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कालिया घोटाले में राज्य सरकार का झूठ प्रमाणित हुआ–कांग्रेस

  •  कृषि मंत्री से त्यागपत्र की मांग

भुवनेश्वर- कृषक कल्याण के नाम पर चुनाव के पूर्व किसानों को पैसे प्रदान करने वाली योजना कालिया योजना में राज्य सरकार ने  अयोग्य लोगों को करोड़ रुपये की राशि वितरित की है। इस आरोप को सरकार अस्वीकार करती आ रही थी, लेकिन अंत में सरकार इसमें पकड़ी गई है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अयोग्य लोगों की सही सूचना उपलब्ध होने के बावजूद जालसाजी से बचने के लिए कृषि मंत्री अरुण साहु ने विधानसभा में भयंकर गलत जानकारी प्रदान की है। ऐसा करने के कारण कृषि मंत्री श्री साहू को त्यागपत्र देना चाहिए। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मुख्य प्रवक्ता सत्य प्रकाश नायक ने पार्टी कार्यालय में  आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में यह बात कही। उन्होंने बताया कि गत 13 नवंबर को विधाय़क अश्विनी कुमार पात्र द्वारा कालिया योजना को लेकर पूछे गये सवाल के उत्तर में कृषि मंत्री अरुण साहू ने कहा था कि इस योजना में पहली किश्त में पैसा प्राप्त करने वाले 51 लाख  5 हजार हिताधिकारियों में से 45 हजार हिताधिकारी अयोग्य होने के बारे में पहचान की गई है। उन्होंने कहा कि 10 जिलों के कृषि अधिकारियों ने राज्य सरकार ने अयोग्य हिताधिकारियों के बारे में पत्र लिख कर अवगत कराया है। उन्होंने कहा कि केवल 10 जिलों के कृषि अधिकारियों ने अयोग्य हिताधिकारियों का जो आंकड़ा राज्य सरकार को दिया है, उसके अनुसार केवल 10 जिलों में ही अयोग्य हिताधिकारियों की संख्या  1 लाख 72 हजार से अधिक है। कोरापुट, खुर्दा, गंजाम मयूरभंज, सोनपुर, कटक, मालकानगिरि, सुंदरगढ़, सम्बलपुर व जगतसिंहपुर जिले के कृषि अधिकारियों के पत्र का श्री नायक ने हवाला दिया। उन्होनें कहा कि यदि केवल 10 जिलों में ही यही स्थिति है, तो राज्य के 30 जिलों के आंकड़ों को यदि दिया जाए, तो अयोग्य हिताधिकारियों की संख्या कितनी अधिक है इसका अंदाजा लगाया जा सकता है। लेकिन कृषि मंत्री इस तथ्य को छुपाने के लिए सदन में यह बता रहे हैं कि केवल 45 हजार अयोग्य हिताधिकारियों को पैसे देने के संबंध में पहचान की गई है। साहू सदन में झूठा जानकारी दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि  आगामी दिनों में अन्य 20 जिलों के अयोग्य हिताधिकारियों की संख्या का भी खुलासा करेगी।

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