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सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार आयोजित निकाली गयी रथयात्रा

  • भक्तों ने टेलीविजन के जरिये रथयात्रा में महाप्रभु के दर्शन किये


पुरी. आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष द्वितीया तिथि पर रथयात्रा के अवसर पर पुरी के श्रीजगन्नाथ मंदिर से महाप्रभु श्री जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्र अपने भक्तों को दर्शन देने के लिए बाहर निकले. इतिहास में पहली बार ऐसा हो रहा है कि बिना भक्तों की रथयात्रा का आयोजन किया जा रहा है. कोविद-19 की स्थिति को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के अनुसार इस रथयात्रा का आयोजन हुआ. इसमें श्रद्धालु नहीं थे, केवल सेवायत व सुरक्षाकर्मी ही थे.

श्रद्धालुओं ने टेलीविजन के जरिये रथयात्रा में महाप्रभु के दर्शन किये, जबकि जब भी रथयात्रा निकली है लाखों श्रद्धालु शामिल होते थे. आज सुबह तीन बजे से मंगल आरती के साथ रथयात्रा की नीति शुरू हुई. इसके बाद मइलन, तडपलागी, रोष होम व इसके बाद अवकाश नीति आयोजित की गयी. इसके बाद सूर्य पूजा, द्वारपाल पूजा हुई.

फिर गोपालबल्लभ भोग व खिचड़ी भोग किया गया. श्रीमंदिर के पुरोहितों ने सिंहद्वार के सम्मुख खड़े तीनों रथों की प्रतिष्ठा की. महाप्रभु को मंगलार्पण किये जाने के बाद धाड़ी पहंडी की प्रक्रिया शुरु हुई. तीनों भगवान धाड़ी पहंडी के जरिये अपने-अपने रथों तक आये.

सबसे पहले चक्र राज सुदर्शन व देवी सुभद्रा को पहंडी कर उनके रथ दर्पदलन में आरुढ़ करवाया गया. इसके बाद भगवान बलभद्र धाडी पहंडी के जरिये अपने रथ तालध्वज में आरुढ़ हुए. सबसे अंत में भगवान जगन्नाथ पहंडी के जरिये उनके रथ नंदीघोष में आरुढ़ हुए.


भगवान श्री जगन्नाथ, बलभद्र व देवी सुभद्रा के रथारुढ़ होने के बाद पुरी के गोवर्धन पीठ के शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती ने तीनों रथों पर जाकर भगवान के दर्शन किये. उनके साथ उनके शिष्यों ने भी दर्शन किये.

इसके बाद की रीति-नीति का अनुपालन होने के पश्चात पुरी के गजपति महाराज दिव्य सिंहदेव जो भगवान जगन्नाथ के आद्य सेवक माने जाते हैं, वह राजनअर ( राजप्रासाद) से यहां पहुंचे तथा तीनों रथों पर छेरा पहँरा की नीति संपन्न की. इसके बाद रथों को खिंचने की प्रक्रिया शुरु हुई. सबसे पहले भगवान बलभद्र की रथ तालध्वज को खिंचने की प्रक्रिया शुरु हुई. इसके बाद देवी सुभद्रा की दर्पदलन व सबसे अंत में महाप्रभु श्रीजगन्नाथ के नंदीघोष रथ को खिंचा गया.

शंकराचार्य ने किया रथों पर किया भगवान का दर्शन
पहंडी बिजे के बाद भगवान जगन्नाथ, बलभद्र व देवी सुभद्रा के रथारुढ़ होने के बाद पुरी के गोवर्धन पीठ के शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती ने तीनों रथों पर जाकर भगवान के दर्शन किये. उनके साथ उनके शिष्यों ने भी दर्शन किये. पहली बार उनका वाहन सीधे रथ के करीब पहुंच पाया था. भीड़ नहीं होने के कारण वह सीधे रथ के पास पहुंचे और देवों के दर्शन किये.

पुरी में प्रभावी रहा शटडाउन
सुप्रीमकोर्ट के निर्देश के अनुसार प्रशासन ने इस रथयात्रा को भक्त शून्य करने के लिए पुरी जिले को सोमवार रात से शटडाउन ( कर्फ्यु जैसी) घोषणा की थी जो बुधवार दोपहर 12 बजे तक रहेगी. पुरी पहुंचने के सभी मार्गों को सील कर दिया गया है. इसके लिए 50 प्लानुट फोर्स तैनात किये गये हैं. पुरी में शटडाउन के कारण सन्नाटा पसरा रहा. बाहरी लोगों के जिले में प्रवेश पर रोक लगा दी गयी थी.

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