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अनुगूल में मेगा एल्युमीनियम पार्क के विकास को 428.95 करोड़ मंजूरी

  •  कुआखाई नदी के पार 127.32 करोड़ की लागत से आईएसएस निर्माण को हरी झंडी

भुवनेश्वर. ओडिशा मंत्रिमंडल ने अनुगूल जिले में मेगा एल्युमीनियम पार्क के विकास के लिए 428.95 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता को मंजूरी दी. 428.95 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता में भूमि अधिग्रहण भी शामिल है. आईडीसीओ के माध्यम से पार्क को पूरा करने का लक्ष्य तीन साल (2021-22 से 2023-24) रखा गया है. राज्य सरकार ने अन्य राज्यों में औद्योगीकरण के वर्तमान परिदृश्य को ध्यान में रखते हुए नई योजना “अंगुल में मेगा एल्युमिनियम पार्क के विकास के लिए वित्तीय सहायता” शुरू की है. बताया गया है कि राज्य में विश्व स्तर के बुनियादी ढांचे के साथ प्रतिस्पर्धी मूल्य पर विकसित भूमि प्रदान करने की आवश्यकता है. इससे आगामी औद्योगिक पार्कों में अपनी इकाइयां स्थापित करने के लिए उद्यमी आकर्षित होंगे. यह सब तभी संभव हो सकता है, जब राज्य सरकार मेगा एल्युमिनियम पार्क के विकास के लिए आवश्यक बजटीय सहायता प्रदान करे, ताकि भूमि की दरें आकर्षक और अन्य प्रतिस्पर्धी राज्यों के साथ तुलनीय हों. उपरोक्त नये औद्योगिक एस्टेट के विकास को विजन 2025 के अनुसार फोकस सेक्टर के तहत रखा गया है और नियमित रूप से 5-टी फ्रेमवर्क के तहत निगरानी की जा रही है.
इसके साथ ही ओडिशा मंत्रिमंडल ने आज राजधानी स्थित पेंड्रा के पास कुआखाई नदी के पार 127.32 करोड़ रुपये की लागत से एक इनस्ट्रीम स्टोरेज स्ट्रक्चर (आईएसएस) के निर्माण के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी. सफल परियोजना के गठन के बाद इसमें हाइड्रो-मैकेनिकल कार्य, बिजली कनेक्टिविटी कार्य, सड़क संपर्क, स्टाफ क्वार्टर सहित सभी घटकों के डिजाइन और अनुमान सहित परियोजना के संचालन और रखरखाव के साथ पांच साल की अवधि या पांच बाढ़ के मौसम, जो भी अधिक होंगे, परियोजना में शामिल है. परियोजना को 24 महीनों में पूरा करने की योजना है. कैबिनेट ने जीएसटी को छोड़कर 127,32,00,000 रुपये की निष्पादन राशि और पांच साल के लिए ओ एंड एम लागत के लिए जीएसटी को छोड़कर 75 लाख रुपये की राशि के लिए निविदा को मंजूरी दी. बताया गया है कि यह भंडारण संरचना पानी की उपलब्धता को बढ़ायेगी और भुवनेश्वर नगर निगम और खुर्दा जिले के बालियंता ब्लॉक के लोगों की पीने और घरेलू आवश्यकता को पूरा करेगी. इसके अलावा, भंडारण का उपयोग स्थानीय लोगों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति में सुधार के साथ पशुधन खेती, सिंचाई, औद्योगिक पानी की मांग और मनोरंजक उद्देश्यों के साथ-साथ 161.79 हेक्टेयर क्षेत्र में फैले मत्स्य विकास के लिए किया जायेगा. राज्य सरकार द्वारा 2019-2020 के दौरान लोगों के विस्थापन के बिना नदी तटबंधों के भीतर बड़े जल निकायों के निर्माण के लिए 11,700 करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ “इन-स्ट्रीम स्टोरेज स्ट्रक्चर का निर्माण” योजना के तहत परियोजना की परिकल्पना की गई है.

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