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छात्रा की हालत अब भी गंभीर, कोई सुधार नहीं

  •  गुर्दे, फेफड़े तथा इलेक्ट्रोलाइट संतुलन बुरी तरह प्रभावित

  •  एम्स भुवनेश्वर में उसका इलाज जारी

भुवनेश्वर/बालेश्वर। फकीर मोहन (एफएम) स्वायत्त महाविद्यालय की छात्रा द्वारा 12 जुलाई को प्रिंसिपल कार्यालय के सामने आत्मदाह की कोशिश के बाद एम्स भुवनेश्वर में उसका इलाज जारी है, लेकिन डॉक्टरों के अनुसार उसकी स्थिति अब भी गंभीर बनी हुई है और किसी प्रकार का सुधार नहीं हुआ है।

एम्स भुवनेश्वर के अधीक्षक डॉ दिलीप कुमार परिडा ने सोमवार को बताया कि पीड़िता को जब से अस्पताल लाया गया है, उसकी हालत न ही सुधरी है और न ही और बिगड़ी है। वह बर्न्स आईसीयू में वेंटिलेटर सपोर्ट पर है और उसके गुर्दे, फेफड़े तथा इलेक्ट्रोलाइट संतुलन बुरी तरह प्रभावित हुए हैं।

डॉ परिडा ने कहा कि उसे यहां लाए हुए लगभग 24 घंटे हो चुके हैं। हम उसकी लगातार निगरानी कर रहे हैं। जलने से आंतरिक अंगों को नुकसान होता है, और यही इसका सामान्य क्रम है। अभी यह नहीं कहा जा सकता कि उसकी हालत में कोई सुधार हुआ है।

24×7 निगरानी और इलाज जारी

पीड़िता की हालत पर नजर रखने के लिए 8 सदस्यीय विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम गठित की गई है, जिसमें नेफ्रोलॉजी, क्रिटिकल केयर, सर्जरी, पल्मोनोलॉजी और एनेस्थीसिया विभाग के डॉक्टर शामिल हैं।

किडनी फेल, डायलिसिस शुरू

रविवार को उसकी किडनी फेल होने के कारण डायलिसिस शुरू किया गया और आवश्यकतानुसार आगे भी सत्र किए जा सकते हैं। अस्पताल सूत्रों के अनुसार, पीड़िता के शरीर में पोटैशियम स्तर खतरनाक रूप से गिर गया था, जिसके लिए आवश्यक सूक्ष्म पोषक तत्व और इलेक्ट्रोलाइट दिए जा रहे हैं। डॉक्टरों ने बताया कि उसे हल्का बुखार भी है और ब्रॉड-स्पेक्ट्रम एंटीबायोटिक दिए जा रहे हैं। कल्चर रिपोर्ट आने के बाद एंटीबायोटिक योजना में बदलाव किया जाएगा। एम्स दिल्ली से रियल-टाइम वीडियो कंसल्टेशन के माध्यम से विशेषज्ञों की मदद भी ली जा रही है।

यौन उत्पीड़न और शैक्षणिक दुरुपयोग का आरोप

बताया जा रहा है कि छात्रा ने एफएम कॉलेज के शिक्षा विभाग प्रमुख समीर रंजन साहू पर यौन उत्पीड़न और शैक्षणिक दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए यह आत्मघाती कदम उठाया था। आरोप है कि उसने पहले भी प्रशासन से शिकायत की थी, लेकिन उस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। इस पूरे प्रकरण की जांच के लिए एक तीन सदस्यीय फैक्ट फाइंडिंग कमेटी बनाई गई है, जो इंटरनल कंप्लेंट कमेटी की भूमिका, संस्थान की प्रतिक्रिया और प्रशासनिक चूक की विस्तृत जांच करेगी।

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