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कांग्रेस ने ट्रंप की ‘रेसिप्रोकल टैरिफ’ की घोषणा को वैश्विक व्यापार के लिए खतरनाक करार दिया

नई दिल्ली। कांग्रेस ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनॉल्ड ट्रंप द्वारा की गई “रेसिप्रोकल टैरिफ” की घोषणा को वैश्विक व्यापार के लिए खतरनाक बताया है। पार्टी का कहना है कि यह देश और दुनिया के कारोबारी जगत के लिए अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण फैसला है। इससे अमेरिका को भी नुकसान होगा। यह सोच गलत है कि वहां कोई निर्माण क्रांति आएगी।

कांग्रेस नेता एवं पूर्व केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री आनंद शर्मा ने आज यहां पार्टी मुख्यालय में एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि दो दिन पहले अमेरिका के राष्ट्रपति ने “रेसिप्रोकल टैरिफ” की घोषणा की, जिससे पूरी दुनिया के व्यापार को चोट पहुंची है। 75 साल के बाद अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को एक फैसले ने बिखेर दिया है। जो हुआ है, वो देश औऱ दुनिया के दृष्टिकोण से दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि पिछले कई दशकों से दुनिया में निवेश के लिए सहमति बनी थी। शुल्क तथा व्यापार पर सामान्य समझौता (गैट) के अंतिम चरण के बाद विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) की स्थापना हुई, जिसमें कुछ नियमों पर सहमति बनी थी। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद ऐसा कोई फैसला नहीं हुआ, जिससे पूरी दुनिया में अनिश्चितता का माहौल बना हो। ये सिर्फ अर्थशास्त्र और व्यापार जगत तक सीमित नहीं है। देश इससे सीधे प्रभावित होते हैं, चाहे अमीर देश हों या गरीब देश हों।

उन्होंने कहा कि अमेरिका द्वारा एकतरफा फैसला थोपना भारत औऱ दुनिया के लिए बड़ी चुनौती है। “रेसिप्रोकल टैरिफ” शब्द का इस्तेमाल पहली बार किसी बड़े देश के राष्ट्रपति ने किया है। दुनिया के सभी देश अपनी आर्थिक और सामाजिक प्रगति के अलग अलग पायदान पर खड़े हैं। कुछ देश अमीर हैं, कोई इमर्जिंग इकोनॉमी कहलाता है, कुछ देश बहुत गरीब हैं और कुछ देश हैं, जिन्हें न्यूनतम विकसित देश (एलडीसी) कहा जाता है। अमेरिकी राष्ट्रपति के फ़ैसले ने एलडीसी को भी इसकी जद में ले लिया है। भारत पर भी “रेसिप्रोकल टैरिफ” का प्रभाव होगा, इस पर देश की क्या रणनीति है, उसकी अभी कोई जानकारी नहीं है।

आनंद शर्मा ने कहा कि अमेरिका के साथ भारत के कई बड़े समझौते हैं और बड़े ट्रेडिंग पार्टनर भी हैं। यह संकेत मिले हैं कि सरकार की ओर से द्विपक्षीय ट्रेड के लिए कुछ टर्म्स और रिफरेंस तैयार किए जा रहे हैं। वो क्या हैं और उसके मापदंड क्या हैं? इस पर देश को विश्वास में लेना चाहिए। बिना बताए ऐसे कोई निर्णय न हों, जिसकी कीमत लंबे समय तक देश चुकाता रहे। उन्होंने कहा कि यह बेहतर होता कि हाल ही में खत्म हुए संसद सत्र के दौरान इस बारे में सदन में सरकार की ओर से बयान आता और चर्चा की जाती। अब विपक्ष के नेताओं से मीटिंग कर सरकार बताए कि रणनीति क्या है? जो भी समझौता हो, वो संतुलित और सम्मानजनक होना चाहिए। इसके लिए नेशनल टास्क फोर्स का गठन किया जाए, जो कि अमेरिका से बातचीत का मसौदा तैयार करे और मॉनिटरिंग करे कि हमारा व्यापार किस दिशा में जा रहा है।
साभार – हिस

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