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धान की खरीद में टोकन व्यवस्था से भारी अनियमितता, नवीन किसी मंडी पर जाकर खुद स्थिति परखें – प्रदीप पुरोहित

भुवनेश्वर. राज्य सरकार ने किसानों के आर्थिक सशक्तिकरण को लेकर किसी प्रकार की ठोस कार्रवाई नहीं की है. राज्य सरकार केवल किसानों को लेकर मगरमच्छ आंसू बहा रही है. ओडिशा में धान की न्यूनतम समर्थन मूल्य के मुद्दे पर सरकार अपने सिर से जिम्मेदारी हटाने के लिए एक गैर जिम्मेदार बयान देकर अपने कर्तव्यों की इतिश्री कर ली है. ओडिशा सरकार द्वारा राज्य कैविनेट में धान की न्यूनमत समर्थन मूल्य को दुगना करने के लिए संकल्प प्रस्ताव पारित करना व केन्द्र सरकार को पत्र लिखना किसानों को मूर्ख बनाने के अलावा कुछ भी नहीं है. भारतीय जनता पार्टी किसान मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष तथा पूर्व विधायक प्रदीप पुरोहित ने पार्टी कार्यालय में  आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में यह बात कही. उन्होंने कहा कि वर्तमान में मंडियों के जरिये किसान अपने धानों की बिक्री कर रहे हैं तथा केन्द्र सरकार धान के लिए प्रति क्विंटल 1868 रुपये राज्य के पास भेज रही है. लेकिन दुर्भाग्य की बात यह है कि मंडियों में किसानों के धान से प्रति क्विंटल 6 से 8 किलो धान काट लिया जा रहा है और किसानों का शोषण किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि राज्य में धान की खरीद के दौरान टोकन व्यवस्था में भारी अनियमितता के कारण छोटे व मध्यम किसान धान प्रति क्विंटल मध्यस्थ व दलालों को 12 सौ से 14 सौ रुपये प्रति क्विटल में बेचने के लिए मजबूर हो रहे हैं. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री लिंगराज मंदिर व बरमुंडा बस अड्डे के विकास कार्यों की समीक्षा करना स्वागतयोग्य कदम है लेकिन 70 प्रतिशत किसानों  के वोटों से निर्वाचित हुए मुख्यमंत्री नवीन पटनायक मडियों में जाकर बस्तुस्थिति का जायजा क्यों नहीं ले रहे हैं. उन्होंने कहा कि यदि किसानों के प्रति मुख्यमंत्री संवेदनशील हैं तो उन्हें कम से कम एक मंडी मे जाकर वस्तुस्थिति के बारे में जानकारी लेनी चाहिए.

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