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वाणिज्यिक खनन से कोल इंडिया के भविष्य पर कोई खतरा नहीं : कोल इंडिया प्रमुख

सम्‍बलपुर – कोल इंडिया के अध्‍यक्ष श्री प्रमोद अग्रवाल ने बृहस्पतिवार को कहा कि वाणिज्यिक खनन के लिए उसके किसी भी कोयला ब्लॉक को देने का कोई प्रस्ताव नहीं है। इसलिए कंपनी ‘पूरी तरह मजबूत और सुरक्षित’ है। उनका यह बयान कोयला खनन को निजी क्षेत्र के लिए खोलने के संदर्भ में आया है। महारात्न कंपनी कोल इंडिया के अध्‍यक्ष श्री अग्रवाल ने कहा कि कोल इंडिया के भविष्य को लेकर ‘बेवजह की चिंता’ की जा रही है। कंपनी ‘मजबूत और पूरी तरह सुरक्षित’ है। कंपनी के किसी भी कोयला ब्लॉक को वाणिज्यिक खनन के लिए देने का प्रस्ताव नहीं है । कोल इंडिया ने एक बयान में कहा कि प्रतिस्पर्धा के माहौल में वाणिज्यिक रूप से कंपनी को परिचालन में बनाए रखने के लिए उसके पास पर्याप्त मात्रा में कोयला ब्लॉक  हैं ।

कोल इंडिया के अधिकार क्षेत्र में 447 कोयला ब्लॉक हैं। इनमें से अधिकांश की जांच-परख कर ली गई है। इसके अलावा कोल इंडिया को कोयला खान (विशेष प्रावधान) अधिनियम के तहत 10 और खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम के तहत छह अन्य कोयला ब्लॉक और आवंटित किए गए हैं। इसके दम पर कोल इंडिया के पास देश में सबसे अधिक कोयला भंडार है । इन सभी 463 कोयला ब्लॉक की कुल क्षमता 170 अरब टन है । कंपनी को बाद में दिए गए 16 ब्लॉक में से प्रत्येक की न्यूनतम वार्षिक उत्पादन क्षमता एक करोड़ टन है। इनकी उच्चतम वार्षिक उत्पादन क्षमता 26.4 करोड़ टन है। मौजूदा उत्पादन दर और भविष्य की वृद्धि के अनुमान को मिलाकर कोल इंडिया देश में बढ़ती कोयले की मांग को पूरा करने के लिए विस्तार करती रहेगी।

उत्पादन की वर्तमान रेट और आने वाले वर्षों में अनुमानित वृद्धि को ध्यान में रखते हुए, सीआईएल देश की अत्‍याधिक कोयला मांग के अनुरूप उत्पादन करने और ईंधन देने में सक्षम होने के साथ साथ निकट भविष्य में बहुत हद तक लक्ष्‍य को हासिल करने में संभव होगा । कोल इण्डिया को 2023-24 तक 1 बिलियन टन कोयले का उत्पादन और आपूर्ति करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है और आगे वृद्धि करने का भी लक्ष्‍य रखा गया है।

अपने स्वयं के इन-हाउस कंसल्टेंसी आर्म के साथ, चार दशकों की विशेषज्ञता के साथ सेंट्रल माइन प्लानिंग एंड डिजाइन इन्स्टीच्यूट(सीएमपीडीआई) सीआईएल के पास है । अन्वेषण, खान नियोजन, डिजाइन, बुनियादी ढांचा इंजीनियरिंग, पर्यावरण प्रबंधन आदि महत्‍वपूर्ण बिंदुओं के साथ, सीआईएल को बढत देने वाले अधिकांश कोयला खनन मुद्दे  हैं।  इसके अलावा, कोल इण्डिया  में बहु-विषयक पेशेवरों का प्रतिभाशाली व्‍यक्तित्‍व के कार्मिक भी मौजूद है। “कोयले की घरेलू मांग स्वदेशी उत्पादन से आगे निकल रही है । परिणाम स्‍वरूप इसकी पूर्ति कोयला आयात के माध्‍यम से की जाती है।

कंपनी की एक अधिकारी ने कहा कि यदि वाणिज्यिक खनन इस अन्‍तर को पूरा करने के लिए कदम बढाता है तो कुछ हद तक आयात कम जाएगा । लेकिन उनकी मौजूदगी से कोल इण्डिया की स्थिति पर कोई प्रभाव नहीं पडता है, क्‍योंकि कोल इण्डिया कंपनी पूरी तरह मजबूत है एवं विस्‍तार करने की क्षमता रखता है । देश ने 2019-20 में 247 एमटी कोयले का आयात किया था, जिसमें से 52एमटी कुकिंग कोयला और बाकी 195एमटी गैर-कोकिंग कोयला था। सीआईएल परिचालन में अपनी दक्षता बढ़ा रहा है। संबंधित राज्य और केंद्रीय निकायों के साथ उचित तालमेल रखते हुए कंपनी के विभिन्‍न महत्‍वपूर्ण मुद्दों को हल करने के लिए प्रयास किया जाता है जिससे कंपनी की कोयला उत्‍पादन एवं आपूर्ति बढाने में सक्षम हो सकेंगे ।

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