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हमारा जीवन और पार्टी का इतिहास एक खुली किताब की तरह – मनमोहन सामल
भुवनेश्वर। ओडिशा में परिवहन घोटाले में गिरफ्तार बीजू जनता दल (बीजेडी) नेता राजा चक्र से 1 करोड़ रुपये लेने के आरोपों पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने कड़ा जवाब दिया है। इस मुद्दे को लेकर राज्य की सियासत गरमा गई है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मनमोहन सामल ने शुक्रवार को इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि यह बेबुनियाद और राजनीतिक मकसद से प्रेरित हैं।
भाजपा अध्यक्ष मनमोहन सामल ने कहा कि जो लोग आरोप लगा रहे हैं, वे पहले खातों की जानकारी की जांच करें। बिना सबूत के गैरजिम्मेदाराना बयान नहीं देने चाहिए। वर्षों की मेहनत से भाजपा ने अपनी पहचान बनाई है। झूठे आरोप लगाकर जनता को गुमराह करने की कोशिश न करें।
वकील के दावे से उठा विवाद
इस पूरे विवाद की शुरुआत बीजेडी नेता राजा चक्र के वकील सितांशु द्विवेदी के उस बयान से हुई, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा के राज्य नेतृत्व को 1.32 करोड़ रुपये दिए गए थे। उन्होंने दावा किया कि एक प्रस्ताव के तहत अगर यह राशि नहीं दी जाती, तो गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। वकील के अनुसार, आरटीजीएस के जरिए 1.32 करोड़ रुपये का लेनदेन हुआ, जिसमें से 53 लाख सचिव द्वारा निकाले गए और 15 लाख स्थानीय नेताओं को दिए गए।
कांग्रेस ने की सीबीआई जांच की मांग
कांग्रेस विधायक तराप्रसाद वाहिनीपति ने इस पूरे मामले में सीबीआई जांच की मांग करते हुए भाजपा पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि सभी ने सुना है कि भाजपा के खाते में 1 करोड़ रुपये आए हैं। हम राजा चक्र की गिरफ्तारी का स्वागत करते हैं, लेकिन सवाल है कि प्रवाकरण कौन है? सरकार ने राजा चक्र को गिरफ्तार किया, तो प्रवाकरण से कितने पैसे लिये? यदि सीबीआई जांच नहीं होती, तो कांग्रेस सड़कों पर उतरेगी।
अंजन कुमार बेज ने आरोपों को बताया निराधार
ओडिशा माइनिंग कॉरपोरेशन (ओएमसी) से जुड़ी सुकाटी-गंधमार्दन लोडिंग एजेंसी के पूर्व सचिव अंजन कुमार बेज ने इन आरोपों को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि 2020 से राजा चक्र की कमेटी के सभी सदस्य उन्हीं के निर्देशों पर काम कर रहे थे। भाजपा पर लगाए गए आरोप केवल भ्रम फैलाने और जांच को भटकाने की साजिश हैं। इन आरोपों में कोई सच्चाई नहीं है।
सियासी संग्राम का नया केंद्र
ओडिशा के बहुचर्चित परिवहन घोटाले में बीजेडी नेता राजा चक्र की गिरफ्तारी के बाद अब भाजपा और कांग्रेस आमने-सामने हैं। वकीलों और नेताओं के बयानों से सियासत और गर्मा गई है। अब देखना होगा कि इस मामले में जांच एजेंसियां आगे क्या कदम उठाती हैं।