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अब समंदर में नहीं चलेगी चीन की दादागीरी

नई दिल्ली। बंगाल की खाड़ी में हुए चार देशों के नौसैन्य अभ्यास मालाबार-20 के पहले चरण से सकते में आये चीन को अब दूसरा झटका इसी माह फिर लगने वाला है। ​अरब सागर में 17 से 20 नवम्बर के बीच होने वाले दूसरे चरण से पहले चीन ने ऑस्ट्रेलिया को आर्थिक नुकसान की चेतावनी दी है।चार देशों के समूह ‘क्वॉड’ की सैन्य स्तर पर भागीदारी से चीन को ​सामरिक संदेश देने की कोशिश की जा रही है कि अब ​समंदर में चीन की दादागीरी नहीं चलेगी।
बंगाल की खाड़ी में तीन से छह नवम्बर के बीच भारत, जापान, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया की नौसेनाओं ने मालाबार नौसैन्य अभ्यास के 24वें संस्करण में हिस्सा लिया। चार दिनों में क्वाड समूह के चारों देशों की नौसेनाओं ने समुद्री युद्धाभ्यास के साथ ही जहाजों ने समुद्र में ईंधन भरने का अभ्यास किया। इस अभ्यास में लाइव हथियार फायरिंग, सतह, वायु-रोधी और पनडुब्बी रोधी युद्ध अभ्यास, संयुक्त युद्धाभ्यास और सामरिक प्रक्रियाओं को देखा गया। अभ्यास के लिए समुद्र में एंटी सबमरीन वारफेयर ऑपरेशंस, क्रॉस डेक लैंडिंग और सीमनशिप युद्धाभ्यास करने वाले जहाज उतरे। इस दौरान भारतीय नौसेना के फ्लीट सपोर्ट शिप आईएनएस शक्ति ने समुद्र में ईंधन भरने का अभ्यास किया। अब मालाबार नौसैन्य अभ्यास का दूसरा चरण 17 नवम्बर से अरब सागर में आयोजित किये जाने की तैयारी चल रही है।
इस नौसैन्य अभ्यास में ऑस्ट्रेलिया 13 साल बाद हिस्सा ले रहा है। ​​चार देशों के समूह ‘क्वॉड’ की सैन्य स्तर पर पहली भागीदारी से नाराज चीन ने ऑस्ट्रेलिया को आर्थिक नुकसान की चेतावनी दी है। दरअसल चीन और ऑस्ट्रेलिया के संबंधों में तभी से खटास पड़ चुकी है जब कोरोना वायरस के मामले में ऑस्ट्रेलिया की एक टीम जांच करने के लिए बीजिंग गई थी। इसीलिए इस नौसैन्य अभ्यास में ऑस्ट्रेलिया को शामिल करने पर चीन को सबसे ज्यादा ऐतराज है। मालाबार नौसैनिक अभ्यास को लेकर चीन का मानना है कि इस बहाने उसके खिलाफ सैन्य लामबंदी की जा रही है। मालाबार अभ्यास के जरिये भारतीय नौसेना चीन को ​​सामरिक संदेश देने की कोशिश कर रही है कि वह केवल हिन्द महासागर तक ही खुद को सीमित नहीं रखना चाहती है बल्कि दक्षिण चीन सागर के पार प्रशांत महासागर तक पहुंचने की भी उसकी क्षमता है और ​​समंदर में चीन की दादागीरी नहीं चलेगी।
अरब सागर में होने वाले मालाबार-20 के दूसरे चरण में भारतीय नौसेना के ध्वजवाहक विक्रमादित्य, अमेरिकी सुपर वाहक निमित्ज़ के अलावा ऑस्ट्रेलियाई और जापानी नौसैनिकों के दो विध्वंसक अभ्यास करेंगे। आईएनएस विक्रमादित्य पर मिग-29 और यूएसएस निमित्ज़ पर एफ-18 लड़ाकू विमान युद्ध के खेल में भाग लेंगे। चार देशों के बीच होने वाला यह अभ्यास पूरे डोमेन बहु-संचालन को मजबूत करेगा। यह अभ्यास सभी चार देशों को एक-दूसरे की नौसेनाओं, कमांडरों और कर्मियों के प्रशिक्षण के स्तर को समझने का बेहतर मौका है। यह अभ्यास अरब सागर क्षेत्र में गश्त करने वाले कम से कम 70 विदेशी युद्धपोतों की भीड़भाड़ वाले वातावरण में होगा। हालांकि चीनी नौसेना के युद्धपोत आसपास के क्षेत्र में नहीं हैं लेकिन बहुत दूर भी नहीं हैं। चीनी युद्धपोत अदन की खाड़ी से ही समुद्री डाकू विरोधी संचालन कर रहे हैं।
साभार-​हिस

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