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ओम बिड़ला ने कहा – अनुसूचित जाति/जनजाति कल्याण और समान अवसर जरूरी
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2047 तक बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर के सपनों को साकार करना हमारी जिम्मेदारी
भुवनेश्वर। अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति संसदीय समिति के दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का शनिवार को समापन हुआ। समापन सत्र में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने संबोधित करते हुए घोषणा की कि ‘भुवनेश्वर एजेंडा-2025’ तैयार किया गया है, जिसका उद्देश्य अनुसूचित जातियों और जनजातियों के कल्याण को सुनिश्चित करना है।
बिड़ला ने कहा कि 2047 तक बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर के सपनों को साकार करना हमारी जिम्मेदारी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि सभी सरकारी योजनाओं का लाभ एससी-एसटी समुदायों तक प्रभावी ढंग से पहुंचना चाहिए।
लोकसभा अध्यक्ष ने संसदीय समिति को ‘मिनी संसद’ बताते हुए कहा कि यह समिति लगातार अध्ययन और समीक्षा करती है कि बजट आवंटन वास्तव में इन समुदायों तक पहुंच रहे हैं या नहीं और क्या एससी-एसटी की नई पीढ़ी को समान अवसर मिल पा रहे हैं।
उन्होंने शिक्षा को सबसे महत्वपूर्ण क्षेत्र बताते हुए कहा कि केंद्र और राज्य सरकारें एससी-एसटी छात्रों की शैक्षिक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए अलग से निधि आवंटित कर रही हैं। बिड़ला ने सुझाव दिया कि हर राज्य विधानसभा में भी ऐसी समितियां बनाई जानी चाहिए, जो योजनाओं के क्रियान्वयन और उनके परिणामों की निगरानी करें।
बिड़ला ने कहा कि चाहे केंद्र में मोदी जी की सरकार हो या राज्यों की, सभी सरकारें प्रयासरत हैं कि सरकारी योजनाओं का अधिकतम लाभ अनुसूचित जातियों और जनजातियों तक पहुँचे। केंद्र और राज्यों की संसदीय समितियाँ समय-समय पर योजनाओं, बजट आवंटन और संवैधानिक अधिकारों की समीक्षा करती हैं ताकि इन समुदायों को उचित लाभ मिल सके।