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कोरोना का कहर, इलाज से पूर्व टेस्टों की बौछार

  •  इमरजेंसी वार्ड का चार्ज प्रति घंटा 350 रुपये वसूलने का आरोप

  •  बुखार के नाम पर जांच की बिल फाड़ रहे हैं निजी अस्पताल

  •  बीमारी कुछ और, कोरोना को लेकर जांच कुछ और करने का बनाया जा रहा दबाव

भुवनेश्वर. कोरोना वायरस के कहर का असर इलाज के खर्च पर भी देखने को मिल रहा है. मूल बीमारी से पहले कोविद-19 की संभावना को लेकर मरीज पर टेस्टों की बौछार की जा रही है. बुखार के नाम पर निजी अस्पतालों में बिल फाड़ने की शिकायतें मिल रही हैं. बीमारी कुछ और होती है और कोरोना को लेकर जांचें कुछ और हो रही हैं. इससे आर्थिक तंगी से परेशान मरीजों के परिवार के लोगों पर और वित्तीय कहर बरप रही है.
एक मरीज ने बताया कि वह यूरिन इंफेक्शन के कारण राजधानी स्थित एक निजी अस्पताल में गया. इंफेक्शन के कारण वह दर्द से परेशान था और दर्द के कारण उसे बुखार आ रहा था. जैसे ही वह अस्पताल के दरवाजे पर पहुंचा तो उसकी थर्मल स्क्रीनिंग की गयी और उसका तापमान 101 डिग्री पाया गया. इससे वहां खड़े चिकित्सा कर्मी दूर हटने लगे. बार-बार अपनी बीमारी बताने के बावजूद उस पर कोविद-19 की जांच के लिए दबाव बनाया जाने लगा. वहां पर मौजूद चिकित्सकों ने भी दिमाग लगाना उचित नहीं समझा कि दर्द के कारण भी बुखार होता है.
निजी अस्पताल के चिकित्सा कर्मियों के बढ़ते दबाव को देखते हुए मरीज ने अपने संबंधों की बदौलत अस्पताल प्रबंधन तक अपनी बात पहुंचने सफलता पायी तो चिकित्सक उसके इलाज में जुटे. जांच के दौरान मरीज की शिकायत सही निकली. यूरिन इंफेक्शन के कारण उसको दर्द हो रहा था और बुखार भी आ रहा था.

इस बीमारी के हिसाब से उसका इलाज किया गया और आज वह मरीज स्वस्थ होकर घर को लौट गया है. घर पहुंचने के बाद उस मरीज ने अपनी बात साझा की तथा बेवजह जांच का बिल फाड़ने का आरोप अस्पताल पर लगाया. मरीज ने बताया कि यहां तक कि चिकित्सकों ने भर्ती करने से पहले की जांच रिपोर्ट तक को नहीं देखा. सिर्फ शरीर का तापमान बढ़ने के कारण कोविद-19 के जांच का खर्च थोपने का प्रयास किया जाता रहा. इस दौरान निजी अस्पताल में इमरजेंसी वार्ड में एक घंटे के लिए 350 रुपये करके चार्ज वसूला जा रहा है.
एक अन्य मरीज ने भी बताया कि कोविद की संभावना को देखते हुए जांच की बिल फाड़ा जा रहा है. खासकर शनिवार और रविवार को अस्पताल पहुंचने पर अधिक बिल बनाने का आरोप भी उठा है.

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