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लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने किया दो दिवसीय सम्मेलन का उद्घाटन
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120 प्रतिनिधियों की भागीदारी, संविधानिक सुरक्षा व विकास पर फोकस
भुवनेश्वर। ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर में शुक्रवार को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने अनुसूचित जाति और जनजाति कल्याण समितियों के अध्यक्षों का दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन उद्घाटित किया। यह पहली बार है जब यह सम्मेलन दिल्ली से बाहर आयोजित किया जा रहा है।
जानकारी के अनुसार, अब तक संसद, राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से करीब 120 प्रतिनिधियों ने इसमें पंजीकरण कराया है। सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य संविधानिक प्रावधानों को और मजबूत करना, सामाजिक-आर्थिक विकास को बढ़ावा देना और अनुसूचित जाति व जनजातियों के सशक्तिकरण के लिए सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों को साझा करना है।
सम्मेलन का विषय और प्रमुख सहभागी
सम्मेलन का विषय “कल्याण, विकास और सशक्तिकरण में संसदीय और विधानमंडलीय समितियों की भूमिका रखा गया है।”
इस अवसर पर ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी, केंद्रीय मंत्री जुअल ओराम, राज्यसभा उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह और संसदीय समिति के अध्यक्ष फग्गन सिंह कुलस्ते भी सम्मेलन में उपस्थित हैं।
1976 के बाद ऐतिहासिक आयोजन
गौरतलब है कि इस तरह का पहला सम्मेलन 1976 में नई दिल्ली में हुआ था। इस बार ओडिशा के राज्यपाल हरी बाबू 30 अगस्त को सम्मेलन के समापन सत्र में संबोधन देंगे।
समिति जो भी प्रस्ताव देगी, वह लागू होगा – ओम बिड़ला
दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन के अवसर पर बिड़ला ने कहा कि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति कल्याण समिति के सदस्य हमेशा दलगत राजनीति से ऊपर उठकर समाज के इस वर्ग की उन्नति के लिए निर्णय लेते हैं। आज देश में अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग की जो भी प्रगति हुई है, वह इन समितियों के प्रस्तावों, अध्ययनों और निगरानी के कारण संभव हो पाई है। उन्होंने कहा कि सभी संसदीय और राज्य समितियाँ, बिना किसी दलगत भेदभाव के इस वर्ग की समग्र प्रगति पर ध्यान देती आई हैं।
उन्होंने आगे कहा कि भुवनेश्वर की वर्तमान बदलती परिस्थितियों के अनुरूप इस सम्मेलन में समिति जो भी प्रस्ताव देगी, उसे लागू किया जाएगा। इसके फलस्वरूप देश में समानता-आधारित समाज के निर्माण का लक्ष्य पूरा किया जा सकेगा। इससे विकसित भारत के निर्माण का लक्ष्य भी साकार होगा।
आंबेडकर के विचारों पर संविधान का मूल सिद्धांत हुआ तैयार
बिड़ला ने कहा कि बाबा साहेब आंबेडकर के विचारों के आधार पर संविधान के मूल सिद्धांत तैयार किए गए हैं। पिछले 78 वर्षों से देश इन्हीं सिद्धांतों को लेकर आगे बढ़ रहा है। इन्हीं सिद्धांतों के अनुरूप अनुसूचित जाति, जनजाति तथा विभिन्न पिछड़े वर्गों को सामाजिक और आर्थिक न्याय दिलाने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं।
नई सोच और विचार अपनाए जाएंगे
उन्होंने कहा कि आज की समिति की चर्चाओं और अध्ययनों से जो भी नई सोच और विचार सामने आएंगे, उन्हें अपनाया जाएगा। इसके साथ ही, विभिन्न राज्यों में लागू सर्वश्रेष्ठ प्रथाओं को अन्य जगहों पर भी लागू किया जाएगा, ताकि इन वर्गों के लिए एक समानता-आधारित और न्यायपूर्ण समाज का निर्माण किया जा सके।