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शिक्षकों के मुद्दे पर सरकार की संवेदनहीनता को लेकर विपक्ष ने घेरा

  •  कहा- आंदोलनकारियों की समस्याओं का समाधान यदि करने का सरकार प्रयास नहीं करेगी तो सदन क्यों चलेगी

भुवनेश्वर। शिक्षकों के मुद्दे पर सरकार की संवेदनहीनता को लेकर विपक्ष ने आज जमकर घेरा। विपक्षी नेताओं ने कहा कि आंदोलनकारियों की समस्याओं का समाधान यदि करने का सरकार प्रयास नहीं करेगी, तो विधानसभा का सदन क्यों चलेगा।
सर्वदलीय बैठक के बाद 11.55 बजे विधानसभा की कार्यवाही जब शुरु हुई, तब विपक्षी भाजपा व कांग्रेस ने राज्य सरकार को शिक्षकों समेत अन्य आंदोलनकारियों संगठनों की मांगों को लेकर राज्य सरकार को असंवेदहीन होने का आरोप लगा कर कठघरे में खड़ा किया। विपक्षी विधायकों ने कहा कि यदि सदन लोगों की समस्याओं का समाधान नहीं कर पा रहा है, तो फिर इसे चलाने का क्या लाभ है। यदि शिक्षकों की समस्याओं के समाधान को लेकर राज्य सरकार कोई कदम नहीं उठाय़ेगी, तो फिर सदन चलाना उचित नहीं होगा।
कांग्रेस विधायक दल के नेता नरसिंह मिश्र ने कहा कि विधानसभा अध्यक्ष ने सोमवार को अपने आसन से राज्य सरकार से शिक्षकों के मुद्दे पर विशेष ध्यान देने का निर्देश दिया था। इसे लेकर हम विधानसभा अध्यक्ष को धन्यवाद देते हैं, लेकिन विधानसभा अध्यक्ष के निर्देश के बावजूद शिक्षकों के मुद्दे पर राज्य सरकार का जो रुख है, उसे हम निंदा करते हैं। राज्य सरकार ने आंदोलनरत शिक्षक प्रतिनिधियों से क्या बातचीत की, उनकी मांगें क्या हैं, इस बारे में सदन को कुछ भी नहीं बताया गया। हमें शिक्षकों के जरिये जो बातें सुनने को मिली है, उसके अनुसार विधानसभा अध्यक्ष के निर्देश के बाद राज्य के जनशिक्षा विभाग के सचिव ने आंदोलनरत शिक्षक प्रतिनिधियों से कहा कि वह नये हैं। इस कारण उनकी मांगों के बारे में उन्हें पता नहीं है।
उन्होंने कहा कि भुवनेश्वर में लाखों की संख्या में शिक्षक सड़क पर उतर कर आंदोलन कर रहे हैं, लेकिन राज्य के शिक्षा मंत्री पद्मपुर विधानसभा उपचुनाव में पार्टी के लिए कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार इतनी असंवेदनशील हो चुकी है कि राज्य के लोगों की समस्याओं के निराकरण की बातें सुनने को तैयार ही नहीं हैं। हम यहां सदन की दीवारों के सामने बोल कर क्या मिलने वाला है।
उन्होंने कहा कि यदि हम लोगों की समस्याओं का समाधान नहीं कर पा रहे हैं, तो सदन को चलाने का क्या तूक है। उन्होंने कहा कि लोगों की समस्याओं का समाधान के लिए ही सदन है। यह काम नौकरशाह नहीं करेंगे। उन पर यह कार्य नहीं छोड़ा जा सकता है। स्वास्थ्य व शिक्षा जैसे मुद्दों को लेकर राज्य के नौकरशाह असंवेदनशील है।
भाजपा विधायक दल के नेता मोहन मांझी ने भी कहा कि राज्य के शिक्षा मंत्री को राज्य की शिक्षा व्यवस्था चरमरा जाने पर भी कोई फरक नहीं पड़ रहा है। वह पद्मपुर में पार्टी का प्रचार करने गये हैं। इधर लाखों शिक्षक सड़क पर ठंड में रात गुजार रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस मामले में सरकार को तुरंत बात कर समाधान का रास्ता निकालना चाहिए। कांग्रेस विधायक तारा प्रसाद वाहिनिपति, संतोष सिंह सालुजा, भाजपा विधायक भास्कर मढेइ ने भी राज्य सरकार के असंवेदनशीलता को लेकर निशाना साधा और इस मामले के समाधान के लिए कदम उठाने की मांग की।
बीजद विधायक अमर प्रसाद सतपथी ने कहा कि शिक्षकों के मुद्दे का समाधान करने के लिए राज्य सरकार प्रयास कर रही है, लेकिन उसी मुद्दे को लेकर जो सदन को न चलाने की बात कही जा रही है, वह गलत है। सदन चलेगा तो विधायक अपनी-अपनी समस्याओं को यहां उठायेंगे। इसलिए सदन की कार्यवाही में बाधा नहीं डालनी चाहिए।
इसके बाद विधानसभा अध्यक्ष ने शिक्षकों के मुद्दे पर राज्य सरकार ने क्या किया है उस बारे में सदन को अवगत कराने के लिए राज्य के शिक्षा मंत्री समीर रंजन दाश के स्थान पर विज्ञान व तकनीकी मंत्री अशोक पंडा को बुलाया। पंडा ने इस बारे में अपनी बात रखी, लेकिन इसके बाद भी स्थिति सामान्य नहीं हो पायी। विपक्षी विधायकों का हंगामा जारी रहने के कारण सदन को दोपहर चार बजे तक स्थगित कर दिया गया।

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