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हादसे पर सियासत तेज, प्रशासन पर लापरवाही के आरोप
भुवनेश्वर। महाशिवरात्रि के दौरान लिंगराज मंदिर में महादीप चढ़ाने के दौरान एक सेवायत के गंभीर रूप से घायल होने के बाद प्रशासन पर लापरवाही के आरोप लग रहे हैं। हादसे के बाद सुरक्षा इंतजामों को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं, वहीं इस घटना ने राजनीतिक विवाद को भी जन्म दे दिया है।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, महादीप चढ़ाने के दौरान अत्यधिक घी के कारण सेवायत का हाथ फिसल गया और वह गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गए। कुछ लोगों का मानना है कि प्रशासन की ओर से चढ़ाई के रास्ते पर उचित मात्रा में रेत नहीं बिछाई गई, जिससे गिरने पर प्रभाव कम नहीं हो सका। हालांकि, ब्राह्मण नियोग के अध्यक्ष नारायण महापात्र ने कहा कि हादसे के लिए सिर्फ घी जिम्मेदार था और रेत की परत से कोई खास मदद नहीं मिल सकती थी। उन्होंने कहा कि 20 या 30 फीट की ऊंचाई से गिर रहे व्यक्ति को बचाने के लिए रेत की परत की मोटाई कितनी हो सकती है? ज़्यादा से ज़्यादा यह 6-8 इंच हो सकती है, लेकिन कोई फायदा नहीं है।
घायल सेवायत के पुत्र अश्विनी समर्थ ने प्रशासन को घेरते हुए कहा कि हर साल प्रशासन चढ़ाई वाले स्थान पर रेत बिछाता था, लेकिन इस बार यह नहीं किया गया। अगर वहां रेत होती, तो शायद मेरे पिता को फिसलने से बचाया जा सकता था। इस बार मंदिर में भारी भीड़ थी, जिससे प्रशासन अन्य व्यवस्थाओं में उलझ गया और रेत बिछाने की अनदेखी कर दी गई।
बीएमसी मेयर और भाजपा विधायक आमने-सामने
हादसे के बाद भुवनेश्वर की मेयर सुलोचना दास ने प्रशासन को जिम्मेदार ठहराया और कहा कि हर साल परंपरा के तहत रेत बिछाई जाती थी, लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ। उन्होंने प्रशासन की लापरवाही पर सवाल उठाए।
मेयर के इस बयान पर भाजपा विधायक बाबू सिंह ने पलटवार करते हुए कहा कि वह इस मुद्दे का राजनीतिकरण कर रही हैं। उन्होंने कहा कि अगर मेयर को कोई कमी दिखी थी, तो उन्होंने तुरंत प्रशासन को क्यों नहीं बताया? वह भी बीएमसी का हिस्सा हैं, क्या वह प्रशासन का हिस्सा नहीं हैं?
कांग्रेस ने भी साधा निशाना
कांग्रेस विधायक सोफिया फिरदौस ने भी सरकार पर हमला बोला और कहा कि मुख्यमंत्री से लेकर मंत्री तक हर चीज की समीक्षा कर रहे हैं, लेकिन जब इस तरह की घटनाएं हो रही हैं, तो इसका मतलब है कि या तो उनकी समीक्षा का कोई असर नहीं हो रहा या वे सही तरीके से समीक्षा नहीं कर रहे।
प्रशासन की चुप्पी पर उठ रहे सवाल
घटना के बाद प्रशासन की ओर से अब तक कोई ठोस बयान नहीं आया है। यह हादसा न केवल धार्मिक आयोजनों में सुरक्षा उपायों की पोल खोलता है, बल्कि प्रशासनिक उदासीनता को भी उजागर करता है। लिंगराज मंदिर में हर साल हजारों श्रद्धालु जुटते हैं, ऐसे में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए कड़े कदम उठाने की जरूरत है।