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MSME निर्यातकों को बड़ी राहत: DGFT ने शुरू की 2.75% ब्याज सहायता योजना

  • इसका क्रियान्वयन भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के माध्यम से किया जाएगा

  • योजना के तहत प्रति निर्यातक प्रति वित्तीय वर्ष अधिकतम 50 लाख रुपये तक की ब्याज सहायता उपलब्ध होगी

नई दिल्ली: देश के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) निर्यातकों को बढ़ावा देने के लिए विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) ने एक नई Interest Subvention Scheme शुरू की है। इस योजना के तहत पात्र MSME निर्यातकों को प्री-शिपमेंट और पोस्ट-शिपमेंट रुपये निर्यात ऋण पर 2.75 प्रतिशत प्रति वर्ष की ब्याज छूट मिलेगी।

यह योजना निर्यात प्रोत्साहन (Niryat Prothsahan) मिशन के अंतर्गत लागू की गई है और इसका क्रियान्वयन भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के माध्यम से किया जाएगा। योजना के तहत प्रति निर्यातक प्रति वित्तीय वर्ष अधिकतम 50 लाख रुपये तक की ब्याज सहायता उपलब्ध होगी।

नोटिफाइड HS कोड वाले निर्यातकों को लाभ

DGFT के अनुसार, यह सहायता केवल उन्हीं MSME निर्माता एवं मर्चेंट निर्यातकों को दी जाएगी, जो नोटिफाइड HS कोड के अंतर्गत आने वाले उत्पादों का निर्यात कर रहे हैं। योजना का उद्देश्य निर्यातकों की तरलता बढ़ाना, वित्तीय बोझ कम करना और वैश्विक बाजार में उनकी प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को मजबूत करना है।

बैंक के माध्यम से मिलेगा लाभ

इस योजना के लिए DGFT या RBI पोर्टल पर अलग से आवेदन की आवश्यकता नहीं है। पात्र MSME निर्यातकों को अपने बैंक से निर्यात ऋण लेते समय योजना का लाभ मांगना होगा। बैंक आवश्यक दस्तावेजों की जांच के बाद ब्याज में छूट लागू करेगा, जिसकी भरपाई बाद में RBI के माध्यम से की जाएगी।

निर्यातकों के लिए महत्वपूर्ण कदम

विशेषज्ञों का मानना है कि यह योजना ऐसे समय में आई है, जब MSME क्षेत्र को पूंजी की कमी और बढ़ती लागत जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। ब्याज दर में राहत मिलने से निर्यात ऑर्डर निष्पादन, कार्यशील पूंजी प्रबंधन और नए बाजारों में विस्तार को बल मिलेगा।

सरकार की यह पहल MSME निर्यात को गति देने और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के लक्ष्य को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

DGFT के फैसले का स्वागत, लेकिन बैंकिंग सुधार जरूरी: हेमंत कुमार तिवारी

HEMANT KUMAR TIWARI

विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) द्वारा MSME निर्यातकों के लिए ब्याज सहायता योजना शुरू किए जाने का Apana Bazar E-Commerce Pvt. Ltd. ने स्वागत किया है। कंपनी के निदेशक हेमंत कुमार तिवारी ने इसे निर्यात क्षेत्र के लिए सकारात्मक कदम बताते हुए कहा कि यदि इसे ज़मीनी स्तर पर सही तरीके से लागू किया जाए, तो इससे स्टार्टअप और मर्चेंट निर्यातकों को वास्तविक लाभ मिलेगा।

IEC जारी होते समय ही मिले सुविधा

हेमंत कुमार तिवारी ने कहा कि यह निर्णय IEC जारी करने के साथ ही लागू किया जाना चाहिए, ताकि नए निर्यातकों को शुरुआत से ही वित्तीय सहारा मिले। उन्होंने सुझाव दिया कि प्री-शिपमेंट के लिए क्रेडिट लिमिट लेटर ऑफ क्रेडिट (LC) के आधार पर तय की जाए, जिससे निर्यात ऑर्डर के अनुरूप माल की खरीद और पैकेजिंग संभव हो सके।

