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महाप्रभु भगवान श्री जगन्नाथ मंदिर के नीलचक्र पर बैठा बाज

  • लोककथा और मान्यताओं को लेकर तरह-तरह की होने लगी चर्चाएं

  • नीलचक्र पर कोई भी विलक्षण देखे जाने पर विश्व व भारत के लिए खतरे की आशंका जता रहे हैं लोग

विष्णु दत्त दास, पुरी

महाप्रभु भगवान श्री जगन्नाथ के मंदिर के नीलचक्र पर बाज पक्षी को बैठे देखा गया है. पुरी श्री मंदिर की चोटी पर स्थित नीलचक्र के ऊपर लगे ध्वज के शिखर में एक बाज पक्षी को स्थानीय लोगों ने देखा तथा इसकी तस्वीर भी कैद की गयी है.

श्री मंदिर के सेवायत, शिक्षाविद् शोधकर्ता एवं विशेषज्ञों के अनुसार नीलचक्र ध्वज व नीलचक्र पर कोई भी छेड़छाड़ अशुभ माना जाता है. इसे लेकर तरह-तरह की चर्चाएं होने लगी हैं. लोककथा व मान्यता के अनुसार नीलचक्र पर कोई भी विलक्षण देखे जाने पर विश्व व भारत के लिए खतरे की आशंका रहती है. गौरतलब है 19 मार्च की रात में एकादशी तिथि के दिन श्री मंदिर परंपरा के अनुसार महाद्वीप प्रज्ज्वलित करते हुए सेवारत के दीपक पर नीलचक्र के नीचे हिस्से में बांधे गए ध्वज गिर गया था, जिसमें आग लग गई थी. इसको अशुभ माना गया था.

वर्तमान परिस्थिति में विश्वभर में कोरोना का आतंक छाया हुआ है. जगत के नाथ महाप्रभु श्री जगन्नाथ भगवान के श्री मंदिर के छोटे नीलचक्र पर इस तरह एक महीने में दो बार विलक्षण घटना देखने को मिली है. इसको लेकर पुरी में चर्चा होने लगी हैं कि यहां कोरोना का आतंक पूरे विश्वभर में और जानलेवा होने के साथ भारत में इसका प्रभाव विशेष रूप से देखे जाने की आशंका है. इन परिस्थितियों से आम जिंदगी की सुरक्षा हेतु भगवान श्रीजगन्नाथ जी के शरणागत होने के लिए शहर के लोग से अपील की जा रही है.

लोग भारत समेत विश्व मानव जगत के कल्याण के लिए महाप्रभु जी से प्रार्थना कर रहे हैं. हालांकि श्री मंदिर में 20 तारीख से किसी को भी प्रवेश की अनुमति नहीं है. इसके कारण आम श्रद्धालु अपने-अपने घरों से ही महाप्रभु से यह प्रार्थना कर रहे हैं. लोग भगवान श्री जगन्नाथ से विश्व की रक्षा के साथ जगत का कल्याण करने की कामना कर रहे हैं.

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