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कोरोना को मारने के लिए पहले डर को मारिए – डॉ पटनायक

  •  डरने से शरीर की प्रतिरोधक क्षमता होती है कम

  •  कहा-जो डर गया समझो मर गया

  •  अप्रवासी लोगों से सीख लेने की दी सलाह

  •  अधिक संक्रमित होने के बावजूद वे स्वस्थ होकर लौट रहे हैं घरों को

  •  बोले-कोविद-19 के नियमों के पालन से कोरोना नहीं आयेगा पास

 

हेमन्त कुमार तिवारी, कटक. कोरोना महामारी को लेकर व्याप्त भय के बीच ओडिशा के सबसे बड़े अस्पताल श्रीराम चंद्र भंज मेडिकल कालेज व अस्पताल के अधीक्षक डॉ अनादा पटनायक ने लोगों को इससे लड़ने का मंत्र देते हुए कहा कि इस महामारी को मारने के लिए पहले आप अपने अंदर छुपे डर को मारिए. उन्होंने कहा कि जो डर गया, समझो मर गया. यह कहावत भारत में प्रचलित है. इसलिए कोरोना बीमारी से भयभती होने की जरूरत नहीं है.
उन्होंने बताया कि यदि आप डरते हैं तो आपके अंदर की प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो जाती है. इसलिए कोरोना से भयभीत होने की जरूरत नहीं है. उन्होंने कहा कि इतिहास गवाह एक के बाद एक बीमारियां आयी हैं. कोरोना से अधिक मौतें विभिन्न वजहों से होती हैं, लेकिन यह एक अलग तरह की बीमारी है, इसलिए इसके प्रति सावधानियां बरतिये, डरिये नहीं. उन्होंने कहा कि अब तक यह देखने को मिला है कि कोरोना को लेकर जारी लाकडाउन में हजारों मील पैदल चलकर अपने घरों को लौटने वाले श्रमिक कोरोना पाजिटिव पाये गये हैं, लेकिन वह स्वस्थ होकर घरों को लौट रहे हैं.
उन्होंने ओडिशा का उदाहरण देते हुए कहा कि ओडिशा में ज्यादा कोरोना पाजिटिव अप्रवासी लोग पाये जा रहे हैं, लेकिन 4338 कोरोना रोगियों में से सिर्फ 11 लोगों की मौत हुई है. यह आंकड़ा दुनिया में सबसे कम है. उन्होंने कहा कि लाकडाउन के कारण घरों को लौटने वाले अप्रवासी लोगों के अंदर डर नहीं है. उन्होंने अपनी इच्छाशक्ति को सुदृढ़ रखी है, जिससे वे हजार-हजार मील पैदल चलकर घर आ रहे हैं. ऐसी स्थिति में उनकी सबल इच्छाशक्ति के कारण उनके अंदर की प्रतिरोध क्षमता भी बलवान है. इसलिए लोगों को कोरोना को लेकर डरने की आवश्यकता नहीं है.
उन्होंने कहा कि दुनियाभर में डाक्टर, चिकित्साकर्मी, पुलिसकर्मी और मीडियाकर्मी कोरोना से दो-दो हाथ कर रहे हैं, लेकिन भयभीत नहीं हैं. डाक्टर कोरोना रोगियों की इलाज कर रहे हैं, चिकित्साकर्मी उनकी सेवा में लगे हुए हैं, लेकिन ध्यान देने की बात यह है कि ये सभी कोविद-19 के नियमों को मानते हैं. सामाजिक दूरी रखते हैं. मास्क पहनते हैं. हाथ धोते हैं. इसलिए ये कोरोना की चपेट में नहीं आते हैं और यदि कहीं गड़बड़ी हुई तो आ भी सकते हैं.
बीमारी किसी को हो सकती है, लेकिन इससे ठीक भी हो सकते हैं. इसलिए लोगों को कोविद-19 के नियमों का पालन करते हुए अपनी दिनचर्या को बनायी रखनी होगी, जीवकोपार्जन करना होगा. उन्होंने लोगों को सलाह दी कि घरों से निकलते समय मास्क जरूर पहनने. किसी भी बाहरी चीजों को न छूएं और अगर छूते हैं तो सेनिटाइजर का प्रयोग करें और सामाजिक दूरी का पालन करें. घर जाते हैं साबुन से हाथ धोएं. जरूरत न हो तो घरों से नहीं निकलें. राज्य और केंद्र सरकार के नियमों पालन करने मात्र से कोरोना आपको छू नहीं सकता है.

बीमारी से घृणा कीजिए, बीमार से नहीं
ओडिशा के सबसे बड़े अस्पताल श्रीराम चंद्र भंज मेडिकल कालेज व अस्पताल के अधीक्षक डॉ अनादा पटनायक ने लोगों से आह्वान किया कि वे बीमारी से घृणा करें, बीमार व्यक्ति से नहीं. उन्होंने कहा कि इस बीमारी की चपेट में कोई भी व्यक्ति आ सकता है, लेकिन वह स्वस्थ भी हो सकता है. ऐसी स्थिति में लोगों को पाजिटिव व्यक्ति से घृणा करने की जरूरत नहीं है. उन्होंने कहा अन्य बीमारियों की तरह यह भी एक बीमारी है. वह कल कटक मारवाड़ी समाज की ओर से आयोजित सम्मान समारोह को संबोधित कर रहे थे. कल कटक मारवाड़ी समाज ने कोरोना योद्धाओं को सम्मानित किया था.

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