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भुवनेश्वर के खनन कारोबारी के दो लॉकर भी फ्रीज
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लग्जरी गाड़ियां, करोड़ों की ज्वेलरी और नकदी जब्त
भुवनेश्वर। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने भुवनेश्वर में खनन व्यवसाय से जुड़े कारोबारी शक्ति रंजन दाश के ठिकानों पर छापेमारी कर करोड़ों की संपत्ति जब्त की। यह कार्रवाई 1,396 करोड़ रुपये के बैंक धोखाधड़ी मामले में चल रही मनी लॉन्ड्रिंग जांच के तहत की गई।
ईडी-शिमला की टीम ने दाश के आवास और उनकी कंपनियों, एनमोल माइन्स प्राइवेट लिमिटेड (एएमपीएल) और एनमोल रिसोर्सेज प्राइवेट लिमिटेड (एआरपीएल), के दफ्तरों पर तलाशी ली। तलाशी में 10 लग्जरी कारें, तीन सुपरबाइक, 13 लाख रुपये नकद, 1.12 करोड़ रुपये मूल्य की ज्वैलरी और कई अहम दस्तावेज बरामद किए गए। साथ ही, दाश के दो लॉकरों को भी सील कर दिया गया।
बैंक कंसोर्टियम से फर्जीवाड़े का आरोप
ईडी ने जानकारी दी कि हिमाचल प्रदेश पुलिस की सीआईडी द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर जांच शुरू की गई थी। आरोप है कि इंडियन टेक्नोमैक कंपनी लिमिटेड (आईटीसीओएल) के निदेशकों ने 2009 से 2013 के बीच बैंक ऑफ इंडिया के नेतृत्व वाले कंसोर्टियम से फर्जी प्रोजेक्ट रिपोर्ट और शेल कंपनियों के जरिए नकली बिक्री दिखाकर हजारों करोड़ के कर्ज लिये।
कर्ज का इस्तेमाल स्वीकृत परियोजनाओं में नहीं
जांच में पाया गया कि लिये गए कर्ज का इस्तेमाल स्वीकृत परियोजनाओं में नहीं हुआ। इस तरह लगभग 1,396 करोड़ रुपये का बैंक घोटाला किया गया।
59.80 करोड़ की रकम ओडिशा में ट्रांसफर
ईडी की जांच में यह भी सामने आया कि आईटीसीओएल और उससे जुड़ी शेल कंपनियों ने 59.80 करोड़ रुपये दाश की कंपनी एनमोल माइन्स प्राइवेट लिमिटेड, ओडिशा के खातों में डाले। दाश पर आरोप है कि उन्होंने आईटीसीओएल के प्रमोटर राकेश कुमार शर्मा की मदद की और इस रकम को खनन कारोबार में लगाया। इसके बाद इसे कंपनी के खातों में वैध धन की तरह दिखाया गया।
जब्त गाड़ियों में लग्जरी गाड़ियां
ईडी ने जिन गाड़ियों को जब्त किया है उनमें पोर्श कायेन, मर्सिडीज-बेंज जीएलसी, बीएमडब्ल्यू एक्स7, ऑडी ए3, मिनी कूपर और होंडा गोल्ड विंग बाइक शामिल हैं। इनकी कीमत सात करोड़ रुपये से अधिक बताई जा रही है। साथ ही, नकदी और जेवरात समेत जब्त कुल संपत्ति का मूल्य करोड़ों में है।
पहले ही 310 करोड़ की संपत्ति अटैच
ईडी पहले ही इस मामले में 310 करोड़ रुपये की संपत्ति अटैच कर चुकी है, जिनमें से 289 करोड़ रुपये की संपत्ति अप्रैल 2024 में बैंकों को लौटाई जा चुकी है। अब ताजा कार्रवाई से जांच को और गति मिलने की संभावना है।