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पारंपरिक दिनचर्या में जिंदगी जिएं लोग – सुभाष चौहान

  • कहा- विज्ञान से सीधा जुड़ा हुआ है हमारे पूर्वजों का दिया हुआ रहन सहन

झाड़सुगुड़ा- पश्चिम ओडिशा विकास परिषद के अध्यक्ष सुभाष चौहान ने आज लोगों से आह्वान किया कि वह विरासत में मिली दिनचर्या को अपनी जिंदगी का हिस्सा बनाएं। यह दिनचर्या सीधे तौर पर और बहुत ही करीबी रूप से विज्ञान से जुड़ा हुआ है। आज हम भागदौड़ में इन दिनचर्या को छोड़ते जा रहे हैं, जिससे हमें बीमारियों का सामना करना पड़ रहा है। सुभाष चौहान ने कहा कि आप पिछली पीढ़ियों को देखिए, जहां लंबे समय तक चश्मे का प्रयोग नहीं करते थे, लेकिन आज आलम यह है कि छोटे से छोटे बच्चों को चश्मे लगाने पड़ रहे हैं। यह तो महज एक उदाहरण के तौर पर मैं प्रस्तुत कर रहा हूं। ऐसे कई बीमारियां हैं, जिससे आज मनुष्य ग्रसित होते जा रहा है। वह चाहे पुरुष हों या महिला। बचपन में अक्सर हमें कहा जाता था कि सुबह सुबह उठना सेहत के लिए लाभदायक है।

यह बात किसी के डॉक्टर के कहने के बाद नहीं कही जाती थी, लेकिन आज डॉक्टर भी कहते हैं कि सुबह सुबह उठकर टहलें। आप इसी से अंदाजा लगाइए कि सुबह उठना स्वास्थ्य के लिए कितना फलदायक है। आज के समय में जिस तरह से दिनचर्या परिवर्तित हो रही है, वह खतरे की घंटी बजा रही है। इसलिए मनुष्य को एक बार फिर अपनी पिछली दिनचर्या की तरफ मोड़ने की जरूरत है। सुभाष चौहान झाड़सुगुड़ा एलएन कॉलेज में बतौर मुख्य अतिथि एक कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। इस कार्यशाला का विषय महिलाओं की सुरक्षा और स्वास्थ्य था। इस कार्यक्रम में सैकड़ों की संख्या में लोगों की उपस्थिति रही।

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