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राष्ट्र सेविका समिति द्वारा हिंदू नववर्ष उत्सव मनाया गया

  •  250 से अधिक सेविका और बहनों ने भाग लिया

भुवनेश्वर। राष्ट्र सेविका समिति की ओर से भुवनेश्वर महानगर में हिंदू नववर्ष का आयोजन किया गया। यह उत्सव खंडगिरि स्थित कोलथिया बीणापाणि शिशु विद्य मंदिर के प्रांगण में बड़े धूमधाम से मनाया गया, जिसमें 250 से अधिक सेविका और बहनें भाग लीं और एक भव्य पथ संचलन आयोजित किया।
संचलन मार्ग में स्थानीय निवासियों ने सेविकाओं का स्वागत किया। इस उत्सव के मुख्य अतिथि के रूप में सम अस्पताल की डीन डॉ संघमित्रा मिश्रा ने भाग लिया। उन्होंने समाज में भेदभाव को समाप्त करने, समरस जीवन जीने और पर्यावरण संरक्षण पर विशेष जोर दिया।
मुख्य वक्ता के रूप में पूर्व क्षेत्र के प्रचारिका सुश्री लतिका पाढ़ी ने भारतीय संस्कृति पर आधारित जीवन जीने, आत्म शक्ति से परिपूर्ण होने, प्रेरणादायक एवं त्यागपूर्ण जीवन जीने का महत्व बताया और समाज के लिए उदाहरण बनने की प्रेरणा दी।


सुश्री लतिका पाढ़ी ने वर्ष प्रतिपदा के अवसर पर महिलाओं की भूमिका को उजागर करते हुए परिवार, समाज और देश की भलाई में उनके योगदान पर प्रकाश डाला। उन्होंने महिलाओं के समग्र विकास पर बात की और लड़कियों को रानी लक्ष्मीबाई के पदचिह्नों पर चलने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने यह भी कहा कि महिलाओं के लिए ” सोलह श्रृंगार” को बढ़ावा दिया जाता है, लेकिन यह ध्यान रखना चाहिए कि इससे “दर्पण सुंदरी” बनने की ओर अग्रसर न हों। इसका मतलब यह है कि हम केवल बाहरी सुंदरता में ही लिप्त हो जाते हैं और अपनी मूल ताकतों को नज़रअंदाज कर देते हैं। इस बदलते दौर में जब महिलाएं कई सुरक्षा चुनौतियों का सामना कर रही हैं, अगर हम सिर्फ दर्पण सुंदरी बनने तक सीमित रहते हैं, तो यह महिलाओं के लिए विनाशकारी होगा।


इस संदर्भ में उन्होंने रानी लक्ष्मीबाई की एक बचपन की कहानी सुनाई। कहानी में रानी लक्ष्मीबाई अपने भाई के साथ घुड़सवारी की प्रैक्टिस कर रही थीं, तभी उनका भाई घोड़े से गिर पड़ा और रानी हंसी। उनके भाई ने कहा कि आज तुम हंस रही हो, जब तुम गिरोगी तो मैं भी हंसूंगा। रानी लक्ष्मीबाई ने उत्तर दिया कि वह कभी नहीं गिरेंगी। उन्होंने अपने शब्दों को सच साबित किया और जब वह ब्रिटिशों से लड़ने के लिए घोड़े पर सवार हुईं, तब उन्होंने अपने बच्चे को अपनी पीठ पर बांधकर लड़ाई लड़ी।
सुश्री लतिका पाढ़ी ने इस घटना का उदाहरण देते हुए कहा कि ऐसी शक्ति नियमित अभ्यास और अनुशासन से आती है। उन्होंने सभी से अपील की कि वे नियमित रूप से शाखा में शामिल हों ताकि उनका समग्र विकास हो सके।


इसके साथ ही दुर्गा, लक्ष्मी और सरस्वती के शक्ति को अपने भीतर धारण कर राष्ट्र निर्माण में सेविकाओं की भूमिका पर भी चर्चा की। राष्ट्र सेविका समिति की महानगर संचालिका माननीय सनुजा मेघमाला ने समयदान के महत्व पर जोर दिया।
महानगर कार्यवाहिका आरती जेना ने धन्यवाद ज्ञापित किया। पथ संचलन के बाद कार्यक्रम का समापन हुआ।

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