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एक पुलिस अधिकारी और समाजसेवी हैं एसीपी एसके शरीफउद्दीन

  • कोरोना काल में किये गये सेवा कार्य ने जीता कटक के लोगों का दिल

  • कोरोना संकट में समाजसेवी संस्थाओं को प्रोत्साहित करते हुए जनसेवा में खुद भी जुटे हैं

शैलेश कुमार वर्मा, कटक

कहा जाता है कि जिसके अंदर माता-पिता का संस्कार और गुरु का आशीर्वाद प्राप्त हो, तो वह हर मुकाम को हासिल कर सकता है. हम बात कर रहे हैं पुलिस विभाग कटक जोन-2 के एसीपी एसके शरीफउद्दीन की. इनके अंदर प्रशासनिक सेवा से लेकर समाजसेवा करने की क्षमता कूट-कूटकर भरी है.

एक पुलिस अधिकारी और समाजसेवी हैं एसीपी एसके शरीफउद्दीन. इन तीन महीनों में कोरोना काल में एसीपी एसके शरीफउद्दीन की जनसेवा की कई तस्वीरें सामने देखने को मिली है. इन्होंने कई समाजसेवी संगठनों एवं समाजसेवियों को प्रोत्साहन देते हुए सहयोग का हाथ बढ़ाया. उन्होंने अपने अधिकारी यानी कटक के डीसीपी अखिलेश्वर सिंह के नेतृत्व में एवं उनके दिशा निर्देशों का पालन करते हुए प्रशासनिक सेवा के साथ-साथ समाजसेवा भी बढ़कर की.

उन्होंने कहा कि सबसे बड़ी चुनौती उस समय थी, जब कटक में लॉकडाउन और शटडाउन दोनों परिस्थितियों में मजदूर वर्ग जो प्रतिदिन मजदूरी करके अपने परिवार का पालन पोषण करता है, उन मजदूरों को किसी प्रकार की कठिनाई न हो, कोई भूखे ना सोए. उसके लिए उन्होंने 50 से अधिक समाज सेवक एवं समाज सेविकाओं को लेकर इन गरीब असहाय लोगों का ख्याल रखा. उन्होंने अपनी टीम को लेकर मनी साहू चौक, बक्सी बाजार में लगभग तीन महीने तक खाने की व्यवस्था की. केशरपुर, घमरिया, कदम रसूल एरिया में 3000 से ज्यादा लोगों को एक महीने का राशन उपलब्ध करवाया. इतना ही नहीं, बिहार यूपी के मजदूर लोग जो फंस गए थे, उनकी देखरेख की गई. एक समय ऐसा आया कि लगभग 300 भूखे असहाय लोगों को उन्होंने अपने वेतन के पैसों से उनके खाने-पीने का इंतजाम किया.

अपने सरकारी वाहन में चलते-फिरते कुछ लोगों के लिए हरदम खाद्य पदार्थ को रखकर गरीब, रिक्शा चालक आदि को खाद्य का पैकेट वितरण किया. इतना ही नहीं, उन्होंने मानवता दिखाते हुए अपने फर्ज को निभाते हुए सीटी मेडिकल से डिस्चार्ज हुई महिला जो तीन दिन पूर्व एक बच्चे को जन्म थी, उसके लिए खाने-पीने का कुछ इंतजाम नहीं था. जब इनके सामने वह महिला आई एसीपी ने तुरंत उन महिला के लिए एक महीने का राशन की व्यवस्था करते हुए अपने सरकारी वाहन में उनको घर तक पहुंचाया. एनएच से अप्रवासी मजदूर जो अपने गांव की ओर लौट रहे थे, उन मजदूरों की पीड़ा को देखते हुए करीब 200 मजदूरों के लिए चप्पलों का इंतजाम किया. कुछ मजदूरों के पैरों में छाले पड़ गए थे, उन छालों को देखकर एसीपी के आंखें नम हो गईं थीं.

शटडाउन के दौरान कदम रसूल बस्ती के अंदर नालों की अवस्था एवं उसके ऊपर सैलेब नहीं होने के कारण बस्ती वालों को जो कठिनाई हो रही थी, उनकी कठिनाई को देखते हुए उन्होंने सीएमसी कमिश्नर को कह कर वहां की साफ-सफाई करवायी. नए सेलेब रखवाया एवं कुछ वोलेंटियर को उसकी देखरेख की जिम्मेदारी दी गई. कदम रसूल में जो कब्रिस्तान है, उसकी स्थिति बद से बदतर थी. उस कब्रिस्तान को साफ-सफाई कर वहां की स्थिति अच्छी करवाई. एसीपी एसके शरीफउद्दीन 1989 में कटक के मधुपटना थाने में सब-इंस्पेक्टर के पद पर कार्यभार संभालते हुए आज 31 वर्षों में वह एसीपी के पद पर रहकर सेवा दे रहे हैं.

उन्होंने कहा कि 1992 में बाबरी मस्जिद कांड को लेकर कटक में हिंदू मुस्लिम राइट हुई थी. उस समय भी वह बाल-बाल बच गए, लेकिन शांति व्यवस्था कायम रखने से वह पीछे नहीं हटे. आज कटक की जनता का उन्हें प्यार और स्नेह प्राप्त है. सेवा कार्य ने सबका दिल जीत लिया है. उनकी शिक्षा-दीक्षा ओडिशा के शांति निकेतन कहे जाने वाला मालती चौधरी बाजीराउत छात्रावास जो अनुगूल में स्थित है, वहीं से शुरुआत हुई और वहीं से उनकी समाज सेवा का रास्ता भी चुना. वह अपना आदर्श ओडिशा के प्रथम मुख्यमंत्री नवकृष्ण चौधरी एवं उनकी धर्मपत्नी मालती चौधरी को मानते हैं, जो प्रख्यात स्वतंत्रता संग्रामी के साथ-साथ समाज सुधारक भी थे.

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