एक ही खाते से ऋण वसूली की व्यवस्था हो

उन्होंने कहा कि प्री-शिपमेंट ऋण, पोस्ट-शिपमेंट भुगतान और ऋण वसूली के लिए एक ही निर्यात खाते का उपयोग अनिवार्य किया जाना चाहिए। इससे प्रक्रिया सरल होगी और निर्यातकों को अनावश्यक बैंकिंग औपचारिकताओं से राहत मिलेगी।

प्री-शिपमेंट पैकेजिंग क्रेडिट के अभाव में अरबों डॉलर के ऑर्डर गए बाहर

हेमंत कुमार तिवारी ने गंभीर चिंता जताते हुए कहा कि प्री-शिपमेंट फाइनेंस की सुविधा न होने के कारण भारत के हाथ से अरबों डॉलर के वर्क ऑर्डर निकल चुके हैं। उन्होंने कहा कि वैश्विक बाजार से बड़ी संख्या में पूछताछ (इंक्वायरी) भारतीय मर्चेंट एक्सपोर्टरों के पास आती है, लेकिन प्री-शिपमेंट पैकेजिंग सुविधा न मिलने के कारण ये सभी ऑर्डर अन्य देशों को चले जाते हैं

भारतीय बैंक लेटर ऑफ क्रेडिट को गंभीरता से नहीं लेते

बैंकों की कार्यप्रणाली पर कड़ा सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि भारतीय बैंक लेटर ऑफ क्रेडिट को टिशू पेपर की तरह मानते हैं, जबकि अंतरराष्ट्रीय व्यापार में यही सबसे मजबूत वित्तीय दस्तावेज होता है। उन्होंने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा कि बैंकों की इस ना-समझी और उदासीन रवैये के कारण भारत आज निर्यात की उन ऊँचाइयों को हासिल नहीं कर पा रहा है, जिनका सामर्थ्य देश के पास मौजूद है।

स्टार्टअप निर्यातकों को स्थानीय बिक्री की शर्त अव्यावहारिक

हेमंत कुमार तिवारी ने कहा कि बैंकों द्वारा स्टार्टअप निर्यातकों से पहले स्थानीय बिक्री या किसी छोटे मर्चेंट एक्सपोर्टर के माध्यम से काम करने की शर्त रखी जाती है, जो पूरी तरह अव्यावहारिक है। स्टार्टअप निर्यातक का उद्देश्य शुरू से ही निर्यात होता है, न कि घरेलू बाजार में बिक्री

उन्होंने जोर देते हुए कहा कि यदि मर्चेंट निर्यातकों के लिए क्रेडिट लिमिट LC के अनुसार तय की जाए और प्री-शिपमेंट पैकेजिंग सुविधा सुनिश्चित की जाए, तो भारत न केवल वर्क ऑर्डर बचा सकेगा बल्कि वैश्विक निर्यात प्रतिस्पर्धा में भी बड़ी छलांग लगाएगा।

बैंक देते हैं डिफॉल्टरों की दलील 

हेमंत कुमार तिवारी ने कहा कि स्टार्टअप निर्यातकों से बातचीत के दौरान बैंक अक्सर अपने बचाव में विजय माल्या और चौकी जैसे बड़े डिफॉल्टरों का उदाहरण देते हैं, यह कहते हुए कि बड़े ऋण लेकर ऐसे लोग धोखाधड़ी कर देश से बाहर भाग गए। उन्होंने सवाल उठाया कि धोखेबाजों से स्टार्टअप निर्यातकों का क्या लेना-देना है। बैंकों को अपनी आंतरिक कमियों, जोखिम आकलन की कमजोरियों और निगरानी में हुई चूकों की समीक्षा करनी चाहिए, न कि अपने फेलियर पॉइंट्स का बोझ ईमानदार स्टार्टअप निर्यातकों पर डालना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस तरह की सोच से न केवल नए निर्यातक हतोत्साहित होते हैं, बल्कि देश के निर्यात इकोसिस्टम को भी गंभीर नुकसान पहुंचता है।

 

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