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मुख्य सचिव ने दिया जबरन सेवानिवृत्ति का संकेत
भुवनेश्वर। ओडिशा सरकार अब नाकारा और काम में लापरवाही बरतने वाले सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाने जा रही है। मुख्य सचिव मनोज आहूजा ने स्पष्ट किया है कि जो कर्मचारी जिम्मेदारियों का कुशलतापूर्वक निर्वहन नहीं कर पा रहे हैं, उन्हें जबरन सेवानिवृत्त किया जा सकता है। यह फैसला मंगलवार को लोक सेवा भवन में हुई सचिवस्तर की उच्चस्तरीय बैठक में लिया गया। बैठक की अध्यक्षता करते हुए मुख्य सचिव ने विभिन्न विभागों को निर्देश दिया कि वे कर्मचारियों के प्रदर्शन की समीक्षा करें और जो अधिकारी/कर्मचारी अक्षम या लगातार निष्क्रिय पाए जाएं, उनके खिलाफ मौजूदा नियमों के तहत सख्त कार्रवाई करें।
सेवाएं प्रभावित न हों, इसलिए सख्ती जरूरी – मुख्य सचिव
मुख्य सचिव ने कहा कि जनसेवा की गुणवत्ता किसी भी सूरत में प्रभावित नहीं होनी चाहिए। इसके लिए प्रशासनिक स्तर पर कठोर निर्णय आवश्यक हैं। अक्षम अधिकारी केवल तंत्र पर बोझ बनते हैं और सार्वजनिक हित के विरुद्ध काम करते हैं।
उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि सामान्य प्रशासन और जन शिकायत विभाग द्वारा पहले से जारी दिशा-निर्देशों को प्रभावी ढंग से लागू किया जाए।
विकास लक्ष्यों के लिए सक्रिय हों अंतर-विभागीय कार्य समूह
मुख्य सचिव ने यह भी कहा कि राज्य के दीर्घकालिक विकास लक्ष्यों को पूरा करने के लिए अंतर-विभागीय कार्य समूहों को सक्रिय किया जाए, ताकि योजनाओं का समन्वित और समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित हो सके।
31 जुलाई तक मांगी गई खाली पदों की रिपोर्ट
बैठक में एक और महत्वपूर्ण निर्देश देते हुए सभी विभागों को कहा गया कि वे 31 जुलाई तक अपने-अपने विभागों में रिक्त पदों की अद्यतन जानकारी सौंपें, ताकि समय पर नियुक्तियों से संबंधित निर्णय लिए जा सकें और कार्यबल का दक्षतापूर्वक उपयोग सुनिश्चित किया जा सके।
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