-
भुवनेश्वर में एससी/एसटी कल्याण समितियों का राष्ट्रीय सम्मेलन का समापन
-
बोले – संसदीय समितियों की भूमिका लगातार हो रही है मजबूत
भुवनेश्वर। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने शनिवार को कहा कि देश के युवाओं को समान अवसर देना राष्ट्रीय विकास के लिए बेहद आवश्यक है। उन्होंने कहा कि जब युवाओं को अवसर मिलता है तो वे देश की प्रगति में सबसे बड़ी भूमिका निभा सकते हैं।
बिड़ला यहां दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन (एससी/एसटी कल्याण समितियां) के समापन अवसर पर संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक विमर्श को मजबूत बनाने में संसदीय और विधायी समितियों की भूमिका लगातार बढ़ रही है।
धन का सही उपयोग सुनिश्चित करना जरूरी
लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारें अनुसूचित जाति एवं जनजाति समुदायों के कल्याण के लिए बजट प्रावधान करती हैं। इन धनराशियों का सही उपयोग सुनिश्चित करने में संसदीय समितियों की अहम भूमिका होती है। उन्होंने कहा कि संसदीय समितियां पार्टी लाइनों से ऊपर उठकर काम करती हैं, इसलिए उनकी भूमिका और भी महत्वपूर्ण है।
राज्यों को विधायी पैनल बनाने का सुझाव
बिड़ला ने यह भी प्रस्ताव रखा कि राज्य विधानसभा स्तर पर भी विधायी पैनल बनाए जाएं, जो एससी/एसटी कल्याण योजनाओं पर नजर रखें और सुनिश्चित करें कि लाभ लक्षित समुदायों तक पहुंचे। उन्होंने यह भी चिंता जताई कि संसद और विधानसभाओं में संवाद की गुणवत्ता और आचरण का स्तर लगातार गिर रहा है, जिस पर ध्यान देने की जरूरत है।
संसदीय समितियां किसी सरकार की आलोचना के लिए नहीं
उन्होंने कहा कि संसदीय समितियां किसी सरकार की आलोचना के लिए नहीं हैं, बल्कि नागरिकों के कल्याण की योजनाओं और विधायी अधिकारों को जमीनी स्तर पर क्रियान्वित करने का माध्यम है।
रचनात्मक संघवाद का उदाहरण
राज्यसभा उपाध्यक्ष हरिवंश नारायण सिंह ने इस सम्मेलन को “रचनात्मक संघवाद का जीवंत प्रतीक” बताया। उन्होंने कहा कि यह पहली बार है जब ऐसा सम्मेलन दिल्ली से बाहर आयोजित हुआ है, और इसमें सभी दलों ने मतभेद भुलाकर रचनात्मक विमर्श किया।
आदिवासी समाज संस्कृति का संरक्षक : राज्यपाल
ओडिशा के राज्यपाल हरी बाबू ने कहा कि एससी/एसटी समुदाय भारत की सामाजिक संरचना का अभिन्न हिस्सा हैं और संस्कृति एवं धरोहर के संरक्षक हैं। उन्होंने कहा कि संसदीय और विधायी समितियों की जिम्मेदारी है कि वे योजनाओं के क्रियान्वयन की निगरानी करें और यह सुनिश्चित करें कि लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे।
केंद्र सरकार की पहलें
केंद्रीय मंत्री जुएल ओराम ने पीएम जनमन और धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान जैसी पहलों का उल्लेख करते हुए कहा कि इनसे पांच करोड़ से अधिक आदिवासी नागरिक लाभान्वित होंगे। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि नई शिक्षा नीति के जरिए एससी और एसटी छात्रों को शिक्षा के क्षेत्र में अधिक अवसर मिल रहे हैं।
सम्मेलन में जोर
इस सम्मेलन का मुख्य विषय “संसदीय और विधायी समितियों की भूमिका” था। इसमें संविधान द्वारा प्रदत्त सुरक्षा उपायों को मजबूत बनाने, वर्तमान नीतियों की समीक्षा करने और नई रणनीतियां तैयार करने पर चर्चा हुई।
प्रतिनिधियों ने कहा कि समितियों की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है बजट आवंटन की जांच, योजनाओं की निगरानी और मूल्यांकन, ताकि इनका लाभ वास्तव में समाज के सबसे कमजोर तबकों तक पहुंचे और 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य साकार हो।