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अमित शाह ने दिल्ली दंगों में मारे गए लोगों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की

  • केंद्रीय गृह मंत्री ने लोकसभा में दिल्ली के कुछ हिस्सों में हाल ही में हुई उत्पन्न हुई कानून व्यवस्था की स्थिति पर चर्चा का जवाब दिया

  • कहा-प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत हो रहा है कि दिल्ली दंगे एक सोची-समझी साजिश के तहत किए गए थे

  •  दिल्ली पुलिस ने दिल्ली दंगों को रोकने में सराहनीय काम किया

  • नरेंद्र मोदी सरकार दंगों में शामिल किसी भी व्यक्ति को नहीं बख्शेगी, चाहे किसी भी धर्म या राजनीतिक विचारधारा के हों

  • किसी निर्दोष को परेशान नहीं किया जाएगा : केंद्रीय गृह मंत्री

  • फेस आईडेंटिफिकेशन सॉफ्टवेयर द्वारा दिल्ली दंगों में शामिल चेहरों की पहचान की जा रही है

  • जांच एजेंसियाँ जनवरी के बाद हवाला लेनदेन की गतिविधियों पर नजर रखे हुए हैं और दंगों को आर्थिक मदद पहुँचाने वाले तीन व्यक्तियों को गिरफ्तार किया गया

नई दिल्ली. केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने आज यहाँ लोकसभा में दिल्ली के कुछ हिस्सों में हाल ही में हुई उत्पन्न हुई कानून व्यवस्था की स्थिति पर चर्चा पर बोलते हुए कहा कि प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत हो रहा है कि दिल्ली दंगे एक सोची-समझी साजिश के तहत किए गए थे। उन्होने कहा कि दिल्ली पुलिस इतनी कठोर कार्यवाही करेगी कि दंगा करने वालों के लिए यह एक सबक होगा। श्री शाह का कहना था कि इस हिंसा में जिन लोगों की जान गई है उन सब के लिए हृदय की गहराइयों से दुख व्यक्त करता हूं । श्री शाह ने दंगों में मारे गए लोगों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की।

श्री शाह ने कहा कि पूरे घटनाक्रम को जिस तरह से रखने का प्रयास किया जा रहा है वह ठीक नहीं है उन्होंने बताया कि 25 तारीख रात 11:00 बजे के बाद एक भी घटना घटित नहीं हुई । विपक्ष द्वारा होली के बाद चर्चा कराने के प्रश्न का जवाब देते हुए श्री शाह ने कहा कि होली एक ऐसा त्यौहार है जिसमें अलग-अलग प्रांतों में दंगों का इतिहास रहा है इसलिये ऐसे समय में माहौल खराब न हो और होली शांतिपूर्ण ढंग से मनाई जा सके इसलिए सदन में होली के बाद चर्चा का समय रखा गया था । उन्होने कहा कि पुलिस को जांच की तह में जाने के लिए कुछ समय की आवश्यकता होती है जिनके आधार पर सदन में वह कारण रखे जा सकें । श्री शाह ने कहा कि हमारा इतना ही मकसद था कि शांति बनी रहे और होली के तुरंत बाद सदन में चर्चा हो किंतु सदन नहीं चलने दिया गया ।

केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि कई सदस्यों ने यह सवाल उठाया कि दिल्ली पुलिस क्या कर रही थी इसके जवाब में श्री शाह ने कहा कि विपक्ष का यह दायित्व है कि सत्ता पक्ष और सत्ता पक्ष के अधीन विभागों की कड़ी आलोचना करे, उनके इस अधिकार से कोई आपत्ति नहीं है किंतु जब दंगों के बाद पुलिस मैदान में झूझ रही थी और पुलिस को जब तथ्यों की जांच कर कोर्ट के सामने रखना था ऐसे समय में दिल्ली पुलिस दिल्ली के एक हिस्से में जो हिंसा हो रही थी वह दिल्ली के दूसरे भागों में न फैले इस दिशा में दिल्ली पुलिस द्वारा सकारात्मक कदम उठाए गए जिसके लिए वह प्रशंसा की पात्र है । दिल्ली के 4% क्षेत्र और 13% आबादी तक ही हिंसा सीमित रखने का काम दिल्ली पुलिस ने किया है और यह 12 थानों तक ही हिंसा रुकी रहे यह एक अच्छा प्रयास रहा । श्री शाह ने यह भी कहा कि 24 फरवरी 2020 को दंगों की पहली सूचना प्राप्त हुई और 25 फरवरी रात 11:00 बजे अंतिम सूचना प्राप्त हुई और दिल्ली पुलिस ने बहुत ही संयम से काम लेकर 36 घंटों के अंदर हिंसा को समेटने का काम किया है।

