलों में भारत में उल्लेखनीय गिरावट
पुरी। भारत में मातृ मृत्यु दर में गिरावट वैश्विक गिरावट से दोगुनी है। यह जानकारी केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने आज ओडिशा के पुरी में सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा प्रणाली में अच्छे एवं अनुकरणीय प्रचलनों और नवप्रवर्तन पर नौवें राष्ट्रीय शिखर सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए दी।
नड्डा ने कहा कि भारत में मातृ मृत्यु दर (एमएमआर) में गिरावट वैश्विक गिरावट से दोगुनी है, जो जमीनी स्तर पर स्वास्थ्य सेवा प्रणाली सुदृढ़ करने के प्रयासों को दर्शाती है। शिशु मृत्यु दर (आईएमआर) और 5 वर्ष से कम आयु के बच्चों की मृत्यु दर में भी उल्लेखनीय गिरावट देखी गई है। उन्होंने आईएमआर और एमएमआर में कमी पर ओडिशा को भी सराहनीय प्रगति का श्रेय दिया।
नड्डा ने कहा कि विश्व स्वास्थ्य संगठन की वैश्विक मलेरिया रिपोर्ट 2024 में मलेरिया के मामलों में भारत में उल्लेखनीय गिरावट का उल्लेख किया गया है। इसी तरह, भारत में 2015 से 2023 तक तपेदिक की घटनाओं में 17 दशमलव 7 प्रतिशत की उल्लेखनीय गिरावट आई है, जो विश्व स्वास्थ्य संगठन विश्व तपेदिक रिपोर्ट 2024 के अनुसार वैश्विक औसत गिरावट 8 दशमलव 3 प्रतिशत से दोगुनी है। उन्होंने कहा कि कोविड-19 महामारी के कारण व्यवधानों के बावजूद भारत ने तपेदिक उन्मूलन के अपने लक्ष्य में कमी नहीं आने दी है। उन्होंने 33 राज्यों के 455 जिलों में चल रहे 100 दिवसीय तपेदिक उन्मूलन अभियान का उल्लेख किया, जिसमें अब तक 5 लाख तपेदिक रोगियों का पता लगाया गया है। भारत 2025 तक टीबी को खत्म करने के लिए पूरी तरह तैयार है।
पंचायती राज संस्थाओं को और सशक्त बनाने पर जोर
किसी अभियान की सफलता में जनभागीदारी के महत्व का उल्लेख करते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र की उपलब्धियों का श्रेय आशा कार्यकर्ताओं, राज्य स्वास्थ्य अधिकारी-(एसएचओ) और जमीनी स्तर के अन्य स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को दिया। उन्होंने कहा कि भारत में स्वास्थ्य सेवा आधार को सुदृढ़ करने के लिए पंचायती राज संस्थाओं को और अधिक सशक्त बनाने की आवश्यकता है।
जीवनशैली में बदलाव लाने की आवश्यकता
गैर-संचारी रोगों के खतरे से बचने के लिए श्री नड्डा ने जीवनशैली में बदलाव लाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन-(एनएचएम) की सघन विशेष परिक्षण अभियान की सराहना की जो मधुमेह, उच्च रक्तचाप और 3 प्रकार के कैंसर, ओरल, ब्रेस्ट और सर्वाइकल कैंसर की निःशुल्क जांच करती है। उन्होंने स्वास्थ्य संबंधी जानी-मानी पत्रिका लैंसेट द्वारा हाल में किए गए एक अध्ययन का भी उल्लेख किया, जिसमें कहा गया है कि आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री-जन आरोग्य योजना के तहत पंजीकृत मरीजों को 30 दिन के भीतर कैंसर का उपचार मिलने में 90 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जिससे उपचार में कम विलंब हुआ और कैंसर पीडितों के वित्तीय बोझ में भी कमी आई।
प्रत्येक जिले में डे केयर कैंसर केंद्र स्थापित होंगे
नड्डा ने कहा कि अगले तीन वर्षों में देश के प्रत्येक जिले में डे केयर कैंसर केंद्र स्थापित होंगे। इसी वर्ष 200 जिलों में इन्हें स्थापित किया जाएगा। उन्होंने स्वास्थ्य सेवा और अधिक मजबूत बनाने के लिए टेली-मेडिसिन पर भी जोर दिया।