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दुनिया में खेती का ब्रांड अंबेसडर बन रहा ओडिशा, मुख्यमंत्री के बाद एक और विधायक खेतों में जोतते हैं हल

  • खेती की परंपरा का जुड़ाव है विधानसभा से

  • साल में दो महीने खेती का काम कर लोगों को कृषि के लिए प्रोत्साहित करते हैं ओडिशा डाबुगां के विधायक

  • उपराष्ट्रपति वेंकेया नाइडू, मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने ट्वीट कर विधायक के कार्यों सराहा, बताया अनुकरणीय

  • विधायक ने कहा- खेती मेरी जीविका और धर्म है, खेती करने से मिलती है आत्म संतुष्टि

रिपोर्ट-शेषनाथ राय, संपादन- हेमन्त कुमार तिवारी, भुवनेश्वर

देश में हॉकी का प्रायोजक बन और अपदा प्रबंधन को लेकर में पूरी दुनिया में अपना लोहा मनवा चुका ओडिशा प्रांत अब विश्व को खेती की तरफ मोड़ने के लिए प्रेरित कर रहा है. एक तरह से यह कृषि क्षेत्र के लिए भी ब्रांड अंबेसडर बन रहा है. अक्सर आप विदेशों के प्रतिनिधियों को सामान्य जीवन जीते हुए सोशल मीडिया पर देखे होंगे, लेकिन अब आपको भी गौरव करने का मौका दे रहे हैं ओडिशा के जनप्रतिनिधि.

जी हां! ओडिशा में खेती करने की परंपराओं का निर्वहन करने वाले  मुख्यमंत्री के बाद  एक ऐसे जनप्रतिनिधि का एक अनोखा स्वरूप देखने को मिला है, जो खेतों में लगी लेव में सनकर अपने आपको गौरान्वित महसूस कर रहा है. इस जनप्रतिनिधि को विधायक होने का जितना गर्व है, उससे अधिक कहीं एक किसान होने पर अपना सीना चौड़ा मानते हैं. इनका जनप्रतिनिधि होना यदि कर्म है, तो खेती इनकी जीविका और धर्म है.

हम बात कर रहे हैं ओडिशा के नवरंगपुर जिले के डाबुगां विधानसभा क्षेत्र के बीजू जनता दल के विधायक मनोहर रंधारी की. कोरोना के कारण पूरी दुनिया परेशान है. अनलाक की प्रक्रिया शुरू होने के बावजूद सब कुछ बंद सा ही है. दिल में डर और दिमाग में बेचैनी है. बहुत जरूरी ना हो तो घर से बाहर निकलने पर पाबंदी है. इन परिस्थितियों में नवरंगपुर जिले के डाबुगां विधानसभा क्षेत्र के बीजू जनता दल के विधायक मनोहर रंधारी ने घर में बैठकर समय बर्बाद करने के बदले नियमित खेतों में जाकर खेती का काम कर रहे हैं.

खेती का कार्य करने के लिए सरकार ने भी अनुमति दी हुई है. विधायक की खेती करने का वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया में वायरल हो रहा है. इसे देखकर उपराष्ट्रपति वैंकेया नाइडू, मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने ट्वीट कर उनकी सराहना की है. उपराष्ट्रपति वेंकेया नाइडू एवं मुख्यमंत्री नवीन पटनायक के ट्वीट करने के बाद से ही विधायक रंधारी को बधाई देने वालों का वालों का तांता लगा हुआ है.

उपराष्ट्रपति ने अपने ट्वीट में लिखा

प्रेरणास्पद! ओडिशा के विधायक मनोहर रंधारी साल में दो महीने खेतों में मेहनत करते हैं. उनका कहना है कि युवाओं को खेतों में काम करने में शर्माना या हिचकना नहीं चाहिए.

मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने ट्वीट कर लिखा

विधायक साल में दो महीने में खेतों में काम कर हमारी युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा का काम कर रहे हैं. अन्य लोगों को भी तीन बार रहे इस विधायक के कार्य का अनुकरण करना चाहिए.

खेती से मुझे मिलती है आत्म संतुष्टि व खुशी

खेती करने से मुझे आत्म संतुष्टि मिलती है, खुशी मिलती है. मैं पिछले तीन बार से लगातार विधायक बनकर लोगों की सेवा कर रहा हूं, मगर अपनी जीविका एवं धर्म से कभी अलग न हुआ हूं और ना ही कभी अलग होना है. बचपन से ही मैं खेतों में जाकर खेती करना सीखा है और आज भी पारंपरिक एवं आधुनिक तरीके से खेती करता हूं. खेत जोतने के साथ धान की रूपाई करता हूं, मक्के की खेती करता हूं.

कमर के नीचे लुंगी और गमछे की पगड़ी जोड़ती है माटी से

सुबह होते ही नित्य कार्य का संपादन करने के बाद सामन्य किसान की तरह लुंगी पहनकर तथा सिर पर गमछे की पगड़ी बांधकर विधायक अपने खेतों में चले जाते हैं और अन्य लोगों के साथ मिलकर काम में लग जाते हैं. धान की रूपाई का समय चल रहा है. ऐसे में खेतों में कार्य की निगरानी करने के साथ ही विधायक ने खुद खेत में धान रूपाई करने में लग जाते हैं. इस संदर्भ में विधायक मनोहर रंधारी ने बताया कि मैं राजनीति में लोगों की सेवा करने के लिए आया हूं. लोगों की सेवा करने के साथ ही खेती का कार्य मेरी जीविका है.

