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केंद्रीय मंत्री प्रताप षाड़ंगी होमक्वारेंटाइन, और कई नेता जा सकते हैं क्वारेंटाइन में

  • बालेश्वर के कोविद पाजिटिव विधायक के संपर्क में आये थे

  • स्वर्गीय विधायक की श्रद्धांजलि सभा में शामिल हुए थे कोविद पाजिटिव विधायक

  • और भी कई नेताओं के होमक्वारेंटाइन जाने की संभावना

गोविंद राठी, बालेश्वर

केंद्रीय मंत्री और बालेश्वर के सांसद प्रताप षाड़ंगी होमक्वारेंटाइन हो गये हैं. उन्होंने यह जानकारी ट्वीट कर दी है. उन्होंने ट्वीट किया है कि जिले के नीलगिरि के विधायक सुकांत नायक के साथ मैंने दो और तीन जुलाई एक सरकारी कार्यक्रम और स्वर्गीय विधायक की श्रद्धांजलि सभा में मंच साझा किया था. अब पता चला है कि विधायक कोविद पाजिटिव पाये गये हैं. इसलिए मैं दिल्ली स्थित आधिकारिक आवास में कोविद-19 नियमों के अनुसार होमक्वारेंटाइन हो गया हूं. फिलहाल मैं स्वस्थ हूं.

बालेश्वर के स्वर्गीय विधायक की श्रद्धांजलि सभा में शामिल नेतागण की फाइल फोटो.

उल्लेखनीय है कि बालेश्वर में आयोजित स्वर्गीय विधायक की श्रद्धांजलि सभा में राजधानी भुवनेश्वर से लेकर स्थानीय और आस-पास के कई विधायक, वरिष्ठ नेता और कार्यकर्ता शामिल हुए थे. इसमें केंद्रीय मंत्री प्रताप षाड़ंगी भी शामिल हुए थे. विधायक के पाजिटिव पाये जाने के बाद उस सभा में शामिल होने वाले लोगों में से केंद्रीय मंत्री पहले व्यक्ति हैं, जिन्होंने कोविद-19 के नियमों का पालन करते हुए खुदको होमक्वारेंटाइन किया है.

बालेश्वर के स्वर्गीय विधायक की श्रद्धांजलि सभा में शामिल अतिथियों की फाइल फोटो.

कोविद-19 के नियमों के अनुसार पाजिटिव व्यक्ति के संपर्क में आने वालों को होमक्वारेंटाइन या पेड क्वारेंटाइन में रहना पड़ता है. इस नियम के तहत उम्मीद है कि इस श्रद्धांजलि और सरकारी कार्यक्रम में शामिल होने वाले अन्य कई दिग्गज नेता और विधायक क्वारेंटाइन में जा सकते हैं.

श्रद्धांजलि सभा की अनुमति किसने दी ?

नीलगिरि के विधायक के कोरोना पाजिटिव पाये जाने के बाद केंद्रीय मंत्री  प्रताप षाड़ंगी के होमक्वारेंटाइन की घोषणा के बाद लोगों ने सवाल उठाना शुरू कर दिया है कि राज्य में किसी भी प्रकार के आयोजन पर प्रतिबंध है, तो इस श्रद्धांजलि सभा की अनुमति किसने प्रदान की. भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा के लिए मामला सुप्रीम कोर्ट जा पहुंचा.

लोगों ने प्रशासन पर दोहरी नीति अपनाने का आरोप भी लगाया है. लोगों का कहना है कि सारे नियम कायदे सिर्फ आम जनता के लिए लागू किये जाते हैं. सवाल यह भी उठाया जा रहा है कि क्या किसी आम आदमी की मौत होती तो उसे इतने बड़े पैमाने पर श्रद्धांजलि सभा आयोजित करने की छूट दी जाती. शादी-विवाह के मौके पर सिर्फ 50 लोगों की छूट दी जा रही है. अगर सेहत का हवाला दिया जा रहा है, तो नेताओं की सेहत का ध्यान क्यों नहीं दिया जाता है. क्या इनकी सेहत आम आदमी से अलग होती है.

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