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संसद परिसर में लगेगा ओडिशा का सांस्कृतिक प्रतीक

  •     जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा रथों के पवित्र पहिये स्थापित करने का प्रस्ताव

  •     जगन्नाथ मंदिर प्रशासन ने रखा प्रस्ताव

पुरी। ओडिशा की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक धरोहर को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलने जा रही है। संसद परिसर में भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा के रथों के पवित्र पहियों को स्थापित करने का प्रस्ताव सामने आया है। यह पहल हर ओड़िया के लिए गौरव का क्षण साबित हो सकती है।

श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन (एसजेटीए) के मुख्य प्रशासक अरविंद पाढ़ी ने यह प्रस्ताव लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला के पुरी दौरे के दौरान रखा। बिड़ला ने इस पवित्र मंदिर में दर्शन किया। वरिष्ठ मंदिर अधिकारियों की उपस्थिति में पूजा-अर्चना के बाद पाढ़ी ने संसद में रथों के पहियों को स्थापित करने का सुझाव दिया।

लोकसभा अध्यक्ष ने दिखाई गहरी रुचि

सूत्रों के अनुसार, ओम बिड़ला ने इस विचार का गर्मजोशी से स्वागत किया और इसमें गहरी रुचि दिखाई। इससे पहले पाढ़ी ने इस विषय पर मुख्यमंत्री मोहन माझी और विधि मंत्री पृथ्वीराज हरिचंदन से चर्चा की थी।

रथों के हिस्सों को दिल्ली भेजने की तैयारी

वर्तमान में पुरी में रथों को खोलने की प्रक्रिया चल रही है। भगवान बलभद्र के रथ तालध्वज और देवी सुभद्रा के रथ दर्पदलना का कार्य पूरा हो चुका है। अब भगवान जगन्नाथ के रथ नंदीघोष को खोला जा रहा है। इसके बाद रथों के हिस्से गोदाम में रखे जाएंगे और फिर उन्हें दिल्ली ले जाया जाएगा। हालांकि, अभी यह तय नहीं है कि इन्हें कब और कैसे संसद तक पहुंचाया जाएगा।

राष्ट्रीय गौरव का प्रतीक बनेगा प्रस्ताव

यदि यह प्रस्ताव साकार होता है, तो यह न केवल ओडिशा की जगन्नाथ परंपरा और आध्यात्मिक विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शित करेगा बल्कि भारत की सांस्कृतिक धारा में राज्य के योगदान का गौरवमयी प्रतीक भी बनेगा।

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