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झील में हादसे के बाद पुरी प्रशासन ने की सेवाएं स्थगित
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नाव से गिरने से 58 वर्षीय व्यक्ति की हुई थी मौत
भुवनेश्वर। ओडिशा की प्रसिद्ध चिलिका झील में एक व्यक्ति की दर्दनाक मौत के बाद घने कोहरे और अत्यधिक कम दृश्यता को देखते हुए पुरी जिला प्रशासन ने अगले आदेश तक प्रतिदिन सुबह 11 बजे तक नाव और फेरी सेवाओं को निलंबित कर दिया है। प्रशासन के अनुसार दृश्यता सामान्य होने तक छोटी मोटरबोट, यात्री फेरी, मालवाहक नौकाएं और फ्लोटिंग प्लेटफॉर्म सहित सभी प्रकार के जल परिवहन के संचालन पर रोक रहेगी, ताकि किसी भी तरह की दुर्घटना से बचा जा सके।
हादसे में जान गंवाने वाले व्यक्ति की पहचान उमा शंकर साबत (58) के रूप में हुई है, जो मूल रूप से ब्रह्मपुर के रहने वाले थे और वर्तमान में मालकानगिरि जिले के बालिमेला में निवास कर रहे थे। गुरुवार को वह सातपड़ा के पास एक फ्लोटिंग ब्रिज फेरी से यात्रा के दौरान दुर्घटनावश पानी में गिर पड़े, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई।
प्रशासन का आदेश, कोहरे में नहीं चलेंगी नावें
प्रशासन द्वारा जारी आधिकारिक अधिसूचना में कहा गया है कि जिले में फैले घने कोहरे और कम दृश्यता के कारण जान-माल को गंभीर खतरा है। ऐसे में अगले आदेश तक सुबह 11 बजे तक किसी भी प्रकार की फेरी सेवा या पर्यटक नावों के संचालन की अनुमति नहीं दी जाएगी। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि कोहरे के कारण दृश्यता कम होने से समुद्री और नदीय हादसों की आशंका कई गुना बढ़ जाती है, जिससे मानव जीवन को खतरा उत्पन्न होता है। इसलिए सभी नदियों, झीलों और अन्य जलाशयों में भारी कोहरे के दौरान नाव सेवाएं पूरी तरह बंद रहेंगी।
50 यात्रियों के साथ वाहन भी थे सवार
सूत्रों के अनुसार, उमा शंकर साबत अपने परिवार के साथ सातपड़ा से गंजाम जिले के जान्हिकुड़ा जा रहे थे। जिस फेरी में वह सवार थे, उसमें लगभग 50 यात्री, एक बस, दो कारें और आठ मोटरसाइकिलें भी लदी हुई थीं। यात्रा के दौरान साबत के पानी में गिरने की सूचना मिलते ही सहयात्रियों ने शोर मचाया।
दमकल कर्मियों और मछुआरों ने निकाला शव
घटना की सूचना मिलते ही दमकल विभाग के कर्मचारी स्थानीय मछुआरों की मदद से मौके पर पहुंचे और काफी मशक्कत के बाद साबत का शव पानी से बाहर निकाला गया।
तस्वीर लेते समय फिसलने की आशंका
बताया जा रहा है कि साबत का परिवार एक दिन पहले राजहंस में पिकनिक मनाने सातपड़ा आया था और रात अपने एक रिश्तेदार के यहां रुका था। वापसी के दौरान फेरी पर सफर करते समय साबत संभवतः चिलिका के सुंदर दृश्य की तस्वीरें लेने के प्रयास में फिसलकर पानी में गिर गए। आशंका है कि उसी दौरान एक अन्य मोटर चालित नाव उनसे टकरा गई, जिससे उनके सिर में गंभीर चोट आई और उनकी मौत हो गई।
घने कोहरे से फेरी फंसी, यात्रियों को सुरक्षित निकाला गया
हादसे के बाद घने कोहरे के कारण फ्लोटिंग ब्रिज फेरी कुछ घंटों तक झील में फंसी रही। बाद में प्रशासन ने सभी यात्रियों को दूसरी नाव से सुरक्षित बाहर निकाल लिया।
इस मार्ग पर बार-बार होती हैं दिक्कतें
सूत्रों का कहना है कि जान्हिकुड़ा और सातपड़ा के बीच लगभग छह किलोमीटर लंबे यात्री नाव मार्ग पर अक्सर व्यवधान सामने आते रहते हैं। इस क्षेत्र में पानी की गहराई कम होने के कारण नावें फंस जाती हैं या तकनीकी समस्याओं का सामना करना पड़ता है, जिससे यात्रियों की सुरक्षा पर सवाल खड़े होते रहे हैं।
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