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अमरजीत हादसा दबाने का हुआ प्रयास, अनुभवहीन नेतृ्त्व बना कारण!

-आयोजन समिति के चयन पर भी सवालिया निशान, किसकी अनुमति या सहमति पर बनी कमेटी?

-घाट परिवर्तन पर भी उठ रहे हैं सवाल

-प्रशासन के पास नहीं है पूरी व्यवस्था, समिति को सजग रहना चाहिए था – पूर्व प्रशासनिक अधिकारी

अमरजीत साह

भुवनेश्वर-छठ के दिन कुआखाई नदी में डूबने से हुई अमरजीत की मौत की घटना को शुरू-शुरू में दबाने का भरपूर प्रयास किया गया, लेकिन वह विफल रहा। यह खुलासा वहां मौजूद कुछ लोगों ने किया है। मीडिया में मामला छाने के बाद एक के बाद एक करके घटना से जुड़े तथ्य सामने आने लगे हैं। सूत्रों ने बताया कि बच्चे के डूबने के एक घंटे बाद उसका शऱीर मिला। उसके बाद बच्चे को हाईटेक अस्पताल भेजा गया, जहां उसे मृत घोषित करके कैपिटल अस्पताल रेफर कर दिया गया। इससे पूर्व घाट पर मामले को छुपाने का प्रयास किया गया। कुछ समय इसमें भी व्यतीत हुआ।

सूत्रों ने कहा कि आयोजन समिति में अनुभवहीनता भी हादसे के लिए कहीं  न कहीं जिम्मेदार है। संगठन के सूत्रों ने तो आयोजन समिति के चयन पर प्रश्न चिह्न उठा दिया है। कइयों को तो यह भी पता नहीं है कि आयोजन समिति के पदाधिकारियों का चयन कब और किन-किन सदस्यों और पदाधिकारियों की अनुमति या सहमति से किया गया। बताया गया है कि हर साल नदी में खतरे से अवगत कराने के लिए बांस का घेरा लाल रंग के कपड़े के साथ लगाया जाता था और एक-दो नावों को सुरक्षा के मद्देनजर रखा जाता था, लेकिन इस बार ऐसा नहीं किया गया। हर साल प्रशासनिक अनुमति लेने के बाद भी यह सब आयोजन समिति की तरफ से किया जाता था, जो इस बार आयोजन समिति ने नहीं किया। इतना ही नहीं, वहां पर्याप्त मात्रा में व्यवस्था भी नहीं थी। हर साल लगभग दो सौ कुर्सियां रखी जाती थीं, जिसकी संख्या इसबार 20-25 के आसपास रही। घाट परिवर्तन पर भी सवाल उठने लगा है।

सुरक्षा व्यवस्था को लेकर हमारी टीम ने प्रशासनिक स्तर पर जानकारी हासिल करने का प्रयास किया तो एक पूर्व वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी ने बताया कि इस हादसे को रोकने में प्रशासन और आयोजन समिति दोनों ही विफल रहे हैं। प्रशासन के पास इस तरह के आयोजन के दौरान उपयोग में लाने वाले संशाधनों की कमी है। पूर्व वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी ने बताया कि पुरी में विश्व विख्यात समुद्र तट है, जहां अक्सर पर्यटकों के डूबने की खबर आती रहती है। वहां भी कोई ठोक व्यवस्था नहीं की जा सकी है। हालांकि इससे संबंधित कई प्रस्ताव सरकार के पास मिलते रहते हैं। उन्होंने कहा कि प्रशासन के पास व्यवस्था नहीं होने का यह मतलब नहीं कि आयोजन समिति सिर्फ यह मानकर इतिश्री समझे कि उसने आयोजन के लिए प्रशासन से अनुमति ले ली है। समिति को भी अपने स्तर पर अतिरिक्त ऐहतिहाती व्यवस्थाओं को अपनाना चाहिए। पूर्व वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी ने बताया कि आयोजन के लिए अनुमति लोगों को एक जगह जमा होने के लिए होती है। पुलिस द्वारा यातायात की व्यवस्था नियंत्रित करनी होती है। किन्तु नदी में डूबने से रोकने के लिए पुलिस के पास साधन नहीं है। पुरी समुद्र तट पर भी कई व्यक्ति नहाते समय डूब जाते हैं। पूर्व मुख्य सचिव के पुत्र की भी मृत्यु हुई थी। अभी तक वहाँ की कोई व्यवस्था नहीं हुई है। बालियात्रा में फायर सर्विस की टीम रहती है। उनके पास लाइफ जैकेट आदि रहते हैं। ओडिशा में पुलिस का एक विशेष विभाग है ODRAF Odisha Disaster Rapid Action Force. उनके पास भी यह व्यवस्था है। पर छठ में भी ऐसा हो सकता है, इसकी आशा नहीं रही होगी। लोग किनारे पर ही अर्घ्य देते हैं। बीच में तैरने का कोई नियम या परम्परा नहीं है।

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