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बीजद और कांग्रेस ने किया उग्र प्रदर्शन

  •  उच्च शिक्षा मंत्री के आवास का घेराव

भुवनेश्वर। बालेश्वर स्थित फकीर मोहन (एफएम) स्वायत्त महाविद्यालय की छात्रा द्वारा आत्मदाह की कोशिश के मामले में रविवार को राजधानी भुवनेश्वर में राजनीतिक घमासान तेज हो गया। विपक्षी दल बीजद और कांग्रेस ने एकजुट होकर उच्च शिक्षा मंत्री सूर्यवंशी सूरज के आवास का घेराव किया और तीव्र नारेबाजी के साथ प्रदर्शन किया।

बीजू छात्र जनता दल और छात्र कांग्रेस के सैकड़ों कार्यकर्ता मंत्री के भुवनेश्वर स्थित निवास के बाहर जुटे और उन्होंने घटना के लिए राज्य सरकार की निष्क्रियता को जिम्मेदार ठहराया। प्रदर्शन के दौरान पुलिस के साथ प्रदर्शनकारियों की धक्का-मुक्की और झड़पें भी हुईं, जिसके बाद कई छात्रों को हिरासत में लिया गया।

विरोधियों ने दागे तीखे सवाल

कांग्रेस नेता यासिर नवाज ने कहा कि एक छात्रा ने अपने आत्म-सम्मान के लिए खुद को आग के हवाले कर दिया, क्योंकि उसे कॉलेज के कुछ स्टाफ द्वारा प्रताड़ित किया गया। उसने प्राचार्य, पुलिस अधीक्षक और सांसद से न्याय की गुहार लगाई, लेकिन जब कहीं से मदद नहीं मिली, तब उसने आत्मदाह किया। इससे ज्यादा शर्मनाक क्या हो सकता है?

छात्र नेता इप्सिता साहू ने भी आक्रोश जाहिर करते हुए कहा कि जिस छात्रा ने आत्मदाह किया वह एबीवीपी से जुड़ी थी। भाजपा सरकार आज हमें रोकने आई है, लेकिन अपने ही संगठन की छात्रा को न्याय नहीं दे पाई। हम अंतिम सांस तक लड़ाई जारी रखेंगे।

पुलिस की कार्रवाई और तनावपूर्ण माहौल

प्रदर्शन के दौरान जब छात्र नेताओं ने बैरिकेड तोड़ने की कोशिश की, तब पुलिस ने हस्तक्षेप करते हुए उन्हें रोका। इससे तनाव का माहौल बन गया और पुलिस ने कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेकर मौके से हटाया। मौके पर भारी संख्या में पुलिस बल तैनात था, जिससे राजधानी में कुछ समय के लिए यातायात बाधित हुआ।

भाजपा का पलटवार

इस बीच भाजपा विधायक बाबू सिंह ने पूरे घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इस दर्दनाक घटना पर राजनीति करना दुर्भाग्यपूर्ण है। यह समय राजनीति का नहीं, बल्कि संवेदनशीलता और निष्पक्ष जांच का है। सभी दलों को संयम बरतना चाहिए।

राजनीतिक तापमान चढ़ा, बहस गहरी

एफएम कॉलेज की घटना ने राज्यभर के छात्र समुदाय को झकझोर दिया है। जहां छात्र संगठन सुरक्षा और जवाबदेही की मांग कर रहे हैं, वहीं अब यह मुद्दा राजनीतिक रंग ले चुका है। कॉलेज परिसरों में महिला सुरक्षा, शिकायत निवारण तंत्र और प्रशासनिक लापरवाही को लेकर गहरी बहस शुरू हो गई है।

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