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पहले दिन में उठाई गईं थीं आपत्तियां
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नो-होर्डिंग जोन घोषित करने की मांग तेज
भुवनेश्वर। राजधानी भुवनेश्वर के झारपड़ा चौक पर स्थित देश के गौरवपूर्ण राष्ट्रीय प्रतीक अशोक स्तंभ को राजनीतिक बैनर और पोस्टरों से ढक दिए जाने पर उठे तीव्र जनआक्रोश के बाद प्रशासन ने अशोक स्तंभ के चारों ओर से सभी बैनर हटा दिए। इससे पहले दिन में नागरिकों, सामाजिक संगठनों और पूर्व सैन्यकर्मियों ने इस कृत्य पर कड़ी आपत्तियां दर्ज कराई थीं।
डा सुनीति मुंड ने बताया कि कई नेताओं के पोस्टर और बैनर लगाए जाने से अशोक स्तंभ पूरी तरह ढक गया था। इससे राष्ट्रीय गरिमा का अपमान हो रहा था। इस पर तत्काल कार्रवाई की मांग की थी। अशोक स्तंभ केवल एक स्थापत्य नहीं, बल्कि संविधान, संप्रभुता, कानून के शासन और राष्ट्रीय सम्मान का प्रतीक है, ऐसे में इसे राजनीतिक प्रचार से ढकना अनुचित और दुर्भाग्यपूर्ण है।
आपत्तियों के बाद हटे बैनर
दिनभर चली आपत्तियों और विरोध के बाद संबंधित एजेंसियों ने देर रात मौके पर पहुंचकर सभी बैनर–पोस्टर हटाए, जिससे राष्ट्रीय प्रतीक फिर से स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा। डा सुनीति मुंड ने कार्रवाई का स्वागत करते हुए कहा कि ऐसे मामलों में तत्काल और स्थायी समाधान जरूरी है।
नो-होर्डिंग जोन घोषित करने की मांग
डॉ सुनीति मुंड ने इस घटना पर नाराजगी जताते हुए अशोक स्तंभ परिसर को ‘नो-होर्डिंग जोन’ घोषित करने की मांग की। उन्होंने राज्य सरकार से आग्रह किया कि राष्ट्रीय प्रतीकों वाले स्थानों पर बैनर–पोस्टर न लगाने के लिए कानून को सख्ती से प्रभावी किया जाए। साथ ही, वहां स्पष्ट सूचना पट्ट लगाने का प्रस्ताव भी रखा गया।
पहले भी सामने आ चुकी है ऐसी घटना
उल्लेखनीय है कि पिछले वर्ष भी इसी तरह की समस्या सामने आई थी। तब वरिष्ठ विरासत शोधकर्ता अनिल धीर की शिकायत के बाद संबंधित पोस्टर–बैनर तत्काल हटाए गए थे। बावजूद इसके, ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति पर नागरिकों ने चिंता जताई है।
नगर निगम से सख्त दिशा-निर्देश की अपेक्षा
उन्होंने भुवनेश्वर नगर निगम से मांग की है कि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों, इसके लिए कठोर दिशा-निर्देश और निगरानी व्यवस्था लागू की जाए। पूर्व नौसैनिकों और वरिष्ठ नागरिकों ने भी कहा कि राष्ट्रीय प्रतीकों का सम्मान हम सभी का सामूहिक कर्तव्य है और इसके लिए निरंतर जागरूकता जरूरी है।
अन्य स्थलों पर भी समान कदम की मांग
डॉ सुनीति मुंड ने यह भी कहा कि राजधानी के जिन अन्य स्थानों पर राष्ट्रीय प्रतीक या चिन्ह स्थापित हैं, उन्हें भी पूरी तरह बैनर-मुक्त रखा जाए। इस अवसर पर कई वरिष्ठ नागरिक उपस्थित रहे और सभी ने एक स्वर में राष्ट्रीय प्रतीकों की मर्यादा बनाए रखने की अपील की।
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