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एम्स भुवनेश्वर ने आर्थोपेडिक्स सर्जरी से बदली जीवन

  •     20 साल बाद मरीज को मिली नई जिंदगी

  •     रीढ़ और जांघें लगभग 150 डिग्री के कोण पर झुकी थीं

भुवनेश्वर। एम्स भुवनेश्वर के आर्थोपेडिक्स विभाग ने एक दुर्लभ और जटिल चिकित्सा उपलब्धि हासिल की है। केंद्रापड़ा के 37 वर्षीय विश्व भूषण राउत, जो लगभग 20 वर्षों से एंकायलोजिंग स्पॉन्डिलाइटिस से पीड़ित थे और जिनकी रीढ़ एवं दोनों कूल्हों में पूरी तरह जकड़न आ गई थी, तीन सफल सर्जरी के बाद अब सामान्य जीवन जी पाने में सक्षम हैं।

राउत की स्थिति इतनी गंभीर थी कि उनकी रीढ़ और जांघें लगभग 150 डिग्री के कोण पर झुक गई थीं, जिससे उनका ठोड़ी लगभग जांघों को छूती थी। इस कारण वे चलने, बैठने और सोने में बेहद कठिनाई महसूस करते थे।

कई बड़े अस्पतालों ने हाथ किए थे खड़े

कई बड़े अस्पतालों ने जोखिमों विशेषकर पैरालिसिस की आशंका के चलते उनका मामला लेने से इनकार कर दिया। आखिरकार एम्स भुवनेश्वर ने चुनौती स्वीकार की। विभागाध्यक्ष डॉ बिष्णु प्रसाद पात्र के मार्गदर्शन में डॉ दीपक नेरड़ी और डॉ गुरुदीप दास ने उन्नत उपकरणों की मदद से दोनों कूल्हों का प्रत्यारोपण और रीढ़ की विकृति सुधार शल्य प्रक्रिया को सफलतापूर्वक पूरा किया। यह सुविधाएं कार्यकारी निदेशक डॉ आशुतोष बिस्वास की दूरदर्शिता के कारण उपलब्ध हो सकीं।

सर्जरी में एनेस्थीसिया विभाग का महत्वपूर्ण योगदान रहा, जिसकी अगुवाई डॉ सत्यजीत मिश्रा ने की। सर्जरी बिना किसी बड़े जटिलता के सफलतापूर्वक सम्पन्न हुई।

आयुष्मान भारत योजना के तहत निःशुल्क इलाज

आज मरीज सहजता से बैठने, खड़े होने, चलने और सामने देखने सक्षम हैं, जो उनके जीवन में एक बड़ा बदलाव है। निजी अस्पतालों में ऐसी सर्जरी का खर्च 25 से 50 लाख रुपये तक होता है, जबकि राउत का पूरा इलाज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू की गई आयुष्मान भारत योजना के तहत निःशुल्क किया गया।

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