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आसान नहीं कोरोना के खिलाफ जंग…

  • लोग स्वतः नहीं कर रहे हैं सामाजिक दूराव को आत्मसात

  • ओडिशा में काफी तेजी से फैल रहा कोरोना का प्रकोप

भुवनेश्वर. ओडिशा में कोरोना के खिलाफ जारी जंग आसान नहीं दिख रही है. कोरोना वायरस का फैलाव काफी तेजी से हो रहा है. ओडिशा में कोरोना पाजिटिव के 76 नये मामले आये हैं. इनमें से 74 क्वारेंटाइन सेंटर से हैं, जबकि 2 स्थानीय लोग संक्रमित हुए हैं. राज्य में कुल मरीजों की संख्या बढ़कर 1593 हो चुकी है. हालांकि इनमें से 733 स्वस्थ हो चुके हैं और 853 सक्रिय मामले हैं और सात लोगों की मौत हो चुकी है.
आंकड़ों में स्वस्थ होने का अनुपात भले ही आधा दिख रहा है, लेकिन गौर करने की बात यह है कि कोरोना का प्रकोप थमने का नाम नहीं ले रहा है. इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि लोग सामाजिक दूराव के पालन को दिल से आत्मसात नहीं कर रहे हैं. कई ऐसी तस्वीरें सामने आयी हैं, जो चौंकाने वाली रहीं हैं. चाहे वह तस्वीर मुंबई की हों या दिल्ली की या कहीं भोजना वितरण के दौरान लोगों की भीड़ की. ये तस्वीरें यहीं बयां कर रही हैं कि वायरस के थमने की नौबत नहीं दिख रही है, क्योंकि सामाजिक दूराव का पालन नहीं हो रहा है.
सामाजिक दूराव के पालन नहीं होने का एक प्रबल कारण यह भी है कि सामाजिक दूराव हमारी संस्कृति का कभी हिस्सा रहा ही नहीं है. सामाजिक संरचना भारतीयता की जीण में बसी हुई है. एकांकी परिवार की संस्कृति भले ही पनप रही है, लेकिन संयुक्त परिवार अब भी कमजोर नहीं हुआ है और न ही भाईचारे की संस्कृति कमजोर हुई है. भारतीय संस्कृति में एकांत में कोई भी मनुष्य नहीं रह सकता है. हमारी संस्कृति में एक समूह रहने की आदत पड़ी है, जिस पर कोरोना वार कर रहा है और एकांत में रहने को मजबूर कर रहा है.
देश में कहीं भी कोरोना के खिलाफ तभी तक सामाजिक दूरी बनी रही, जबतक लाकडाउन और शटडाउन को सख्ती से लागू किया गया. अन्यथा आज लाकडाउन में ढिलाई के साथ ही कोरोना की संख्या का ग्राफ बढ़ते ही जा रहा है, क्यों कि लोगों ने घरों से निकलना शुरू कर दिया है. आज मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने भी समीक्षा बैठक में इसे लेकर चिंता जतायी.
सामाजिक दूराव का पालन सबसे अधिक कहीं नहीं हो पा रहा है, तो वह गरीब तबका के यहां. इनके यहां गरीबी और पेट की भूख फन उठाये खड़ी हैं. इनके पास न तो पैसा है और नहीं ही कोई सहारा. शायद यही कारण है कि संघीय ढ़ाचा उस समय से कमजोर होते दिखने लगा है, जबसे प्रवासियों का अपनी जन्मभूमि की ओर कूच होना शुरू हो गया. जैसे-जैसे लोग अपने गांवों की ओर कूच करते जा रहे हैं कोरोना का ग्राफ और पहुंची भी उसी हिसाब से कूच रहा है. अगर आपको इनका हाल देखना है तो राष्ट्रीय राजमार्ग पर जाना होगा. ओडिशा में चेन्नई से इन दिनों राजमार्ग से प्रवासियों को पश्चिम बंगाल, झारखंड, बिहार, उत्तरप्रदेश और छत्तीसगढ़ की ओर जाते हुए देखा जा रहा है. कुछ प्रवासी बसों और ट्रकों से लौट रहे हैं तो कुछ पैसे के अभाव में पैदल ही अपनी जन्मभूमि की ओर निकल पड़े हैं. ऐसी स्थित में कोरोना की डगर आसान होती दिख रही है. इसके प्रकोप को रोकने के लिए खुदको चलने से रोकना होगा, तभी जाकर कोरोना इस जंग में मात पायेगा.

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