Home / Odisha / अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग की वर्तमान स्थिति बेहतर – मोहन माझी

अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग की वर्तमान स्थिति बेहतर – मोहन माझी

  •     कहा – आज हम अच्छे हैं, आने वाला कल और भी होगा अच्छा

भुवनेश्वर। ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर में शुक्रवार से आयोजित अनुसूचित जाति और जनजाति कल्याण समितियों के अध्यक्षों के दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित करते हे ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने कहा कि 25 वर्षों के बाद यह सम्मेलन पहली बार दिल्ली के बाहर आयोजित हो रहा है और वह भी ओडिशा में। इसके लिए मुख्यमंत्री ने लोकसभा अध्यक्ष को धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि पहले भी अनेक राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन ओडिशा में आयोजित हुए हैं और इससे राष्ट्रीय स्तर पर ओडिशा का महत्व बढ़ा है।

अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग की वर्तमान स्थिति बेहतर है, इस पर टिप्पणी करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि आज हम अच्छे हैं, आने वाला कल और भी अच्छा होगा, निश्चित रूप से अच्छा होगा। मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि भुवनेश्वर का यह सम्मेलन अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग के लिए समृद्ध भविष्य का मार्ग प्रशस्त करेगा।

स्थिति में बड़ा परिवर्तन आया

मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वतंत्रता के समय देश का सामाजिक और राजनीतिक स्तर कई कठिनाइयों से गुजर रहा था। सबसे बड़ी समस्या अनुसूचित जाति व जनजातियों की थी। लेकिन बाबा साहेब अंबेडकर के सिद्धांतों और मार्ग का अनुसरण करते हुए आज देश में अनुसूचित जाति व जनजातियों की स्थिति में बड़ा परिवर्तन आया है।

मोदी के नेतृत्व में मुख्यधारा में शामिल करने का प्रयास तेज

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में यह प्रयास तेज हुआ है कि वे पूरी तरह से मुख्यधारा में शामिल हों और विकसित भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दे सकें। पीएम जनमन, धरती आबा ग्राम उत्कर्ष अभियान जैसी योजनाएँ इस लक्ष्य को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

ओडिशा की योजनाएं गिनाईं

मुख्यमंत्री ने कहा कि ओडिशा की 40 प्रतिशत जनसंख्या अनुसूचित जाति व जनजाति वर्ग का प्रतिनिधित्व करती है। उन्होंने इनके विकास के लिए चलाई जा रही विभिन्न योजनाओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि विकास के साथ-साथ आदिवासी संस्कृति के संरक्षण के लिए ओडिशा सरकार आदिवासी संस्कृति और ऐतिहासिक धरोहर भवन तथा आदिवासी भाषा संस्थान भी बना रही है। उन्होंने यह भी बताया कि जनजातीय भाषाओं में पठन-पाठन के लिए कदम उठाए गए हैं।

हर दृष्टि से एक ऐतिहासिक सम्मेलन साबित होगा

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह सम्मेलन हर दृष्टि से एक ऐतिहासिक सम्मेलन साबित होगा। इस सम्मेलन में प्रस्तुत विचारों और सुझावों के आधार पर नई-नई नीतियाँ और कार्यक्रम तैयार किए जाएंगे। अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग के लोग मुख्यधारा में शामिल होकर समृद्ध ओडिशा और विकसित भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान देंगे, ऐसा उन्होंने विश्वास व्यक्त किया।

जनजाति समूहों पर विशेष ध्यान – जुएल ओराम

केंद्रीय आदिवासी कार्य मंत्री जुएल ओराम ने कहा कि पीएम जनमन और धरतीआबा ग्राम उत्कर्ष योजना में विभिन्न जनजाति समूहों पर विशेष ध्यान दिया गया है। इन दोनों कार्यक्रमों से सीधे 5 करोड़ जनजातीय लोग लाभान्वित होंगे। उन्होंने कहा कि एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय और विभिन्न आश्रम स्कूलों के माध्यम से आदिवासी बच्चों के लिए एक शैक्षिक वातावरण तैयार किया गया है, ताकि उन्हें शिक्षित किया जा सके और इसके लिए अभिनव कदम उठाए गए हैं।

जनजातियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना हमारी प्रतिबद्धता – धर्मेंद्र प्रधान

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 सामाजिक न्याय की दिशा में कार्य करने के साथ-साथ जनजातीय छात्र-छात्राओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान कर एक सर्वव्यापी और सर्वस्पर्शी समाज के निर्माण के लिए प्रतिबद्ध है।

महाप्रभु श्रीजगन्नाथ की धरती पर सामाजिक न्याय के सभी सदस्यों का स्वागत करते हुए उन्होंने कहा कि समानता, सम्मान और न्याय की भावना से प्रेरित इस पहल के लिए वे लोकसभा अध्यक्ष को धन्यवाद देते हैं। उन्होंने कहा, यह प्रयास केवल अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग के सशक्तीकरण का माध्यम ही नहीं है, बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था को समाज के अंतिम पायदान तक पहुँचाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है।

ओडिशा अन्य राज्यों के लिए एक उदाहरण – हरिवंश

राज्यसभा के डिप्टी स्पीकर हरिवंश ने कहा कि ओडिशा अन्य राज्यों के लिए एक उदाहरण है। अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति कल्याण के लिए पिछले 10 वर्षों में बजट 4 गुना बढ़ा है और इसके परिणामस्वरूप आदिवासी बहुल राज्यों का विकास हुआ है, जिससे नक्सलवाद जैसी समस्या को नियंत्रित किया जा सका है। उन्होंने कहा कि केवल आरक्षण के बारे में सोचने के बजाय यह समिति सामाजिक समानता के लिए काम कर रही है।

विकास में प्रत्यक्ष भूमिका निभाएं – फगन सिंह कुलस्ते

लोकसभा की अनुसूचित जाति और जनजाति कल्याण समिति के अध्यक्ष फगन सिंह कुलस्ते ने कहा कि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति केवल योजनाओं का लाभ लेने के लिए ही नहीं, बल्कि देश की प्रतिष्ठा को उज्ज्वल बनाने और देश को विकास के मार्ग पर ले जाने में प्रत्यक्ष भूमिका निभाएं।

विधानसभा लोकतंत्र का केंद्र – सुरमा पाढ़ी

इस अवसर पर ओडिशा विधानसभा की सभापति सुरमा पाढ़ी ने स्वागत भाषण देते हुए कहा कि विधानसभा लोकतंत्र का केंद्र है। विधानसभा के प्रत्येक विधायक का कार्य सरकार के लिए नीति निर्धारण करना और उस नीति को दुर्गम क्षेत्र के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाना हम सबकी जिम्मेदारी है।

पहली बार दिल्ली से बाहर हो रहा सम्मेलन

उल्लेखनीय है कि इस प्रकार का सम्मेलन पहली बार 1976 में नई दिल्ली में आयोजित हुआ था। इसके बाद यह 1979, 1983, 1987 और 2001 में भी आयोजित हुआ। वर्तमान में पहली बार यह दिल्ली से बाहर ओडिशा में आयोजित हो रहा है।

इस सम्मेलन का उद्देश्य यह है कि अनुसूचित जाति, जनजाति और पिछड़े वर्गों के लोगों के विकास के लिए विचार-विमर्श और पुनरावलोकन की एक परंपरा स्थापित की जाए। संविधान में दिए गए प्रावधानों के अनुसार दलित और आदिवासियों की वर्तमान स्थिति का अध्ययन करना, उन्हें मुख्यधारा में लाने के लिए मौजूद चुनौतियों की पहचान करना और उनके समाधान के लिए मार्गदर्शन करना इस सम्मेलन का मकसद है।

इस समिति की बैठक इस दिशा में मार्गदर्शन करेगी। विधानसभा के उपसभापति भवानी शंकर भोई ने धन्यवाद ज्ञापन दिया। इस अवसर पर लोकसभा सभापति ने कन्वेंशन हॉल में आयोजित एक प्रदर्शनी का उद्घाटन कर उसका अवलोकन भी किया।

Share this news

About desk

Check Also

पुरी श्रीमंदिर में 15 से शुरू होगी कतार दर्शन की सुविधा

    प्रबंधन समिति की बैठक 3 सितंबर को पुरी। श्रीजगन्नाथ मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *