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चिलिका में घने कोहरे में फेरी बीच झील में अटकी

  •     एक यात्री के लापता होने से मचा हड़कंप

  •     कई घंटे तक फंसे रहे करीब 50 यात्री

भुवनेश्वर। ओडिशा की प्रसिद्ध चिलिका झील में गुरुवार को घने कोहरे ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया। अत्यधिक कम दृश्यता के कारण सातपड़ा से जाह्निकुड़ा जा रही एक यात्री फेरी झील के बीचोंबीच कई घंटों तक फंसी रही। इसी दौरान एक यात्री के लापता होने की सूचना से इलाके में सनसनी फैल गई और बड़े पैमाने पर खोज अभियान शुरू किया गया।

बस और कारों समेत करीब 50 यात्री थे सवार

सूत्रों के अनुसार, फेरी में लगभग 50 यात्री, एक यात्री बस और दो कारें सवार थीं। मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों के चलते फेरी अपने निर्धारित समय से देरी से रवाना हुई थी। जैसे ही झील के बीच पहुंची, अचानक घना कोहरा छा गया और दृश्यता लगभग शून्य हो जाने के कारण नौवहन असंभव हो गया, जिससे फेरी बीच झील में ही अटक गई।

घंटों तक झील में फंसे रहे यात्री, बढ़ती गई बेचैनी

फेरी के रुक जाने से यात्रियों को कई घंटों तक झील के बीच ही इंतजार करना पड़ा। कम दृश्यता, ठंड और अनिश्चितता के बीच यात्रियों में डर और बेचैनी बढ़ती गई। इसी बीच यह जानकारी सामने आई कि फेरी में सवार एक यात्री लापता हो गया है, जिससे स्थिति और गंभीर हो गई।

लापता यात्री की पहचान उमा शंकर साबत के रूप में

लापता व्यक्ति की पहचान उमा शंकर साबत, निवासी ब्रह्मपुर के रूप में हुई है। बताया गया है कि वह नववर्ष मनाने चिलिका आए थे और गुरुवार को लौट रहे थे। परिजनों के अनुसार, उमा शंकर फेरी में सवार हुए थे और लगभग 100 मीटर तक फेरी में यात्रा भी की थी, लेकिन इसके बाद वह रहस्यमय ढंग से गायब हो गए।

फोटो दिखाकर परिजनों ने जताई मौजूदगी की पुष्टि

जब यह आशंका जताई गई कि कहीं वह फेरी पर चढ़े ही न हों, तो परिजनों ने फेरी के अंदर ली गई तस्वीरें सामने रखीं। इन तस्वीरों में उमा शंकर अपने भतीजे के साथ नजर आ रहे हैं, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि वह फेरी में मौजूद थे।

टोपी और चप्पल मिलने से बढ़ी आशंका

मामले ने तब और गंभीर मोड़ ले लिया जब मछुआरों को पास के इलाके से उमा शंकर की टोपी और चप्पल बरामद हुई। कुछ यात्रियों ने बाद में अधिकारियों को बताया कि उन्होंने यात्रा के दौरान पानी में किसी भारी वस्तु के गिरने जैसी आवाज सुनी थी, लेकिन उस समय किसी को इसकी गंभीरता का अंदाजा नहीं हुआ।

पिछले हिस्से से गिरने की आशंका

आशंका जताई जा रही है कि यदि उमा शंकर फेरी के पिछले हिस्से से पानी में गिरे होंगे, तो उन्हें चोट लग सकती है और फेरी के प्रोपेलर के पास पानी के तेज बहाव में बह गए हों। हालांकि परिजनों का कहना है कि उमा शंकर को तैरना आता था, इसलिए यह भी संभावना जताई जा रही है कि वह कहीं और किनारे तक पहुंच गए हों।

खोज अभियान में कोहरा बना बड़ी बाधा

खबर लिखे जाने तक उमा शंकर की तलाश जारी थी, लेकिन घना कोहरा राहत और बचाव कार्य में बड़ी बाधा बना हुआ था। बताया गया है कि मौके पर अधिकारी अभी पूरी तरह नहीं पहुंच पाए थे और फेरी भी झील के बीच फंसी हुई थी। ब्रह्मगिरी से अग्निशमन सेवा की टीम को घटनास्थल के लिए रवाना कर दिया गया है, जबकि अन्य एजेंसियों के साथ मिलकर आगे की कार्रवाई का समन्वय किया जा रहा है। घटना ने चिलिका में कोहरे के दौरान जल परिवहन की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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