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ओडिशा में खरीफ 2025 के लिए उर्वरक आपूर्ति तेज

  •     राज्य में पर्याप्त भंडार, अवैध बिक्री पर सख्ती

  •     1202 विक्रेताओं को नोटिस

भुवनेश्वर। ओडिशा सरकार ने खरीफ 2025 के लिए उर्वरक आपूर्ति की स्थिति को तेज कर दिया है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर कृषि एवं किसान सशक्तिकरण विभाग ने पूरे राज्य में उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए व्यापक योजना बनाई है। विभाग का कहना है कि राज्य में उर्वरक की पर्याप्त मात्रा उपलब्ध है और किसानों को किसी भी तरह की अफवाह या कृत्रिम कमी से घबराने की जरूरत नहीं है।

राज्य सरकार ने खरीफ 2025 के लिए कुल 58.50 लाख हेक्टेयर भूमि पर फसल योजना तैयार की है, जिसमें 34.94 लाख हेक्टेयर धान और 23.56 लाख हेक्टेयर गैर-धान फसलें शामिल हैं। इसके अनुरूप 10 लाख मीट्रिक टन उर्वरक की आपूर्ति योजना बनाई गई थी। केंद्र सरकार ने इसके खिलाफ 9.55 लाख मीट्रिक टन उर्वरक राज्य को आवंटित किया।

1 अप्रैल 2025 को विभिन्न जिलों में 2.94 लाख मीट्रिक टन उर्वरक उपलब्ध था। अगस्त के अंत तक 8.60 लाख मीट्रिक टन उर्वरक मिलने का लक्ष्य था, जिसमें से 8.10 लाख मीट्रिक टन पहले ही आ चुका है। इससे राज्य में कुल 11.04 लाख मीट्रिक टन उर्वरक (यूरिया 4.84 लाख, डीएपी 2.18 लाख, एमओपी 0.61 लाख, एसएसपी 0.34 लाख और एनपी/एनपीके/एनपीकेएस 3.05 लाख मीट्रिक टन) उपलब्ध हो गया है।

2.56 लाख मीट्रिक टन स्टॉक मौजूद

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, अब तक किसानों को कुल 8.46 लाख मीट्रिक टन उर्वरक बेचा जा चुका है, जबकि 2.56 लाख मीट्रिक टन का स्टॉक अभी भी विभिन्न जिलों में मौजूद है। पिछले साल (खरीफ 2024) की तुलना में इस साल बिक्री और वितरण में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

उपमुख्यमंत्री कर रहे हैं निगरानी

उपमुख्यमंत्री एवं कृषि मंत्री कनक वर्धन सिंहदेव स्वयं उर्वरक आपूर्ति की नियमित समीक्षा कर रहे हैं। वर्तमान में 11,692 मीट्रिक टन यूरिया ट्रांजिट में है, जो दो दिनों के भीतर पीएसीएस और एलएएमपीसीएस तक पहुंचेगा। मार्कफेड को भी निर्देश दिए गए हैं कि ज़रूरत के अनुसार उर्वरकों की आपूर्ति सुनिश्चित की जाए।

राज्यभर में दुकानों की अचानक जांच तेज

ब्लैक मार्केटिंग और नकली उर्वरकों की बिक्री रोकने के लिए कृषि, राजस्व और पुलिस अधिकारियों की संयुक्त प्रवर्तन टीमें राज्यभर में दुकानों की अचानक जांच कर रही हैं। अब तक 4,546 खुदरा दुकानों की जांच की जा चुकी है। इनमें से 1,202 विक्रेताओं को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं। 30 दुकानों को बंद कर दिया गया है, जबकि 62 डीलरों के लाइसेंस निलंबित या रद्द कर दिए गए हैं। इसके अलावा, छह डीलरों के यहां से उर्वरक स्टॉक ज़ब्त किया गया है।

किसानों की स्वतंत्रता और गुणवत्ता पर जोर

राज्य सरकार ने इफको को निर्देश दिया है कि नैनो उर्वरक या अन्य इनपुट के टैगिंग से बचें और किसानों को उनकी ज़रूरत के अनुसार उर्वरक चुनने की स्वतंत्रता दी जाए। साथ ही, यह भी सुनिश्चित किया जा रहा है कि किसानों को समय पर गुणवत्तापूर्ण उर्वरक उचित कीमत पर उपलब्ध हो।

कृषि एवं किसान सशक्तिकरण विभाग के प्रमुख सचिव अरविंद कुमार पाढ़ी स्वयं केंद्र सरकार के उर्वरक मंत्रालय और कंपनियों के साथ लगातार संपर्क में हैं और आपूर्ति व्यवस्था पर नज़र रखे हुए हैं।

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