श्री अमित शाह ने कहा कि कहा कि दूसरे दिन लगातार दिल्ली पुलिस के साथ चर्चा की गई कि यह दंगे आगे न फैलें | श्री शाह ने उन 2 दिनों की अलग-अलग बैठकों का हवाला देते हुए कहा कि दिल्ली के दंगों पर पूरी नजर थी और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार श्री अजीत डोभाल को पुलिस का मनोबल बढ़ाने के लिए वहां भेजा गया था । श्री शाह ने यह भी बताया कि तुरंत ही स्पेशल सीपी अपॉइंट किए गए और शीघ्रता के आधार पर इस को काबू करने का प्रयास किया गया ।

श्री शाह ने सदन को बताया कि दंगों में 50 से ज्यादा लोगों की जान गई और हजारों करोड़ का नुकसान हुआ है जिसके लिए यहां की भौगोलिक व्यवस्था को भी समझना पड़ेगा । उनका कहना था कि भारत की घनी आबादी वाला क्षेत्र होने के कारण और सकरी गलियों के होने के कारण पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था का पहुंचना मुश्किल है । इसका क्षेत्र उत्तर प्रदेश की सीमा क्षेत्र से भी लगा हुआ है ।

श्री अमित शाह ने बताया कि वर्तमान में 80 से ज्यादा कंपनियां वहां तैनात हैं और गुनहगारों को पकड़ने की व्यवस्था शुरू की जा चुकी है । श्री शाह ने सदन को बताया कि 26 तारीख के बाद से 700 से ज्यादा प्राथमिकी दर्ज की जा चुकी है, 26 सौ से ज्यादा लोग हिरासत में लिए गए हैं । सीसीटीवी और वीडियो फुटेज का डिटेल एनालिसिस किया जा रहा है । श्री शाह ने यह भी बताया कि आमजन से भी हिंसा से संबंधित वीडियो फुटेज मंगाए गए हैं और बड़ी संख्या में दिल्ली पुलिस को फुटेज प्राप्त भी हुए हैं। फेस आईडेंटिफिकेशन सॉफ्टवेयर द्वारा चेहरों की पहचान की जा रही है जिसके आधार पर यह भी तथ्य प्राप्त हुए हैं कि 300 से ज्यादा लोग उत्तर प्रदेश से आकर यहां हिंसा करने के लिए जिम्मेदार हैं ।

केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने कहा कि सदन के माध्यम से देश की जनता को आश्वस्त करना चाहता हूं कि नरेंद्र मोदी सरकार दंगों में शामिल किसी भी व्यक्ति को नहीं बक्शेगी। श्री शाह ने कहा कि शांति समिति की साढ़े 600 से ज्यादा बैठकें हो चुकी हैं जिनमें सभी धर्मों के लोग शामिल हैं । इतने कम समय में दंगे इतने बड़े स्तर पर फैलना यह जाहिर करता है कि कोई पूर्व नियोजित साजिश रही है । इस तरह के कामों में लिप्त संस्थाओं में कितनी राशि कहां से आई है इस पर भी जांच की जा रही है । श्री शाह ने बताया कि 3 लोग जो दिल्ली के दंगों में वित्तीय सहायता पहुंचा रहे थे उनकी शिनाख्त कर ली गई है। श्री शाह ने कहा कि जिन्होंने भी दंगा करने की हिमाकत की है वह कानून की गिरफ्त से भाग नहीं पाएंगे । श्री शाह ने बताया कि जांच के दौरान यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि किसी निर्दोष को परेशान न किया जाए।

श्री अमित शाह ने कहा कि सी ए ए पर पूरे देश के अल्पसंख्यकों को गुमराह किया जा रहा है । सीएएए में किसी की भी नागरिकता लेने का प्रावधान नहीं है इसमें केवल पीड़ित लोगों को नागरिकता देने का काम किया जा रहा है । श्री अमित शाह ने कहा कि पूरे देश में सीएए के समर्थन में रैलियां निकली हैं और बड़ी संख्या में लोग उनमें शामिल हुए हैं । उन्होंने कहा कि देश की बड़ी पार्टी के नेता लोगों को उकसा रहे थे और 14 दिसंबर की हेट स्पीच के बाद शाहीन बाग का धरना शुरू हुआ । श्री शाह ने बताया कि इस तरह भड़काऊ भाषण 24 तारीख को दंगों की शक्ल में परिवर्तित हो गए।

श्री अमित शाह का कहना था कि दिल्ली दंगों में पैसा पहुंचा है, सोशल मीडिया में भड़काया गया है इन सब की जांच चल रही है और कोई बच नहीं पाएगा । श्री शाह ने बताया कि सरकार द्वारा दिल्ली हाईकोर्ट को क्लेम सबमिशन समिति के गठन से संबंधित पत्र लिखा जा चुका है । श्री अमित शाह ने बताया कि दंगों के दौरान 52 भारतीयों की मृत्यु हुई है 526 भारतीय घायल हुए हैं 371 दुकाने जली हैं, 142 घर जलाये गये।

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