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सारला दास द्वारा रचित महाभारत सैकड़ों सालों के बाद भी काफी लोकप्रिय – एम वैंकेया नायडु

  • कहा – प्राथमिक स्तर पर बच्चों को मातृभाषा में मिले शिक्षा

  • कवि सारला दास की छह सौवीं जयंती पर आयोजित कार्यक्रम में शामिल हुए उपराष्ट्रपति

  • आंध्र प्रदेश के राज्यपाल विश्वभूषण हरिचंदन कलिंग रत्न सम्मान से सम्मानित

भुवनेश्वर. कवि सारला दास ने 15वीं सदी के आदि काल में प्रचलित भाषा का इस्तेमाल कर साहित्य को लोकप्रिय कराने में अग्रदूत थे. विशेष कर उनके द्वारा रचित महाभारत में उन्होंने जिन शब्दाबली का प्रयोग किया है, उसे समझने के लिए किसी भी पाठक को शब्दकोष की आवश्यकता नहीं है. सारला दास द्वारा रचित महाभारत सैकड़ों सालों के बाद भी काफी लोकप्रिय है. कवि सारला दास की छह सौवीं जयंती के अवसर पर कटक में आयोजित एक कार्यक्रम में उपराष्ट्रपति एम वैंकेया नायडु ने ये बातें कहीं.

इस अवसर पर उन्होंने आंध्र प्रदेश के राज्यपाल विश्वभूषण हरिचंदन को कलिंग रत्न सम्मान से सम्मानित किया. नायडु ने कहा कि सारला दास ने आम लोगों की भाषा में जटिल भाव को व्यक्त किया है, जोकि आसान नहीं है. ये उनके महान व्यक्तित्व को दर्शाता है. उन्होंने कहा कि सारला दास द्वारा लिखित महाभारत को वह विशेष मानते हैं. व्यास के महाभारत को विभिन्न भारतीय कवियों ने अनुवाद किया है, लेकिन सारला दास की यह कृति कालजयी महाकाव्य है.

उन्होंने कहा कि सबसे आश्चर्य की बात यह है कि यदि सारला दास दलित थे, लेकिन वास्तव में वह मुनी या मुनी लेखक थे. उन्होंने अपना परिचय किसान के कूल में जन्म होने का दिया है.

उन्होंने मातृभाषा में शिक्षा प्रदान पर जोर देते हुए कहा कि प्रत्येक राज्य में मातृभाषा में शिक्षा मिले, इसके लिए वह इसके लिए महत्व देते आ रहे हैं. प्राथमिक स्तर पर बच्चों को मातृभाषा में शिक्षा मिलनी चाहिए.

सारला साहित्य संसद द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में राज्यपाल प्रो गणेशीलाल तथा केन्द्रीय मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान ने भी संबोधित किया.

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