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जैश आतंकियों की सजा दिलाने में ओड़िया अधिकारी की महत्वपूर्ण भूमिका

भुवनेश्वर। एक ओड़िया आपीएस अधिकारी ने जैश-ए-मोहम्मद के पांच आंतकियों सजा दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निर्वहन करके राज्य का नाम रौशन किया है। बताया जाता है कि नई दिल्ली में एक विशेष एनआईए अदालत ने कल जैश-ए-मोहम्मद के पांच आतंकवादियों को उम्रकैद और एक आतंकी मामले में एक अन्य को पांच साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। यह पुलवामा हमले से संबंधित एनआईए के सबसे महत्वपूर्ण मामलों में से एक है। इस मामले की जांच 2008 बैच के ओड़िया आईपीएस अधिकारी डॉ सत्यजीत नायक ने एनआईए के पुलिस अधीक्षक (एसपी) के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान मुख्य जांच अधिकारी (सीआईओ) के रूप में की थी।
बताया जाता है कि मौजूदा मामला जैश-ए-मोहम्मद के शीर्ष नेताओं, जिसमें मुफ्ती अब्दुल रऊफ असगर, पाकिस्तान स्थित मौलाना मसूद अजहर के भाई शामिल हैं के द्वारा भारत के विभिन्न हिस्सों में आतंकवादी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए व्यक्तियों की भर्ती करने की आपराधिक साजिश से संबंधित है। इस मामले में बड़ी संख्या में पाकिस्तान प्रशिक्षित आतंकवादी जैश-ए-मोहम्मद के हथियार और विस्फोटक प्रशिक्षकों ने सीमा पार करके भारत के विभिन्न राज्यों में फैले अपने सहयोगियों की मदद से गतिविधियों को अंजाम दिया था।
अदालत ने साजद अहमद खान उर्फ सज्जाद अहमद खान, बिलाल अहमद मीर उर्फ बिलाल मीर, मुजफ्फर अहमद भट्ट उर्फ मुजफ्फर भट्ट, इशफाक अहमद भट उर्फ इशफाक भट्ट और मेहराजुद्दीन चोपन उर्फ महराज को धारा 121ए के तहत, 120बी आईपीसी, 18, 38, 39 यूए(पी) अधिनियम और विस्फोटक पदार्थ अधिनियम की धारा 4, 5 के तहत दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
अदालत ने छठे दोषी तनवीर अहमद गनी उर्फ तनवीर अहमद को आईपीसी की धारा 120 बी, 18, 38 यूए (पी) अधिनियम के तहत पांच साल की जेल की सजा सुनाई।

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