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केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने किया उद्घाटन
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राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों के बीच ज्ञान होगा साझा
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सीखने को मिलेगा अवसर
पुरी। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने आज ओडिशा के पुरी में सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा प्रणाली में अच्छे एवं अनुकरणीय प्रचलनों और नवप्रवर्तन पर नौवें राष्ट्रीय शिखर सम्मेलन का उद्घाटन किया। इस आयोजन में ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी, ओडिशा के स्वास्थ्य मंत्री डॉ मुकेश महालिंग तथा पुरी से लोकसभा सांसद डॉ संबित पात्र भी उपस्थित थे।
दो दिवसीय शिखर सम्मेलन में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा अपनी सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौतियों से निपटने के लिए अपनाई गई विभिन्न सर्वोत्तम प्रचलनों और नवप्रवर्तनों का प्रदर्शन और इनका मसौदा तैयार किया जाएगा। यह राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के बीच ज्ञान साझा करने और सीखने का अवसर प्रदान करेगा।
सत्र को संबोधित करते हुए जेपी नड्डा ने कहा कि देश में 2014 से स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति 2017 में उपचारात्मक स्वास्थ्य सेवा से बढ़कर उपचारात्मक के साथ-साथ निवारक, प्रोत्साहनकारी और व्यापक पहलुओं को शामिल करने का रुख अपनाया गया है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि सरकार ने प्राथमिक और द्वितीयक स्वास्थ्य सेवा में सुधार के अलावा तृतीयक स्वास्थ्य सेवा का भी उन्नयन किया है।
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार को लोगों को गुणवत्तापूर्ण और किफायती स्वास्थ्य सेवा सुनिश्चित करने पर जोर है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत आयुष्मान मंदिर के कार्यों ने समग्र स्वास्थ्य सेवा पिरामिड में प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा का आधार सुदृढ़ किया है।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री और अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने इस अवसर पर सर्वोत्तम प्रचलनों पर 9 वें राष्ट्रीय शिखर सम्मेलन, 16 वें सामान्य समीक्षा मिशन रिपोर्ट, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के चार क्षेत्रीय सम्मेलन (2024-25) रिपोर्ट और गैर-संचारी रोग सम्मेलन रिपोर्ट (जनवरी 2025) पर एक कॉफी टेबल बुक भी विमोचित की।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण सचिव श्रीमती पुण्य सलिला श्रीवास्तव ने कहा कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन का राष्ट्रीय शिखर सम्मेलन समतापूर्ण, गुणवत्तापूर्ण और किफायती स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने का सशक्त माध्यम बना है। उन्होंने कहा कि राज्य पहले आयोजित किए गए कॉमन रिव्यू मिशन (सीआरएम) से सर्वोत्तम प्रचलन और ज्ञान को साझा करने में सक्षम होंगे। इससे जनभागीदारी व्यापक बनाने, संसाधनों का अनुकूलन और चुनौतियों का सामना करने में मदद मिलेगी। उन्होंने राज्यों से गुणवत्ता मानक बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित करने और उन क्षेत्रों की पहचान करने का अनुरोध किया, जहां प्रभावी सेवा वितरण के लिए अधिक संसाधनों की आवश्यकता है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली में अच्छे और अनुकरणीय प्रचलन और नवप्रवर्तन पर वार्षिक राष्ट्रीय नवप्रवर्तन शिखर सम्मेलन आयोजित करता है। इसका उद्देश्य सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौतियों से निपटने के लिए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा अपनाए गए सर्वोत्तम प्रचलनों और नवप्रवर्तनों को प्रदर्शित करना और उनको मसौदे का रूप देना है। यह राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के बीच ज्ञान साझा करने और सीखने के मंच के रूप में कार्य करता है। वर्ष 2013 में यह पहल शुरू हुई थी, जिसके बाद सात शिखर सम्मेलन आयोजित हो चुके हैं। चिंतन शिविर के साथ आठवां शिखर सम्मेलन मई 2022 में गुजरात के केवडिया में आयोजित किया गया था।
सर्वोत्तम प्रचलन पर 9वें राष्ट्रीय शिखर सम्मेलन की प्रक्रिया दिसंबर 2023 में आरंभ हुई थी। राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को एक निर्देश (डीओ संख्या एनएचएसआरसी/21-22/केएमडी/सर्वो
इसके अतिरिक्त, नवंबर 2024 में 19 राज्यों में आयोजित 16वें कॉमन रिव्यू मिशन -सीआरएम की रिपोर्ट का प्रचार-प्रसार शिखर सम्मेलन का महत्वपूर्ण हिस्सा होगा। सीआरएम में 18 नवंबर, 2024 को एक राष्ट्रीय सूचना शामिल थी, जिसके बाद 19-23 नवंबर, 2024 तक 17 राज्यों (अरुणाचल प्रदेश, असम, बिहार, छत्तीसगढ़, गुजरात, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, जम्मू और कश्मीर, कर्नाटक, त्रिपुरा, मिजोरम, ओडिशा, राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल) और 26-30 नवंबर, 2024 तक दो और राज्यों (झारखंड और महाराष्ट्र) में मौके पर पहुंचकर स्थिति का आकलन किया गया। सरकारी अधिकारियों, सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों, नागरिक समाज प्रतिनिधियों और विकास भागीदारों सहित कुल 19 टीमों ने सीआरएम में भाग लिया।
इस अवसर पर केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय में अपर सचिव एवं मिशन निदेशक- राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन श्रीमती आराधना पटनायक, केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय में संयुक्त सचिव (नीति) श्री सौरभ जैन, अपर मुख्य सचिव, प्रधान सचिव, मिशन निदेशक, राज्यों/केन्द्र शासित प्रदेशों (एनएचएम सहित) के वरिष्ठ नोडल अधिकारी तथा केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय, राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्रणाली संसाधन केन्द्र (एनएचएसआरसी) और पूर्वोत्तर राज्यों के क्षेत्रीय संसाधन केन्द्र (आरआरसी-एनई) के प्रतिनिधि उपस्थित थे।