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प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र में फर्जीवाड़ा रोकेगी एआई तकनीक

  •    ओडिशा में सभी ऑटो एमिशन टेस्टिंग सेंटर होंगे जियो-फेंसिंग के दायरे में

भुवनेश्वर। प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (पीयूसीसी) जारी करने में हो रही अनियमितताओं पर अंकुश लगाने के लिए ओडिशा सरकार ने एआई आधारित जियो-फेंसिंग सॉफ्टवेयर लागू करने का निर्णय लिया है। इसके तहत राज्य के सभी ऑटो एमिशन टेस्टिंग सेंटरों पर जियो-फेंसिंग अनिवार्य की जाएगी, ताकि बिना वाहन की भौतिक जांच के प्रमाणपत्र जारी न हो सके।

अब वाहन लाना होगा जांच केंद्र तक

परिवहन विभाग के अनुसार, प्रस्तावित जीपीएस आधारित प्रणाली के तहत वाहन मालिकों को अपने वाहन निर्धारित जांच केंद्रों तक लाने होंगे। वहां ऑपरेटर वाहन की जांच करेंगे और लाइव वीडियो व तस्वीरें लेकर आवेदन की प्रक्रिया पूरी करेंगे। इससे यह सुनिश्चित होगा कि पीयूसीसी जारी करने से पहले वाहन वास्तव में केंद्र पर मौजूद है।

फर्जी प्रमाणपत्रों की शिकायतों के बाद कदम

परिवहन आयुक्त अमिताभ ठाकुर ने बताया कि विभाग को लगातार ऐसी शिकायतें मिल रही थीं कि कई वाहन बिना जांच केंद्र पहुंचे ही पीयूसीसी हासिल कर लेते हैं। इसी समस्या से निपटने के लिए एआई सक्षम जियो-फेंसिंग सॉफ्टवेयर ‘पीयूसीसी संस्करण 2.0’ के परीक्षण चल रहे हैं, ताकि इसे जल्द से जल्द लागू किया जा सके।

200 मीटर का वर्चुअल दायरा बनाएगी जियो-फेंसिंग

अतिरिक्त परिवहन आयुक्त दीप्ति रंजन पात्र ने कहा कि सभी ऑटो एमिशन टेस्टिंग सेंटरों को जियो-फेंस किया जाएगा। जियो-फेंसिंग के तहत किसी भी केंद्र के चारों ओर लगभग 200 मीटर का वर्चुअल दायरा तय होगा, जिससे वाहन के प्रवेश और निकास की सटीक जानकारी मिल सकेगी और प्रमाणपत्र जारी करने से पहले वाहन की वास्तविक उपस्थिति की पुष्टि हो पाएगी।

वाहन पोर्टल से जुड़ेगा नया सिस्टम

उन्होंने बताया कि पीयूसीसी संस्करण 2.0 को वाहन पोर्टल से जोड़ा जाएगा। इसके लिए टेस्टिंग सेंटरों को एक विशेष ऐप इंस्टॉल करना होगा, जो जांच के लिए आए वाहनों के भौगोलिक निर्देशांक दर्ज करेगा। ऐप यह सुनिश्चित करेगा कि वाहन जियो-फेंस किए गए क्षेत्र के भीतर ही मौजूद है। इसके बाद ही सॉफ्टवेयर पीयूसीसी आवेदन को आगे बढ़ाएगा।

मौजूदा व्यवस्था की खामी होगी दूर

वर्तमान में ऑटो एमिशन टेस्टिंग सेंटरों को केवल वाहन के पंजीकरण नंबर प्लेट की तस्वीर के आधार पर प्रमाणपत्र जारी करने की सुविधा है। इसी खामी का फायदा उठाकर कुछ ऑपरेटर ग्राहकों के घर बैठे फर्जी पीयूसीसी जारी कर देते थे। नई व्यवस्था इस गड़बड़ी पर पूरी तरह रोक लगाएगी।

लाइव वीडियो और लोकेशन अनिवार्य

पीयूसीसी 2.0 के तहत अब जांच केंद्र पर वाहन की लैंडस्केप तस्वीर, उत्सर्जन जांच का छोटा लाइव वीडियो, और फोटो-वीडियो लेने वाले मोबाइल डिवाइस का जियो-लोकेशन डेटा अनिवार्य होगा। इन सभी विवरणों के बिना प्रमाणपत्र जारी नहीं किया जा सकेगा।

फर्जीवाड़ा करने वालों पर सख्त कार्रवाई

परिवहन मंत्री बिभूति भूषण जेना ने चेतावनी देते हुए कहा कि नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि अब तक 42 ऑटो एमिशन टेस्टिंग सेंटरों के लाइसेंस रद्द किए जा चुके हैं, क्योंकि वे फर्जी प्रमाणपत्र जारी करते पाए गए थे।

राज्य में 1500 से अधिक जांच केंद्र सक्रिय

वर्तमान में ओडिशा में करीब 1,500 सक्रिय ऑटो एमिशन टेस्टिंग सेंटर हैं, जिनमें 1,800 से अधिक मशीनें लगी हुई हैं। सरकार का मानना है कि एआई आधारित जियो-फेंसिंग व्यवस्था लागू होने से पारदर्शिता बढ़ेगी और प्रदूषण नियंत्रण नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित होगा।

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