-
कैंपस का विकास और युवाओं को रोजगार देना सरकार की प्राथमिकता: सुजाता पाढ़ी
-
शिक्षा के साथ कौशल, शोध और रोजगार के अवसरों को जोड़कर ओडिशा के युवाओं का भविष्य सुरक्षित करने पर जोर
भुवनेश्वर। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रदेश प्रवक्ता अनिल बिस्वाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने पिछले 12 वर्षों में देश के उच्च शिक्षा क्षेत्र में उल्लेखनीय परिवर्तन किए हैं। विश्वविद्यालयों, मेडिकल कॉलेजों, तकनीकी संस्थानों और उच्च शिक्षा में विद्यार्थियों की संख्या में हुई वृद्धि इस प्रगति का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार युवाओं और नई पीढ़ी के उज्ज्वल भविष्य के लिए प्रतिबद्ध है।
मंगलवार को भुवनेश्वर स्थित भाजपा के प्रदेश कार्यालय में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में बिस्वाल ने कहा कि वर्ष 2014-15 से पहले देश में 760 विश्वविद्यालय थे, जबकि अब इनकी संख्या बढ़कर 1,289 हो गई है। इसी तरह उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों की संख्या वर्ष 2013 में 3.42 करोड़ थी, जो अब बढ़कर लगभग 4.5 करोड़ हो गई है।
उन्होंने बताया कि वर्ष 2014 से पहले देश में 387 मेडिकल कॉलेज थे, जिनकी संख्या अब बढ़कर 846 हो गई है। इसी अवधि में एमबीबीएस सीटों की संख्या 51,348 से बढ़कर 1,39,864 हो गई है। देश में डिग्री कॉलेजों की संख्या भी लगभग 38,000 से बढ़कर 48,000 से अधिक हो गई है।
बिस्वाल के अनुसार, वर्ष 2013 में देश में 16 भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) थे, जबकि अब इनकी संख्या 23 हो गई है। आईआईटी में विद्यार्थियों की संख्या भी 65,000 से बढ़कर लगभग 1.35 लाख हो गई है। इसी तरह भारतीय प्रबंधन संस्थानों (आईआईएम) की संख्या 13 से बढ़कर 21 और अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थानों (एम्स) की संख्या सात से बढ़कर 20 हो गई है।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 से पहले विश्व की प्रमुख शिक्षण संस्थानों की सूची में भारत के केवल 11 संस्थान शामिल थे, जबकि अब इनकी संख्या बढ़कर 56 हो गई है। ये आंकड़े देश में उच्च शिक्षा की गुणवत्ता और संस्थागत क्षमता में हुई प्रगति को दर्शाते हैं। शिक्षा क्षेत्र में बदलाव पर सवाल उठाने वाले विपक्षी दलों को इन तथ्यों पर गौर करना चाहिए।
ओडिशा में उच्च शिक्षा के लिए कई पहल
बिस्वाल ने कहा कि ओडिशा में भाजपा सरकार ने उच्च शिक्षा को सुलभ और गुणवत्तापूर्ण बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। इनमें केजी से पीजी तक निःशुल्क शिक्षा योजना, 14 विश्वविद्यालयों में कुलपतियों की नियुक्ति और उच्च शिक्षा संस्थानों में शिक्षकों की नियुक्ति प्रमुख हैं।
उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री उच्चतर शिक्षा अभियान (पीएम-उषा) और राज्य सरकार की योजनाओं के माध्यम से प्रदेश के विश्वविद्यालयों को 677 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता दी गई है। इसके अलावा ज्ञानोदय योजना के तहत पांच वर्षों में 5,403 करोड़ रुपये खर्च करने का प्रावधान किया गया है।
बिस्वाल ने कहा कि सिंगापुर के ग्लोबल फाइनेंशियल नेटवर्क के सहयोग से पहली बार फिनटेक शिक्षा शुरू करने की पहल भी की गई है। राज्य सरकार ओडिशा में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और सेमीकंडक्टर क्षेत्र के विकास के साथ विश्वविद्यालयों तथा सरकारी कॉलेजों में एआई और स्मार्ट शिक्षा को बढ़ावा देने की दिशा में काम कर रही है।
शिक्षा, कौशल और रोजगार पर जोर
भाजपा की राष्ट्रीय महिला मोर्चा की सोशल मीडिया संयोजक सुजाता पाढ़ी ने कहा कि मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी के नेतृत्व में राज्य सरकार भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर शिक्षा व्यवस्था को मजबूत कर रही है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति को प्रभावी ढंग से लागू करने के साथ पारंपरिक शिक्षा और तकनीकी कौशल के बीच समन्वय स्थापित करने पर जोर दिया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि राज्य में विश्वविद्यालयों के विकेंद्रीकरण के लिए विभिन्न जिलों में नए विश्वविद्यालय स्थापित करने की पहल की गई है। शिक्षा, बुनियादी ढांचे और आधुनिकीकरण के लिए 50 करोड़ रुपये तथा प्रयोगशालाओं के अनुदान के लिए 25 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है। स्मार्ट कक्षाओं, डिजिटल शिक्षा, शोध, नवाचार, रिसर्च फेलोशिप, सेमीकंडक्टर और भविष्य की तकनीकों से जुड़े क्षेत्रों को प्राथमिकता दी जा रही है।
पाढ़ी ने कहा कि आर्थिक कठिनाइयों के कारण कोई भी मेधावी विद्यार्थी उच्च शिक्षा से वंचित न रहे, इसके लिए सरकार विभिन्न छात्रवृत्ति और सहायता योजनाओं के माध्यम से विद्यार्थियों को सहयोग दे रही है। इनमें ई-मेधावृत्ति, गोपबंधु शिक्षा सहायता और व्यासकवि फकीर मोहन मेधावृत्ति जैसी योजनाएं शामिल हैं। प्लस-टू के बाद मेधावी विद्यार्थियों को लैपटॉप खरीदने में सहायता देने के लिए गोदावरीश प्रोत्साहन योजना भी संचालित की जा रही है।
उन्होंने बताया कि छात्राओं के लिए ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में छात्रावास निर्माण, आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों तथा अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के अवसर उपलब्ध कराने और विदेश में पढ़ाई के लिए सहायता जैसे कदम उठाए जा रहे हैं। प्रशासनिक सेवाओं की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों के लिए कोचिंग की व्यवस्था पर भी ध्यान दिया जा रहा है।
पाढ़ी ने कहा कि भाजपा सरकार का उद्देश्य केवल विद्यार्थियों को डिग्री दिलाना नहीं, बल्कि शिक्षा को कौशल विकास, अनुसंधान और रोजगार के अवसरों से जोड़ना है, ताकि ओडिशा के युवाओं के लिए बेहतर भविष्य सुनिश्चित किया जा सके।
Indo Asian Times A Hindi Digital News Portal
