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भाजपा ने की लक्ष्मी माझी मौत मामले की सीबीआई जांच की मांग

  • भाजपा महिला मोर्चा की अध्यक्ष ने राज्य सरकार पर साधा निशाना

  • महिलाओं की असुरक्षा को लेकर उठाए सवाल

भुवनेश्वर। भाजपा की महिला मोर्चा की अध्यक्ष एस्वया बिस्वाल ने रायगड़ा के चंद्रपुर में ‘मां गृह’ की वार्डन लक्ष्मी माझी की मौत की सीबीआई जांच की मांग की है। फिलहाल इस मामले की जांच अपराध शाखा (सीबी) कर रही है। गौरतलब है कि लक्ष्मी का आधा जला हुआ शव 21 दिसंबर को चंद्रपुर अस्पताल के परिसर में मिला था। भुवनेश्वर में एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए भाजपा महिला मोर्चा की अध्यक्ष एस्वया बिस्वाल ने आरोप लगाया कि माझी की मौत को एक सप्ताह से अधिक समय बीत जाने के बावजूद पुलिस ने अभी तक शोक संतप्त परिवार को पोस्टमार्टम रिपोर्ट नहीं सौंपी है। उन्होंने चल रही जांच पर संदेह व्यक्त करते हुए कहा कि मृतक के पिता द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के बावजूद पुलिस ने मां घर चलाने वाले एनजीओ अलीशा के अध्यक्ष को गिरफ्तार नहीं किया है। उन्होंने पुलिस और राज्य सरकार पर मामले को दबाने का आरोप लगाया। भाजपा नेत्री ने कहा कि यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है कि लक्ष्मी जैसी दिब्यांग और आदिवासी महिला को अस्पताल के परिसर में ‘मार दिया गया और जला दिया गया’ जबकि किसी को भी इस तरह के वीभत्स और जघन्य अपराध के बारे में पता नहीं है।

आश्चर्य जताते हुए कि अस्पताल में ऐसी घटना कैसे हो सकती है, भाजपा नेता ने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस हत्या के रहस्य से जुड़े तथ्यों को उजागर नहीं करना चाहती है, जबकि राज्य सरकार ने सच्चाई को छिपाने के लिए ही जांच अपराध शाखा को सौंपी है। बिस्वाल ने कहा कि ऐसे तथ्यों को देखते हुए मामले की सीबीआई जांच की जरूरत है, ताकि लक्ष्मी के साथ वास्तव में क्या हुआ यह सामने आ सके। उन्होंने ओडिशा सरकार पर निशाना साधते हुए यह भी कहा कि राज्य सरकार महिलाओं का सम्मान और संरक्षक होने का दावा करती है, लेकिन ऐसी घटना इस तथ्य की ओर इशारा करती है कि ओडिशा में महिलाएं सुरक्षित नहीं हैं और समृद्ध नहीं हो पा रही हैं। उन्होंने कहा कि हम मांग करते हैं कि बीजू जनता दल (बीजद) को महिलाओं की सुरक्षा को गंभीरता से लेना चाहिए और राज्य सरकार हत्या मामले की जांच सीबीआई से कराने की अनुमति दे।

लक्ष्मी के पिता बेलधर माझी ने आरोप लगाया है कि मेरी बेटी ने अपने चचेरे भाई को बताया था कि अलीशा एनजीओ के निदेशक नरसिंह महापात्र ने उसे प्रताड़ित किया है। अस्पताल के कुछ स्टाफ ने उनके साथ बदसलूकी भी की थी। लक्ष्मी ने जनवरी, 2024 में वार्डन की नौकरी छोड़ने का फैसला किया था। इससे पहले, 21 दिसंबर को उनकी हत्या कर दी गई थी। मुझे शुरू से ही इस मामले में निदेशक की संलिप्तता का संदेह है।

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