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कम दबाव के क्षेत्र के महाचक्रवात में तब्दील होने की संभावना, ओडिशा में नहीं पड़ेगा प्रभाव

भुवनेश्वर. बंगाल की दक्षिणपूर्वी खाड़ी में बना निम्न दबाव के क्षेत्र के महाचक्रवात में तब्दील होने की संभावना है. हालांकि इसका असर ओडिशा में नहीं पड़ेगा. यह जानकारी भुवनेश्वर स्थित मौसम विभाग ने दी है. निम्न दबाव के हालात पर विवरण साझा करते हुए भुवनेश्वर मौसम विज्ञान केंद्र के निदेशक एचआर विश्वास ने बताया कि अगले पांच दिनों तक ओडिशा के जिलों में मौसम शुष्क रहने की संभावना है. अगले 4-5 दिनों के दौरान न्यूनतम तापमान (रात के तापमान) में कोई बड़ा बदलाव नहीं होगा.
इधर, भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के चक्रवात चेतावनी विभाग के अनुसार नवीनतम उपग्रह और जहाज के अवलोकन से पता चला है कि दक्षिण-पूर्व बंगाल की खाड़ी और पड़ोस में कम दबाव का क्षेत्र बन गया है. 30 नवंबर 2020 को भारतीय समयानुसार 0530 बजे बंगाल की दक्षिण-पूर्व खाड़ी में केंद्रित है, जो त्रिंकोमाली (श्रीलंका) से लगभग 750 किलोमीटर पूर्व-दक्षिणपूर्व और कन्याकुमारी (भारत) से 1150 किलोमीटर पूर्व-दक्षिण-पूर्व में है. अगले 24 घंटों के दौरान इसके और गहरे दबाव के क्षेत्र में तब्दील होने की संभावना है. इस चक्रवाती तूफान के और भी तेज होने की संभावना है. इसके पश्चिम-उत्तर-पश्चिम की ओर बढ़ने के साथ ही 2 दिसंबर की शाम के आसपास श्रीलंका तट को पार करने की बहुत संभावना है. इसके बाद 3 दिसम्बर की सुबह में कोमोरिन क्षेत्र में रहने की बहुत संभावना है. इसके परिणाम स्वरूप कुछ स्थानों पर भारी से बहुत भारी वर्षा होगी. दक्षिण तमिलनाडु और दक्षिण केरल में 2 दिसंबर 2020 को अलग—अलग स्थानों पर बहुत भारी बारिश होगी. 1, 3 और 4 दिसंबर 2020 को इन क्षेत्रों में भारी से बहुत भारी वर्षा और 1 व 4 दिसंबर के दौरान भारी वर्षा होने की संभावना है.
2 और 3 दिसंबर, 2020 के दौरान उत्तरी तमिलनाडु, पुदुचेरी, माहे और कराइकल और उत्तरी केरल में बहुत भारी वर्षा और 1 और 4 दिसंबर के दौरान भारी वर्षा होने की संभावना है. 2 और 3 तारीख के दौरान दक्षिण तटीय आंध्र प्रदेश में अलग—अलग स्थानों पर और 0 और 4 दिसंबर, 2020 के दौरान लक्षद्वीप पर भारी वर्षा होने की संभावना है.
30 नवंबर को तेज हवा की गति 45-55 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से लेकर 65 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चली. यह धीरे-धीरे बढ़ते हुए दक्षिण पूर्व में 55-65 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से 75 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से होगी. एक दिसंबर की रात से दक्षिण-पश्चिम बंगाल की खाड़ी और आसपास की 70-80 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से 90 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से होगी. पश्चिम बंगाल की खाड़ी के साथ-साथ श्रीलंका के तट पर 45-55 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवा चलेगी. कोमोरिन क्षेत्र, मन्नार की खाड़ी और तमिलनाडु और केरल में 65 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ती जाएगी और यह हलचल 2 दिसंबर से अगले 24 घंटों तक जारी रहेगी.
3 दिसंबर की सुबह और उसके बाद 55-65 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से 75 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवा चलेगी.
इस दौरान समुद्र अशांत रहेगा. पहली दिसंबर की रात से दक्षिण-पूर्व और बंगाल की दक्षिण-पश्चिम खाड़ी से सटे दक्षिण-पश्चिम की खाड़ी में तेज लहरें उठेंगी और बंगाल के दक्षिण-पश्चिम खाड़ी में 90 किमी प्रति घंटे की रफ़्तार से बहुत तेज लहरें और पूर्वी श्रीलंका तट के साथ-साथ और कोमोरिन क्षेत्र, मन्नार की खाड़ी और तमिलनाडु-केरल के तटों पर 2 दिसंबर से लगभग 24 घंटे तक तेज लहरें उठेंगी.
मन्नार की खाड़ी के ऊपर और दक्षिण तमिलनाडु और केरल के तटों के साथ, कोमोरिन क्षेत्र में 2 दिसंबर की सुबह और लक्षद्वीप-मालदीव के क्षेत्र और आसपास में 24 घंटे दक्षिण-पूर्व अरब सागर के आसपास के इलाकों में समुद्र की स्थिति बहुत खराब रहेगी. इसे देखते हुए मछुआरों को सलाह दी गई है कि वे एक दिसंबर की रात से समुद्र में जाएं. इसके अलावा जो लोग समुद्र में हैं, उन्हें तट पर लौटने की सलाह दी जाती है.

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