खेतिहर परिवार और 25 एकड़ है जमीन

विधायक के पास 25 एकड़ जमीन है. उनके पिता जी एवं दादा जी भी खेती करते थे. बचपन से ही वह खेती करते आ रहे हैं. उन्होंने कहा कि बचपन में मैंने अपने पिता एवं दादा जी से जो सीखा था वह आज करता हूं. हर साल मैं धान के मौसम में धान की खेती करने के साथ ही मक्के की खेती करता हूं.

आधुनिकी तकनीकी का प्रयोग कर युवा वर्ग को खेती करने की भी सलाह

विधायक ने आधुनिकी तकनीकी का प्रयोग कर युवा वर्ग को खेती करने की भी सलाह दी है. खेती से जो कमाई होती है, उसे लोगों में ही खर्च कर देता हूं. हर दिन हमारे यहां आज भी 100 से 200 लोग भोजन करते हैं.

बचपन से है खेती का शौक

विधायक मनोहर रंधारी ने बताया कि खेती एवं लोगों की सेवा करने शौक मेरा बचपन से रहा है. पढ़ाई खत्म करने के बाद जब 1997 में मुझे रेवन्यु विभाग में क्लर्क की नौकरी मिली. नौकरी से जो पैसा मिलता था, उससे मैं समाज सेवा कार्य करने लगा. उस समय लोगों को हमारे क्षेत्र में दो वक्त की रोटी लोगों को आसानी से नसीब नहीं होती थी. ऐसे में वेतन से जो बच रहा था, उसे लोगों की सेवा में लगा दे रहा था. किसी के बच्चे को पढ़ाई के लिए फीसे के पैसे की जरूरत है, कापी-किताब की जरूरत है, उसे पूरा करने का मेरा पूरा प्रयास रहता था. इस दौरान मैं आदिवासी विकास परिषद का अध्यक्ष, दलित विकास परिषद का सचिव, भत्रा समाज का सचिव बना.

शराब मुक्ति आन्दोलन ने पहुंचाया विधानसभा

उन्होंने कहा कि हमने अपने क्षेत्र में शराब मुक्ति आन्दोलन चलाया, जिससे लोगों को लाभ हुआ. इसी बीच लोगों ने जनप्रतिनिधि बनने की मांग करने लगे और फिर मैं 2009 एवं 2014 में बीजू जनता दल से नवरंगपुर विधानसभा क्षेत्र विधायक बना. 2019 में डाबूगां विधानसभा क्षेत्र की सेवा करने का मौका मुख्यमंत्री एवं लोगों ने दिया और यहां इस क्षेत्र की सेवा कर रहा हूं.

हमारा क्षेत्र आज भी कई मामले में पीछे है

विधायक ने कहा कि किसी भी क्षेत्र का विकास शिक्षा के जरिए सम्भव है. ऐसे में मैं लोगों को शिक्षा के लिए प्रेरित करता हूं. आज भी हमारा क्षेत्र विकास के लहजे से कई मायने में पीछे है. खासर इलाके में इरिगेशन एवं फूड प्रोसेसिंग यूनिट यदि बन जाती, तो इलाके का भला हो जाता है, जिसके प्रयास में लगा हुआ हूं. उन्होंने अपने क्षेत्र में धान प्रोसेसिंग यूनिट खोलने की भी मांग की है, ताकि इसका सीधा फायदा किसानों को मिल सके. आज भी लोगों के पास पक्का घर नहीं है, सबको शुद्ध पेयजल नहीं मिल पा रहा है, जिसके लिए मै नियमित प्रयास में लगा हूं. विधायक ने कहा कि हमारा प्रयास है शिल्प आधारित खेती के लिए लोगों को प्रोत्साहित करना, जिस पर मैं नियमित काम कर रहा हूं।

अक्षय तृतीया के दिन मुख्यमंत्री भी जोतते हैं हल

ओडिशा विधानसभा का खेती से पुराना संबंध रहा है. हर साल अक्षय तृतीया के दिन परंपराओं का निर्वहन करते हुए प्रदेश के मुख्यमंत्री के साथ जनप्रतिनिधि खेतों में हल जोतने के बाद बीजारोपण करते हैं. इस परंपरा का निर्वहन मुख्यमंत्री नवीन पटनायक भी करते आ रहे हैं. इस दौरान समृद्ध खेती की कामना की जाती है.

कृषि के लिए अलग से है बजट का प्रावधान

ओडिशा में खेती को एक उच्च दर्जा प्राप्त है. इस क्षेत्र के लिए हर साल एक अलग से बजट पेश किया जाता है. इसके लिए तरह-तरह की योजनाएं लायी जाती हैं तथा खेती को बढ़ावा दिया जाता है.

खेती को प्रोत्साहन

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